दिल्ली देश का दिल है जहां गुजरात माडल पर हुए दंगों ने 2002 की पुनरावृत्ति कर सिद्ध कर दिया कि ये दंगे कोई अकस्मात घटी घटना थी या सुनिश्चित रुप से कराये गये। जिस देश को अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी ने आजाद कराया था वहां आज देखते ही गोली मारने की घोषणायें हो रही हैं। ये सब हो रहा है या कराया जा रहा है इसका उद्देश्य क्या है और देश की जनता का ध्यान दूसरी तरफ मोड़ने की योजना कौन बनाता है तथा कैसे लागू होती है यह ड्रामा बीते छः वर्षों से चल रहा है। देश की जनता को ठगने के लिए 2013-14 में जो घोषणायें की गयी थीं उसमें एक व्यापारी बाबा ही नहीं बल्कि अनेकों भगवाधारियों की भी हिस्सेदारी थी। एक भगवा रंग जिसे केसरिया भी कहते हैं और उसे सादगी तथा शांति का प्रतीक मानकर हमारे राष्ट्रध्वज में सबसे ऊपर स्थान दिया गया है आज उस रंग को ही दागदार बनाया जा रहा है यही कारण है कि दिल्ली में हुए दंगों की पचास से अधिक देशों ने आलोचना की है और संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है।
भाजपा अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है यह बात अब देश की जनता ही नहीं बल्कि पूरा विश्व जान गया है और एनआरसी, सीएए जैसे शुगूफे छोड़कर भाजपा अपनी उन घोषणाओं से देश की जनता का ध्यान हटाना चाहती है जो उसने सत्ता में आने से पूर्व देश के सामने की थीं। भाजपा ने विदेशों में जमा कालाधन भारत लाने को कहा था एक पैसा नहीं आया बल्कि दर्जनों बड़े-बड़े कर्जदार बैंक का अरबों रुपया लेकर विदेश भाग गए और 15-15 लाख रुपये खातों में आने को लेकर देश की जनता ठगी गई। बेरोजगारों को रोजगार देने की बात कही गयी उसके जवाब में लाखों लोगों के रोजगार छीने गए। किसानों की आय दोगुनी करने की बात की गई उसके बदले उनकी उपज का मूल्य भी नहीं मिल रहा और न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी बिचौलिए 25 प्रतिशत खा रहे हैं किसान को और बदहाल करने के लिए उसकी उपज को अनुदानित कर दो तथा तीन रुपये किलो गेंहू-चावल बिकवाया जा रहा है ताकि किसान अपनी उपज का भरपूर लाभ न उठा सके। सबका साथ-सबका विकास का नारा देने के बाद देश के दो-चार घरानों को छोड़कर सभी का विनाश किया जा रहा है दिल्ली इसकी ताजा-तरीन गवाह है।
भ्रष्टाचार समाप्त करने की बात हुई थी तो देश के हर चौराहे पर अवैध उगाही हो रही है। पूरे देश की सड़कें टूटी पड़ी हैं और जो चलने लाइक है उन पर टोल टैक्स की वसूली हो रही है। बिजली-पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को महंगा किया जा रहा जबकि शराब की कीमतें कम हो रही हैं। एक धर्म विशेष के नौजवानों को शराबी ओर दंगाई बनाया जा रहा है और जो मेहनत मजदूरी कर परिवार पाल रहे हैं उनके घर उजाड़े जा रहे हैं। चुनावों में शराब पिलाकर वोट लेने की परम्परा किसने डाली? प्रत्येक आम चुनाव में 15 प्रतिशत नया शराबी पैदा करने की परम्परा किसने डाली? देश में बद से बदतर हो रहे हालात के लिए जिम्मेदार कौन है?
देश की सत्ता पर काबिज भाजपा और उसके लिए नीतियां बनाने वाले संघ में यदि नैतिकता बची हो तो एनआरसी और सीएए जैसी घोषणायें करने वाले केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से दिल्ली में हुए दंगों के लिए नैतिकता के आधार पर इस्तीफा लें और भविष्य में ऐसी कोई घोषणा केन्द्र सरकार न करे जिससे शाहीन बाग जैसे धरने की आवश्यकता हो। न तो गोली मारो.... जैसे नारे लगाये जाये और न ही किसी किशोर से प्रदर्शनकारियों पर फायर करायी जाये, शांति का वातावरण बनाया जाये। गुजरात माडल संघ की पुरानी परिकल्पना है, गुजरात माडल पर कराये गए दिल्ली के दंगे और पुलवामा जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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