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स्वर्गीय श्री रामा कृष्णा तत्कालीन अधिशासी अभियंता की पत्नी ओ॰एस॰डी॰ बनीं

  हरिद्वार। हरिद्वार से स्थानांतरित होकर मुरादाबाद गए अनुसंधान एवं नियोजन खण्ड में पदस्थापित रहे अधिशासी अभियंता श्री रामा कृष्णा की पत्नी को उत्तर प्रदेश शासन ने मृतक आश्रित को नौकरी के प्रावधान के मद्देनज़र विशेष कार्याधिकारी ( ओ॰एस॰डी॰ ) के पद पर नियुक्ति हेतु आदेश जारी किए। उल्लेखनीय है कि अनुसंधान एवं नियोजन खण्ड मुरादाबाद के अधिशासी अभियंता पद पर रहते श्री रामा कृष्णा का देहांत लखनऊ मुरादाबाद के बीच एक भीषण दुर्घटना में हो गया था।   श्री   रामा कृष्णा जी   उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मध्य गंगा नहर निर्माण खंड प्रथम हरिद्वार से परिवर्तित कर बनाए अनुसंधान एवं नियोजन खण्ड मुरादाबाद को मुरादाबाद स्थानांतरित करने का विशेष प्रयास भी कर रहे थे। श्री   रामा कृष्णा जी एक साफ़ सुथरी छवि एवं कर्मठ अधिकारी माने जाते थे।  

राम मंदिर का निर्माण गप्पू करेगा या पप्पू?

हरिद्वार। भाजपा धर्म, आस्था और विकास की विरोधी है वह न तो मंदिर निर्माण करना चाहती न ही गंगा की सफाई और गायों का संरक्षण केवल और केवल सत्ता में बने रहने के लिए धार्मिक भावनायें भड़काकर वोट लेती है। रामजन्म भूमि का ताला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने खोला था और निर्माण भी कांग्रेस का ही कोई नेता करेगा। देश की जनता अब भली प्रकार जान गयी है कि एक मंदिर में पूजा करते महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या करने वाले, अयोध्या में धर्मस्थल ;चाहे वह मंदिर हो या मस्जिदद्ध ध्वस्त करने वाले तथा शबरी माला मंदिर पर राजनीति करने वाले अयोध्या में कभी मंदिर का निर्माण नहीं करेंगे। जब-जब चुनाव आते हैं दल विशेष से जुड़े लोग मंदिर निर्माण की गप्प हांकना शुरु कर देते हैं और चुनाव बीत जाने के बाद पुनः चार साल तक चुप होकर बैठ जाते हैं। कुछ साधु-संत जो पूजा पाठ के स्थान पर कुकर्म कर जेलों की शोभा बढ़ा रहे हैं उनकी बिरादरी भी चुनाव आते ही राम-राम मंदिर-मंदिर की चिल्ल-पों मचाने लगती है और चुनाव के बाद बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ, मातृशक्ति का सम्मान करो, गाय और गंगा सफाई के नाम पर सरकारी धन में बंदरबांट करने में लग जाते...

यह है मोदी का गुजरात माडल

हरिद्वार। दिल्ली में सीबीआई अफसरों की अदला-बदली को लेकर चल रही उठापटक ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चार वर्षों में की गई तानाशाही की सारी पोल पट्टी खोल दी है और सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद प्रधानमंत्री पर जितनी उंगलियां आज उठ रही हैं उतनी आजादी के सत्तर साल में अब तक किसी प्रधानमंत्री पर नहीं उठीं। न्यायपालिका का यही रुख रहा तो नरेन्द्र मोदी अब तक सत्ता संचालन के सर्वाधिक तानाशाह प्रधानमंत्री के रुप में जाने जायेंगे। सीबीआई और ईवीएम के माध्यम से अपने पक्ष में मतदान कराने, योजना आयोग का नाम और स्वरुप बदलने के साथ ही राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों का भी दुरुपयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। सीबीआई हमारे देश की ऐसी सर्वोच्च संस्था है जिसके निदेशक की नियुक्ति भी प्रधानमंत्री कार्यालय, सर्वोच्च न्यायालय तथा नेता प्रतिपक्ष की सहमति से होती है लेकिन हमारे प्रधानमंत्री ने विपक्ष एवं न्यायपालिका सभी के अधिकारों को ताक पर रखकर वहां भी अपने गुजरात वाले जाने-माने माडल का प्रयोग कर अपनी भद्द अपने आप पीट ली है। वास्तविकता यह कि नरेन्द्र मोदी देश के सबसे सम्पन्न और समस्या विहीन प्रदेश ...

