कौन कहता है अच्छे दिन नहीं आए अभी और अच्छे दिन आने वाले हैं।
दारू पीकर वोट देने वाली युवा पीढ़ी की जय ।
भारी भरकम वेतन लेने के बाद भी कमीशन खोरी एवं भ्रष्टाचार करने वाली सरकारी मशीनरी की जय।
सस्ती जमीन सस्ती श्रम शक्ति और सस्ता कच्चा माल खरीद कर चाइना से महंगा सामान बेचने वाले उद्योगपतियों सामान चाइना से महंगा सामान बेचने वाले उद्योगपतियों कर चाइना से महंगा सामान बेचने वाले उद्योगपतियों की जय । भारी भरकम मूल्य लेकर बिकने वाले जनप्रतिनिधियों की भी जय ।
हरिद्वार । बिना किसी काम धाम के घर बैठे खाने को मिले और सांसारिक झंझट या कहें भव बंधनों से मुक्ति मिल जाए तो इससे अधिक अच्छे दिन और क्या हो सकते हैं । हमारी बड़े बहुमत से चयनित सरकार ने चुनाव पूर्व जनता से जो वादे किए थे उन्हें एक-एक कर अब पूरा कर रही है । घर बैठे राशन मिल रहा है और बिना किसी कामकाज के खातों में पैसे भी आ रहे हैं अभी तक कुछ लोगों के खातों में आए हैं आगे चलकर दूसरों के खातों में भी आएंगे चिंता करने की कोई बात नहीं है देखते जाओ अभी आगे चलकर और अच्छे दिन आएंगे । जो सरकारी मशीनरी इस संकट की घड़ी में भी भेदभाव पूर्ण तरीके से राशन वितरण करवा रही है उसके भी अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं और जो भाजपा कार्यकर्ता मुंह देखकर जरूरतमंदों की अनदेखी कर अंधों की तरह अपने अपने को रेवड़ी बांट रहे हैं उनके लिए आने वाले दिन सबसे अच्छे होंगे ।
एक जमाना था जब काला धन विदेशों में जमा होता था अब खुला रामराज्य है बैंकों का सफेद धन लेकर स्वयं भारतीय भक्त विदेश जा रहे हैं क्योंकि अच्छे दिन तो ऊपर से ही शुरू होते हैं अब प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए । एक जमाना था जब हमारे पूर्वज बिना दारू पिए या वोट की कीमत लिए स्वच्छ मन से अपना मतदान करते थे आज की युवा पीढ़ी बेवकूफ नहीं है जो मुफ्त में वोट दे दे वह अपने वोट की कीमत वसूलना जानती है तो आगे का काम जनप्रतिनिधियों का होता है कि वे कितने महंगे बिक कर दलबदल करें । फिलहाल वोट की कीमत वसूलने वाले युवाओं के भी अच्छे दिन हैं और चुनाव जीतने के बाद होटलों रिसोर्ट इत्यादि में कैद रहकर करोड़ों में अपनी कीमत वसूलने वाले जनप्रतिनिधियों के तो इतने अच्छे दिन आ गए कि उनकी 4 - 5 पीढियो की बल्ले-बल्ले ।
अच्छे दिनों का सर्वाधिक आनंद ले रही है हमारी ब्यूरोक्रेसी जिसे बिना ड्यूटी पर जाए घर बैठे वेतन के आनंद की अनुभूति हो रही है ,भले ही टी ए ,डी ए पर रोक लग गई हो लेकिन पहले ही इतना कुछ कर रखा है कि अब वैसा करने का मौका न भी मिले तो भी जीवन पर्यंत अच्छे दिनों का आनंद लेते रहेंगे । अच्छे दिनों का भरपूर आनंद ले रहे हैं हमारे उद्योगपतियों ने किसान और सरकार से सस्ते दर पर जमीन खरीदी जो आज लाखों के स्थान पर करोड़ों की हो गई है । इनको श्रमिक भी सस्ते मिले और कच्चा माल भी लेकिन उत्पाद इतने महंगे की उनसे कम कीमत पर चीन बेच रहा है । लाक डाउन होते ही सभी श्रमिकों की छुट्टी कर दी ना अग्रिम वेतन दिया ना रहने खाने की व्यवस्था कि इससे अच्छे दिन और क्या हो सकते हैं ।इस मानवता को श्रमिक भी याद रखेंगे जो अच्छे दिनों की अनुभूति से वंचित रह गए ।
