हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वंचित होकर वनवासी का जीवन जी रहे थे तथा दोनों की स्त्रियों का हरण कोई और कर ले गया था। श्रीरामलीला कमेटी ने इस दृश्य को जीवन जीने की कला के रुप में प्रस्तुत करते हुए दिखाया कि कोई भी व्यक्ति यदि दूसरे के प्रति सहयोग की भावना बना ले तो दोनों के जीवन की निराशा खुशहाली में बदल जाती है वहीं बाली वध के दृश्य को दुश्चारित्रता से दूर रहने की प्रेरणा के रुप में दर्शाते हुए समाज को यह बताया कि अनुज वधू पुत्री के समान होती है उस पर कुदृष्टि डालने वाला चाहे कितना ही बलशाली एवं साधन सम्पन्न हो उसका अंत दुःखद ही होता है और जो वरदान देता है उसे अपने वरदान को बदलने के विकल्प की भी जानकारी होती है इसी प्रक्रिया के तहत भगवान श्रीराम ने बाली पर छुपकर वार किया जिसे वह बेकार नहीं कर सका और श्रीराम के शरणागत होकर मोक्ष को प्राप्त हुआ। श्रीरामलीला कमेटी के प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि बुधवार को सेतुबन्ध रामेश्वर, अंगद रावण संवाद तथा लक्ष्मण शक्ति की लीला का मंचन किया जायेगा। श्रीरामलीला कमेटी के जो पदाधिकारी एवं सदस्य लीला के दृश्यों को भगवान श्रीराम के चरित्र एवं मर्यादित जीवन के माध्यम से सनातन धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्द्धन के रुप में प्रस्तुत कर रहे हैं उनमें प्रमुख हैं गंगाशरण मददगार, वीरेन्द्र चड्ढा, कृष्णमूर्ति भट्ट, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, सुनील भसीन, नरेन्द्र शर्मा, राहुल वशिष्ठ, श्रीकृष्ण खन्ना, देवेन्द्र चड्ढा, पवन शर्मा, कन्हैया खेवड़िया, महेश गौड़, रमन शर्मा, विकास सेठ, डॉ. संदीप कपूर तथा सुनील वधावन सहित सम्पूर्ण कार्यकारिणी सदस्यों का सहयोग प्राप्त हो रहा है। श्रीरामलीला कमेटी अपने सभी सहयोगियों तथा आगन्तुक गणमान्य व्यक्तियों को अपने रंगमंच से सम्मानित भी कर रही है।
हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वंचित होकर वनवासी का जीवन जी रहे थे तथा दोनों की स्त्रियों का हरण कोई और कर ले गया था। श्रीरामलीला कमेटी ने इस दृश्य को जीवन जीने की कला के रुप में प्रस्तुत करते हुए दिखाया कि कोई भी व्यक्ति यदि दूसरे के प्रति सहयोग की भावना बना ले तो दोनों के जीवन की निराशा खुशहाली में बदल जाती है वहीं बाली वध के दृश्य को दुश्चारित्रता से दूर रहने की प्रेरणा के रुप में दर्शाते हुए समाज को यह बताया कि अनुज वधू पुत्री के समान होती है उस पर कुदृष्टि डालने वाला चाहे कितना ही बलशाली एवं साधन सम्पन्न हो उसका अंत दुःखद ही होता है और जो वरदान देता है उसे अपने वरदान को बदलने के विकल्प की भी जानकारी होती है इसी प्रक्रिया के तहत भगवान श्रीराम ने बाली पर छुपकर वार किया जिसे वह बेकार नहीं कर सका और श्रीराम के शरणागत होकर मोक्ष को प्राप्त हुआ। श्रीरामलीला कमेटी के प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि बुधवार को सेतुबन्ध रामेश्वर, अंगद रावण संवाद तथा लक्ष्मण शक्ति की लीला का मंचन किया जायेगा। श्रीरामलीला कमेटी के जो पदाधिकारी एवं सदस्य लीला के दृश्यों को भगवान श्रीराम के चरित्र एवं मर्यादित जीवन के माध्यम से सनातन धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्द्धन के रुप में प्रस्तुत कर रहे हैं उनमें प्रमुख हैं गंगाशरण मददगार, वीरेन्द्र चड्ढा, कृष्णमूर्ति भट्ट, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, सुनील भसीन, नरेन्द्र शर्मा, राहुल वशिष्ठ, श्रीकृष्ण खन्ना, देवेन्द्र चड्ढा, पवन शर्मा, कन्हैया खेवड़िया, महेश गौड़, रमन शर्मा, विकास सेठ, डॉ. संदीप कपूर तथा सुनील वधावन सहित सम्पूर्ण कार्यकारिणी सदस्यों का सहयोग प्राप्त हो रहा है। श्रीरामलीला कमेटी अपने सभी सहयोगियों तथा आगन्तुक गणमान्य व्यक्तियों को अपने रंगमंच से सम्मानित भी कर रही है।
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