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दिल्ली गुजरात के दंगों ने किया देश की संस्कृति को कलंकित


हरिद्वार। अन्तर्राष्ट्रीय उपभोक्ता कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष तथा समाजवादी विचारक रामनरेश यादव ने कहा है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है और किसी भी धर्म में मानवता के विरुद्ध कार्य करने की बात नहीं कही गई है। देश संविधान से चलता है तथा भारत की सत्ता संचालित करने के लिए गांधी एवं अम्बेडकर की विचारधारा पर काम होना चाहिए। सत्तारुढ़ दल ने सनातन धर्म और देश के संविधान को बदनाम किया है तथा 1984 के बाद 2020 में दोबारा हिन्दूत्व की गरिमा गिरी है, भविष्य में इन घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए अब देश को पुनः गांधी एवं अम्बेडकर की विचारधारा पर कार्य एवं व्यवहार करने की आवश्यकता है।

दिल्ली में हुए दंगों के लिए केन्द्र सरकार को जिम्मेदार बताते हुए उन्होंने कहा कि शाहीन बाग में लम्बे समय तक चले धरने के लिए केन्द्रीय गृहमंत्री तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को स्वयं धरना स्थल पर जाना चाहिए था तथा धरना देने वालों के दुःख दर्द को सुनना चाहिए थे। 2002 के गुजरात दंगे हों या 1984 एवं 2020 के दिल्ली दंगे तीनों घटनाओं ने विश्व पटल पर भारत की बहुसंख्यक आबादी को अतिवादी तथा कट्टरपंथ की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। हिन्दुत्व की ठेकेदार बनने वाली पार्टी ने सनातन धर्म और शांति के प्रतीक भगवा रंग को कलंकित कर दिया। भारत का इतिहास रहा है कि धर्म ने राजनीति को दिशा दी है लेकिन धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों ने राम-राम के स्थान पर जय श्रीराम का नारा देकर न केवल राम बल्कि सनातन धर्म स्थलों से भी जनता का मोह भंग कर धार्मिक आस्था पर कुठाराघात किया है। संतों को राजनीति में प्रवेश देकर और संतों तथा राजनेताओं द्वारा महिलाओं के लिए गए दुुर्व्यवहार ने देश की संस्कृति को विश्व पटल पर जो क्षति पहुंचायी उसकी क्षतिपूर्ति करने के स्थान पर भारत को विश्वगुरु बनाने के झूठे बयान देने से भारत की खिल्लियां उड़वायी जा रही हैं ऐसा किस संस्था या पार्टी के कारण हुआ देश की जनता स्वयं विचार करे।
दिल्ली में धरने के विपरीत जिन राजनेताओं ने भड़काऊ बयान दिए तथा भारत की संस्कृति के विरुद्ध नारे लगाये उन पर कार्यवाही होनी चाहिए तभी भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सकता है। जिस पुलिस की स्थापना आम जनता को सुरक्षा प्रदान करने के लिए की गई उसकी दिल्ली में निभायी गयी भूमिका ने देश को शर्मसार किया है। देश के राजनेता और नौकरशाही मिलकर देश को जिस दिशा में ले जा रहे हैं उससे गृहयुद्ध जैसे हालात बनाये जा रहे है और यदि ऐसा हो गया तो इन राजनेताओं एवं ब्यूरोक्रेट्स पर प्रतिदिन व्यय होने वाले करोड़ों रुपये कौन देगा? जिस जनता की आवाज राजनेता और अधिकारी नहीं सुनेंगे उनके प्रति देश कीजनता के मन में क्या विचार बनेंगे इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। लोकतंत्र में जनता के हित सर्वोपरि होते हैं लेकिन आजकल तो न्याय की बात करने वाले न्यायधीश को भी रातोरात स्थानान्तरित कर दिया जाता है। तानाशाही से तनाव एवं समरसता से शांति का वातावरण स्थापित होता है। विश्व पटल पर घटित हुई तानाशाही की घटनाओं से सबक लेकर राजनेता एवं ब्यूरोक्रेट्स को संविधान के दायरे में रहकर कार्य करना होगा अन्यथा देश के हालात कैसे हांेगे इसका अंदाजा अभी से लगाया जा सकता है। देश और समाज को बचाना है तो सभी को संविधान के दायरे में रहकर कार्य करना होगा यही सबसे बड़ी राष्ट्रभक्ति होगी।

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