हमारे देश में यदि किसी वर्ग को सर्वाधिक अच्छे दिनों की अनुभूति हुई है तो वह हैं हमारे चयनित जनप्रतिनिधि उन्होंने अपने ही राज्य में अपनी सरकार तथा मताधिकार से चुनने वाली जनता तथा अपने राजनीतिक दल को लात मारकर अपनी इतनी कीमत वसूली जिसका उन्हे कभी अंदाजा भी नहीं होगा । इतना ही नहीं इन बिकने वाले चयनित जनप्रतिनिधियों को उनके दल बदल की इतनी बड़ी कीमत मिल गई होगी कि शायद अब भविष्य में उन्हें अपने जीवन काल में जनता के द्वार पर दोबारा जाने की आवश्यकता ही नहीं । इतने अच्छे दिनों का एहसास शायद इन नेताओं को कभी नहीं हुआ होगा मौज करो बहनों और भाइयों । अच्छे दिन दिखाई देने वाले नहीं बल्कि अनुभव किए जाने वाले होते हैं और अब तक समाज का हर वर्ग अच्छे दिनों में ही जी रहा है । जरा अनुभव करें लाक डाउन के समय सरकारी शराब के ठेके और उनके गोदान भरे हुए थे और अब खाली हो गए ना तो किसी ग्राहक को परेशानी हुई और न ही ठेकेदार का धन फंसा । पुलिस हो या आबकारी विभाग सभी ने अच्छे दिनों का अनुभव किया चिंता मत करो भाइयों बहनों आगे अभी और इससे भी अच्छे दिन आएंगे ।
दारू पीकर वोट देने वाली युवा पीढ़ी की जय ।
भारी भरकम वेतन लेने के बाद भी कमीशन खोरी एवं भ्रष्टाचार करने वाली सरकारी मशीनरी की जय।
सस्ती जमीन सस्ती श्रम शक्ति और सस्ता कच्चा माल खरीद कर चाइना से महंगा सामान बेचने वाले उद्योगपतियों सामान चाइना से महंगा सामान बेचने वाले उद्योगपतियों कर चाइना से महंगा सामान बेचने वाले उद्योगपतियों की जय । भारी भरकम मूल्य लेकर बिकने वाले जनप्रतिनिधियों की भी जय ।
हरिद्वार । बिना किसी काम धाम के घर बैठे खाने को मिले और सांसारिक झंझट या कहें भव बंधनों से मुक्ति मिल जाए तो इससे अधिक अच्छे दिन और क्या हो सकते हैं । हमारी बड़े बहुमत से चयनित सरकार ने चुनाव पूर्व जनता से जो वादे किए थे उन्हें एक-एक कर अब पूरा कर रही है । घर बैठे राशन मिल रहा है और बिना किसी कामकाज के खातों में पैसे भी आ रहे हैं अभी तक कुछ लोगों के खातों में आए हैं आगे चलकर दूसरों के खातों में भी आएंगे चिंता करने की कोई बात नहीं है देखते जाओ अभी आगे चलकर और अच्छे दिन आएंगे । जो सरकारी मशीनरी इस संकट की घड़ी में भी भेदभाव पूर्ण तरीके से राशन वितरण करवा रही है उसके भी अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं और जो भाजपा कार्यकर्ता मुंह देखकर जरूरतमंदों की अनदेखी कर अंधों की तरह अपने अपने को रेवड़ी बांट रहे हैं उनके लिए आने वाले दिन सबसे अच्छे होंगे ।