मोदी के गुजरात माडल ने गिरायी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा

हरिद्वार। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात जैसे छोटे, सम्पन्न तथा समस्याविहीन राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और तीसरी बार मुख्यमंत्री चुने जाने के पहले ही उनको वहां के पंूजीपतियों ने गोद ले लिया था यही कारण था कि 2011-12 में गुजरात विधानसभा के लिए सम्पन्न हुआ चुनाव नरेन्द्र मोदी ने इन्हीं पूंजीपतियों के बल पर जीता था, उस चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने भाजपा के किसी बड़े नेता अथवा स्टार प्रचारक को अपने यहां नहीं बुलाया और अपने बलबूते अकेले ही चुनाव जीत कर यह सिद्ध कर दिया कि पार्टी में उनका कद इतना बड़ा हो गया है अब वे प्रधानमंत्री की कुर्सी भी संभाल सकते हैं। गुजरात के पूंजीपतियों की पहल पर ही मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया गया और उनकी रैलियों में अरबों रुपये की धनराशि भी इन्हीं पूंजीपतियों ने खर्च की जिनके लिए नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक काम करते आये हैं पेट्रो पदार्थों के बाद राफेल सौदे में हुई ड्रील के बाद और सीबीआई प्रकरण से अब सारे मामले परत दर परत खुलने प्रारम्भ हो गए हैं तथा जनवरी तक देश की राजनीति में किसी बड़े भूचाल की संभावना से भी इं...

वोट के बदले शराब क्यों पिलाते हैं प्रत्याशी

हरिद्वार। उत्तराखण्ड राज्य में आजकल स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं। राजनीति कितना बड़ा कारोबार बन गया है इसका अंदाजा राजनेताओं की चुनाव जीतने के बाद बढ़ी सम्पत्तियों के आकलन से लगाया जा सकता है। इस छोटे से चुनाव में टिकट की कितनी मारामारी चली, साम, दाम, दण्ड, भेद सबकुछ प्रयोग में लाया गया आखिर क्यों, क्या यह सब जनता की सेवा करने की भावना का जुनून है या नेता बनकर धनपति बनने के कारोबार की बुनियाद मजबूत करने का। हमारे देश में कौन गरीब है और कौन-कौन रईस है, गरीब-गरीब कैसे बना और रईस-रईस कैसे बने तथा सूफी व्यक्ति शराबी कब बनता है। एक सीधा-सादा युवा शराब की लत कब पकड़ता है इन सब के पीछे चुनाव ही हैं देश में जब भी चुनाव आते हैं। 15-20 प्रतिशत नया शराबी पैदा हो जाता है। तीन-चार प्रदेशों में किए गए सर्वेक्षणों से यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव में प्रत्याशी मुफ्त की शराब बांटते हैं और नवयुवक एक सप्ताह की इस चुनावी अवधि में शराब पीने के आदी हो जाते हैं फिर पांच वर्ष तक अपने पैसे से खरीद कर शराब पीते हैं जिससे सरकार को सर्वाधिक राजस्व की प्राप्ति होती है इस सारी प्रक्रिया को संत समाज और सरकारी अधिका...

निष्पक्ष पत्रकारिता ही सबसे बड़ा धर्म : स्वामी अवधेशानन्द गिरि

हरिद्वार। भारत के पत्रकारों की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्राप्त संस्था नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (इण्डिया) की जनपद इकाई के तत्वावधान में आज पत्रकारिता के महान स्तम्भ अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी की जयन्ती, समारोह के उपलक्ष में ‘गणेशशंकर विद्यार्थी व वर्तमान पत्रकारिता’ पर एक ऐतिहासिक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता के रुप में प्रख्यात पत्रकार राहुल देव एवं मुख्य अतिथि के रुप में सम्पूर्ण विश्व को अध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत करने वाले जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने अपने आशीवर्चनों से अभिसिंचित किया।पत्रकारिता को मुख्य अतिथि के रुप में मार्गदर्शन देते हुए जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने कहा कि पत्रकारिता सबसे बड़ा धर्म है जो समाज की संवेदनशीलता के प्रति सजग रहकर अपने दायित्व एवं चुनौतियों में सामंजस्य स्थापित करता है। मिशनरी पत्रकारिता को साधुवाद देते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकार समस्त मूल्यों पर व्यवस्थाओं का प्रबंध करता है लेकिन पत्रकार जब सत्य और साहस भूल जाता है तब देश और समाज का बड़ा अहित हो जात...

मोदी देश का सबसे बड़ा धोखेबाज

हरिद्वार। लोकसभा चुनाव 2014 से पूर्व भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि भारत का कालाधन विदेशों में जमा है और वे यदि प्रधानमंत्री बन गए तो तीन माह के अन्दर समस्त कालाधन वापस भारत में ले आयंेगे, उन्हांेने विदेशों में जमा भारत के कालेधन का आंकलन करते हुए बताया था कि पूरा धन वापस आने के बाद प्रत्येक भारतवासी के खाते में 15-15 लाख रुपये जमा कराये जा सकते हैं। देश की जनता ने उनकी बातों पर विश्वास किया और उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया। प्रधानमंत्री बनने के बाद वे न केवल अपना वादा भूल गए बल्कि वर्तमान में उन विदेशी बैंकों में जमा धनराशि डेढ़ गुनी हो गयी बतायी जाती है। बीते तीन वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति में आयी गिरावट का आंकलन किया जाये तो विभिन्न कम्पनियां बनाकर लगभग आधा दर्जन देश के बड़े कर्जदार बैंकों का पैसा लेकर खुलेआम विदेश चले गए और चौकीदार ने उन्हें रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गत दिवस उठाये गए बड़े कदम के अनुसार पंजाब नेशनल बैंक में दो अरब अमेरिका डॉलर की कथित धोखाधड़ी करने वाले हीरा करोबारी नीरव मोदी की 255 करोड़ रुपय...