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रावण ने भगवान श्रीराम के हाथों अपने मुक्ति के लिए किया माता सीता का हरण






हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज त्रेता युग की उस दुर्लभ लीला का दर्शन कराया जिसमें चार वेदों के ज्ञाता रावण ने भगवान के हाथों अपनी मुक्ति के लिए माता सीता का हरण किया और उनके शरीर पर बिना हाथ लगाये सम्मोहन क्रिया से रथ में बिठाकर लंका ले गया। रामलीला के इस अद्भुत एवं महत्वपूर्ण दृश्य में रावण की भूमिका का सफल निर्वाह करते हुए मनोज सहगल ने जमकर वाहवाही लूटी वहीं श्रीरामलीला कमेटी ने रावण दरबार को जिस प्राचीन राजशाही शैली में सजाया ऐसा दरबार शायद ही किसी अन्य लीला में मिलता है।
श्रीरामलीला कमेटी द्वारा भव्य रुप में सजाये गए रावण दरबार में जब राजसी शैली में राज दरबारी तथा रावण पुत्रों का आगमन हुआ और स्वयं लंकाधिपति रावण का जब पुष्प वर्षा से राजदरबार में स्वागत हुआ तो उस दृश्य को देखकर दर्शक भी अपने अतीत से गौरवान्वित हुए। रावण दरबार में जब उसकी बहन सूर्पनखा ने अपने साथ घटित घटना की जानकारी देते हुए बताया कि खर और दूषण भी अब इस दुनिया में नहीं रहे तो रावण समझ गया कि भगवान का अवतार हो गया है और उनके हाथों अपनी मुक्ति का उपाय करना चाहिए। रावण भले ही अहंकारी था लेकिन अपना काम निकालने के लिए वह स्वयं अपने मामा मारीच के पास गया और सीता हरण की भूमिका तैयार की। श्रीरामलीला कमेटी ने अपने रंगमंच पर सीताहरण के माध्यम से सृष्टि के उस यथार्थ का दर्शन कराया जो वास्तविकता के विपरीत होता है और किसी असंभव कार्य को संभव बनाने के लिए कितने-कितने यत्न करने पड़ते हैं। श्रीरामलीला कमेटी ने धर्म एवं अध्यात्म को अधिमान देते हुए यह दर्शाया कि व्यक्ति कितना ही बलवान, धनवान और सामर्थ्यवान क्यों न हो वह भी अपनी मुक्ति का हर संभव एवं असंभव प्रयास करता है इसीलिए रावण ने सीता का अपहरण करने से पूर्व भी प्रत्यश्चित करते हुए माता सीता से माफी मांगी कि वह इस कार्य को भगवान राम के हाथों अपनी मुक्ति के लिए कर रहा है इसीलिए भिक्षा लेने से पूर्व उसने सीता का परिचय पूछा था ताकि कोई अनर्थ न हो जाये। जटायु वध की लीला भी अनर्थ अथवा दुष्कर्म का विरोध करने की प्रेरणा देती है क्योंकि वर्तमान में व्यक्ति दूसरे के दुःखों का भागीदार न बनकर केवल स्वार्थ के लिए जीता है। श्रीरामलीला कमेटी के मंत्री डॉ. संदीप कपूर तथा उपमंत्री कन्हैया खेवड़िया ने संयुक्त रुप से बताया कि श्रीरामलीला कमेटी विगत 93वें वर्षों से भगवान श्रीराम के चरित्र से समाज में संस्कार और संस्कृति का समावेश कर रही है तथा रामलीला के सभी दृश्य एवं पात्र समाज के लिए प्रेरणादायी है। कमेटी के प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि 19 अक्टूबर को रोडी बेलवाला मैदान पर सम्पन्न होने वाले दशहरा के लिए रावण तथा कुम्भकरण के पुतलों का निर्माण प्रगति पर है इस वर्ष दोनों पुतले विशालकाय तथा आतिशबाजी से सुसज्जित होंगे। उन्होंने बताया कि मंगलवार को हनुमान रावण संवाद एवं लंका दहन की लीला का मंचन होगा। वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील भसीन तथा कोषाध्यक्ष रविन्द्र अग्रवाल ने बताया कि दशहरा पर्व को भव्यता प्रदान करने की सभी तैयारियां 18 अक्टूबर तक पूर्ण कर ली जायेंगी और इस वर्ष का यह पर्व अद्वितीय होगा। श्रीरामलीला कमेटी के रंगमंच पर सम्पन्न हो रहे सभी दृश्यों को भव्यता प्रदान करने में सम्पत्ति कमेटी के अध्यक्ष गंगाशरण मददगार, मंत्री रविकान्त अग्रवाल, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विरेन्द्र चड्ठा, महामंत्री कृष्णमूर्ति भट्ट, महाराजकृष्ण सेठ, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, नरेन्द्र शर्मा, राहुल वशिष्ठ, श्रीकृष्ण खन्ना, रमन शर्मा, पवन शर्मा, सुनील वधावन, अनिल सुखीजा तथा महेश गौड़ इत्यादि का योगदान सराहनीय है।  

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