हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी ने 3 अक्टूबर से प्रारम्भ हुए रामलीला रुपी अनुष्ठान की अंतिम बेला में आज सेतुबन्ध रामेश्वरम् में ज्योतिर्लिंग की उस अद्भुत स्थापना का दृश्य प्रस्तुत किया जिसमें भगवान श्रीराम तथा रावण ने संयुक्त रुप से शिवोपासना कर धर्म एवं अध्यात्म के माध्यम से वैर भावना को भुलाने का संदेश दिया रामलीला का यह दृश्य चरित्र एवं मर्यादा की उस सीमा का पर्याय बन गया जब श्रीराम ने रावण को मुक्ति का वरदान दिया तो रावण ने राम को आसन्न युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद दिया। रावण विद्वान, बलशाली, अहंकारी के साथ कर्मवीर भी था जिसने अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए न किसी की राय मानी न ही अनुरोध। रावण दूरदृष्टा भी था इसीलिए उसने भाई विभीषण को लंका से निकाल दिया जो रामादल में सम्मिलित होकर लंका का राजा बना। रामलीला के बहुप्रतीक्षित अंगद-रावण संवाद की भी जमकर सराहना हुई। भगवान राम ने युद्ध के अंतिम क्षणों में भी शांतिदूत के रुप में अंगद को रावण के पास भेजा लेकिन रावण ने जानकी को देने के स्थान पर जान की बाजी देने का अपना निर्णय नहीं टाला और दोनों ओर से युद्ध की घोषणा हो गयी।
श्रीरामलीला कमेटी के रंगमंच पर सर्वाधिक मार्मिक दृश्य तब प्रस्तुत हुआ जब युद्ध भूमि में मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए तब विभीषण के बताने पर हनुमान जी लंका से ही सुषेन वैद्य को लाये, जिसके उपचार के लिए वैद्य ने उस संजीवनी बूटी को मंगाया जो द्रोण पर्वत पर पायी जाती है उस कार्य को भी हनुमानजी ने ही पूर्ण किया। कमेटी ने अपने रंगमंच से दिखाया कि जिसकी नीति और नियति साफ हो उसकी हर मंजिल आसान हो जाती है। श्रीरामलीला कमेटी के प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि शुक्रवार 19 अक्टूबर को रोडी बेलवाला मैदान पर भव्य दशहरा पर्व का आयोजन होगा तथा शनिवार 20 अक्टूबर को रामलीला भवन के रंगमंच पर भगवान श्रीराम का राजतिलक कर रामराज्य का सपना साकार किया जायेगा। अपने रंगमंच के माध्यम से धर्म के यर्थार्थ तथा संस्कृति के अतीत से गौरवान्वित करने वालों में प्रमुख हैं गंगाशरण मददगार, वीरेन्द्र चड्ढा, कृष्णमूर्ति भट्ट, रविकान्त अग्रवाल, महाराजकृष्ण सेठ, रविन्द्र अग्रवाल, सुनील भसीन, विनय सिंघल, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, डॉ. संदीप कपूर, नरेन्द्र शर्मा, कन्हैया खेवड़िया, देवेन्द्र चड्ढा, रमन शर्मा, सुनील वधावन, पवन शर्मा, राहुल वशिष्ठ, महेश गौड़, विकास सेठ, अनिल सुखीजा तथा श्रीकृष्ण खन्ना सहित सम्पूर्ण कार्यकारिणी का योगदान सराहनीय रहा।
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