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राम मंदिर का निर्माण गप्पू करेगा या पप्पू?

हरिद्वार। भाजपा धर्म, आस्था और विकास की विरोधी है वह न तो मंदिर निर्माण करना चाहती न ही गंगा की सफाई और गायों का संरक्षण केवल और केवल सत्ता में बने रहने के लिए धार्मिक भावनायें भड़काकर वोट लेती है। रामजन्म भूमि का ताला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने खोला था और निर्माण भी कांग्रेस का ही कोई नेता करेगा। देश की जनता अब भली प्रकार जान गयी है कि एक मंदिर में पूजा करते महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या करने वाले, अयोध्या में धर्मस्थल ;चाहे वह मंदिर हो या मस्जिदद्ध ध्वस्त करने वाले तथा शबरी माला मंदिर पर राजनीति करने वाले अयोध्या में कभी मंदिर का निर्माण नहीं करेंगे। जब-जब चुनाव आते हैं दल विशेष से जुड़े लोग मंदिर निर्माण की गप्प हांकना शुरु कर देते हैं और चुनाव बीत जाने के बाद पुनः चार साल तक चुप होकर बैठ जाते हैं।
कुछ साधु-संत जो पूजा पाठ के स्थान पर कुकर्म कर जेलों की शोभा बढ़ा रहे हैं उनकी बिरादरी भी चुनाव आते ही राम-राम मंदिर-मंदिर की चिल्ल-पों मचाने लगती है और चुनाव के बाद बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ, मातृशक्ति का सम्मान करो, गाय और गंगा सफाई के नाम पर सरकारी धन में बंदरबांट करने में लग जाते हैं। धर्म और आस्था के नाम पर देश की जनता की भावनायें भड़काने वालों की असलियत आजादी के साढ़े पांच महीने बाद ही सामने आ गयी थी जब दिल्ली के बिरला मंदिर में राम नाम की माला जप रहे महात्मा गांधी पर एक धर्मगुरु की पिस्टल को एक धर्मग्रंथ में काटकर रखी गयी पिस्टल से मंदिर में पूजा कर रहे महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या को अंजाम दिया गया उनसे राम मंदिर निर्माण की आशा छोड़ देनी चाहिए जिन्होंने रामलला को त्रिपाल और तंबुओं में डाल दिया, गंगा रक्षा के नाम पर करोड़ों-अरबों के वारे-न्यारे कर रहे हैं जो कारगिल युद्ध में शहीद जवानों के लिए बनाए गए ताबूतों में भी भ्रष्टाचार कर गए हों, राफेल विमान खरीद में बड़ा घोटाला किया हो। पूंजीपतियों का कालाधन सफेद करने के लिए नोटबंदी की हो और सरकारी विभागों को नाकारा बनाकर देश के निजीकरण की जो भूमिका बना रहे हों उन्हें दोबारा अवसर प्रदान करने से पूर्व जनता को सोचना होगा कि 1952 से 2014 तक देश कैसे चला और 2015 से 2018 तक देश में क्या बदलाव आये अब फैसला जनता के हाथ में है। भाजपा धर्म की हितैषी कभी नहीं हो सकती, राम मंदिर, रामसेतु सभी मुद्दे भाजपा के ही शासनकाल में उठे और जब-जब भाजपा की सरकार बनती है तभी धर्मगुरुओं को जेल की हवा खानी पड़ती है ये संत भी ऐसे हैं जो कांग्रेस की आलोचना करते हैं जबकि भाजपा इनको जेल भेजती है भाजपा का यह भी नियम है कि वह सनातन धर्म के संतों पर आरोप-प्रत्यारोप थोपती है किसी अन्य धर्म पर नहीं।  यह भी सिद्ध हो गया है कि भाजपा के शासनकाल में सनातन धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म पर अब तक कोई आंच नहीं आयी यह अच्छी बात है। सनातन धर्म तो बर्दाश्त कर लेता है बेचारे अन्य धर्म सुरक्षित रहें भाजपा का यह निर्णय स्वागत योग्य है।

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