हरिद्वार 3 मई। ऑल इंडिया सलमानी ट्रस्ट के उपाध्यक्ष तथा समाजवादी नेता फैसल सलमानी में वरिष्ठ पत्रकार तथा सलमानी समाज के प्रांतीय सदर जुलफिकार अली सलमानी के असामयिक निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कलाम पाक की तिलावत की। उन्होंने संपूर्ण सलमानी समाज की तरफ से शबाब की नियत से फातहा करते हुए उनके परिजनों को इस अपार दुख सहन की सामर्थ देने की कामना की। लाकडाउन के मद्देनजर जूममीटिंग के माध्यम से प्रेस को जारी बयान में फैसल सलमानी ने कहा कि जुल्फिकार अली सलमानी समरसता वादी विचारधारा के उदीयमान खबर नवीस थे तथा बिरादरी के हक हकूको के प्रति हमेशा समर्पित भावना से कार्य करते रहे उनका असामयिक निधन संपूर्ण समाज के लिए बड़ी हानि है । जुल्फिकार अली सलमानी के निधन पर संवेदना व्यक्त करने वालों में प्रमुख थे नदीम सलमानी, सुहेल सलमानी, नसीम सलमानी, शमशाद सलमानी, सलीम सलमानी ,शाहिद सलमानी, शमशेर सलमानी, आसिफ सलमानी, खुर्शीद सलमानी जमीर सलमानी तथा हाजी शहाबुद्दीन सलमानी ।
समाचार-पत्र समाज के मार्ग दर्शक होते हैं और समाज के आईना (दर्पण) भी होते हैं, समाचार-पत्र का प्रकाशन एक ऐसा पवित्र मिशन है जो राष्ट्र एवं समाज को समर्पित होता है। समाचार-पत्र ही समाज और सरकार के बीच एक सेतु का काम करते हैं, जनता की आवाज सरकार तक तथा सरकार की योजनायें जनता तक पहुंचाकर विकास का सोपान बनते हैं। आजादी के पूर्व तथा आजादी के बाद से लगभग पांच दशक तक समाचार-पत्रों ने सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का निर्वाह किया। 1975 में लगे आपातकाल से भी समाचार-पत्र विचलित नहीं हुए और उन्होंने अपने पत्रकारिता धर्म का निर्वाह किया ऐसा तब तक ही हुआ जब तक पत्रकार ही समाचार पत्र के प्रकाशक, स्वामी एवं संपादक होते थे ऐसा अब नहीं है। समाचार पत्रों की निष्पक्षता और निर्भीकता कुछ पंूजीपतियों को रास नहीं आयी और उन्होंने मीडिया जगत पर अपना प्रभुत्व जमाना प्रारम्भ कर दिया। पहले तो समाचार-पत्रों की जनता से पकड़ ढीली करने के लिए इलैक्ट्रोनिक मीडिया को जन्म दिया और बाद में प्रिंट मीडिया का स्वरुप बदल कर उसके मिशन को समाप्त कर व्यावसायिकता में बदल दिया। चंद पूंजीपतियों ने सरकार से सांठगांठ कर मीडिया...
Comments
Post a Comment