एक जमाना था जब काला धन विदेशों में जमा होता था अब खुला रामराज्य है बैंकों का सफेद धन लेकर स्वयं भारतीय भक्त विदेश जा रहे हैं क्योंकि अच्छे दिन तो ऊपर से ही शुरू होते हैं अब प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए । एक जमाना था जब हमारे पूर्वज बिना दारू पिए या वोट की कीमत लिए स्वच्छ मन से अपना मतदान करते थे आज की युवा पीढ़ी बेवकूफ नहीं है जो मुफ्त में वोट दे दे वह अपने वोट की कीमत वसूलना जानती है तो आगे का काम जनप्रतिनिधियों का होता है कि वे कितने महंगे बिक कर दलबदल करें । फिलहाल वोट की कीमत वसूलने वाले युवाओं के भी अच्छे दिन हैं और चुनाव जीतने के बाद होटलों रिसोर्ट इत्यादि में कैद रहकर करोड़ों में अपनी कीमत वसूलने वाले जनप्रतिनिधियों के तो इतने अच्छे दिन आ गए कि उनकी 4 - 5 पीढियो की बल्ले-बल्ले ।
अच्छे दिनों का सर्वाधिक आनंद ले रही है हमारी ब्यूरोक्रेसी जिसे बिना ड्यूटी पर जाए घर बैठे वेतन के आनंद की अनुभूति हो रही है ,भले ही टी ए ,डी ए पर रोक लग गई हो लेकिन पहले ही इतना कुछ कर रखा है कि अब वैसा करने का मौका न भी मिले तो भी जीवन पर्यंत अच्छे दिनों का आनंद लेते रहेंगे । अच्छे दिनों का भरपूर आनंद ले रहे हैं हमारे उद्योगपतियों ने किसान और सरकार से सस्ते दर पर जमीन खरीदी जो आज लाखों के स्थान पर करोड़ों की हो गई है । इनको श्रमिक भी सस्ते मिले और कच्चा माल भी लेकिन उत्पाद इतने महंगे की उनसे कम कीमत पर चीन बेच रहा है । लाक डाउन होते ही सभी श्रमिकों की छुट्टी कर दी ना अग्रिम वेतन दिया ना रहने खाने की व्यवस्था कि इससे अच्छे दिन और क्या हो सकते हैं ।इस मानवता को श्रमिक भी याद रखेंगे जो अच्छे दिनों की अनुभूति से वंचित रह गए ।
हमारे देश में यदि किसी वर्ग को सर्वाधिक अच्छे दिनों की अनुभूति हुई है तो वह हैं हमारे चयनित जनप्रतिनिधि उन्होंने अपने ही राज्य में अपनी सरकार तथा मताधिकार से चुनने वाली जनता तथा अपने राजनीतिक दल को लात मारकर अपनी इतनी कीमत वसूली जिसका उन्हे कभी अंदाजा भी नहीं होगा । इतना ही नहीं इन बिकने वाले चयनित जनप्रतिनिधियों को उनके दल बदल की इतनी बड़ी कीमत मिल गई होगी कि शायद अब भविष्य में उन्हें अपने जीवन काल में जनता के द्वार पर दोबारा जाने की आवश्यकता ही नहीं । इतने अच्छे दिनों का एहसास शायद इन नेताओं को कभी नहीं हुआ होगा मौज करो बहनों और भाइयों । अच्छे दिन दिखाई देने वाले नहीं बल्कि अनुभव किए जाने वाले होते हैं और अब तक समाज का हर वर्ग अच्छे दिनों में ही जी रहा है । जरा अनुभव करें लाक डाउन के समय सरकारी शराब के ठेके और उनके गोदान भरे हुए थे और अब खाली हो गए ना तो किसी ग्राहक को परेशानी हुई और न ही ठेकेदार का धन फंसा । पुलिस हो या आबकारी विभाग सभी ने अच्छे दिनों का अनुभव किया चिंता मत करो भाइयों बहनों आगे अभी और इससे भी अच्छे दिन आएंगे ।
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