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संघर्ष से सफलता प्राप्त करने के पर्याय थे जगद्गुरु स्वामी हंसदेवाचार्य : सतपाल ब्रह्मचारी


हरिद्वार, 12 फरवरी। धर्मार्थ सेवाओं के लिए समर्पित श्रीकृष्ण हरिधाम ट्रस्ट के परमाध्यक्ष श्री 108 महंत प्रेमानन्द शास्त्री जी महाराज के तत्वावधान में आज आश्रम के पुनरुद्धारक साकेतवासी श्रीमज्जगदगुरु रामानन्दाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि के उपलक्ष में उनकी प्रतिमा का अनावरण पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने किया तथा संत महापुरुषों ने उनके संघर्षशील जीवन पर प्रकाश डालते हुए भावपूर्ण स्मरण किया तथा उनके संत जीवन को आत्मसात करने का आवाह्न किया।
साकेतवासी जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज की प्रतिमा का अनावरण करते हुए अश्रुपूरित अवस्था में पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि संघर्ष से सफलता प्राप्त करना और संगठन की शक्ति से असंभव को संभव बनाना महापुरुष की विशेषता होती है और स्वामी हंसदेवाचार्य ने संत समाज में जो मानक स्थापित किये उनको आत्मसात करने के लिए हम सबको उनके जीवन चरित्र से प्रेरणा लेनी होगी। आदि जगद्गुरु शंकराचार्य एवं स्वामी विवेकानन्द से उनकी तुलना करते हुए सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि महापुरुष का जीवन लम्बा हो यह जरुरी नहीं लेकिन कम समय में कितने महत्वपूर्ण कार्य किए उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। साकेतवासी स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज को तीर्थ का पर्याय बताते हुए उन्हांेने कहा कि श्रीकृष्ण हरिधाम हो या जगन्नाथ धाम उन्होंने पूज्य गुरुओं के नाम पर ऐसे कई धर्मस्थलों का पुनरुद्धार कराकर प्राचीनता में नवीनता का सूत्रपात किया। देश के सभी तीर्थस्थलों पर पूज्य गुरुओं के स्मृति समारोह आयोजित करने वाले वे भारत के प्रथम महापुरुष थे जिन्होंने गुरु एवं तीर्थ परम्परा का संवर्द्धन कर संत समिति सहित अनेक संत संगठनों के माध्यम से संत समाज को संगठित कर श्रीराम मंदिर निर्माण जैसे आन्दोलनों को मुकाम तक पहुंचाया ऐसे महापुरुषों की स्मृति में सम्पूर्ण भारतवर्ष में स्वामी विवेकानन्द की तर्ज पर धर्म एवं समाजसेवा संस्थानों की स्थापना होनी चाहिए। उन्होंने सभी ट्रस्टियों, भक्तों एवं अनुयायियों का आवाह्न किया कि साकेतवासी जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज की पावन स्मृति में उनकी प्रत्येक पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष नए सेवा प्रकल्प का शुभारम्भ होना चाहिए।
श्रीचेतन ज्योति पीठाधीश्वर महंत ऋषिश्वरानन्द ने श्रीकृष्ण हरिधाम के महंत स्वामी प्रेमानन्द शास्त्री के कुशल संचालन की सराहना करते हुए सभी ट्रस्टियों को साधुवाद दिया। राजस्थान से पधारे प्रियाशरण ने स्वामी हंसदेवाचार्य की प्रतिमा को भगवान सदृश बताते हुए कहा कि उनके गुस्से से भी कृपा बरसती थी। कार्यक्रम के आयोजक तथा श्रीकृष्ण हरिधाम के परमाध्यक्ष श्री 108 स्वामी प्रेमानन्द शास्त्री ने जगद्गुरु की प्रतिमा को दण्डवत प्रणाम करते हुए कहा कि इस आश्रम के दिव्य भवन का निर्माण कार्य एक वर्ष में पूर्ण करने वाले अभूतपूर्व प्रतिभा के धनी थे जिनके शब्दकोष में असंभव नाम का कोई शब्द नहीं था और इस ट्रस्ट के सभी ट्रस्टी तथा भक्तों को आजीवन उनका आशीर्वाद प्राप्त होता रहेगा। 
ट्रस्ट के प्रधान यशपाल जुनेजा तथा ट्रस्टी कृष्णलाल नारंग ने सभी संत महापुरुषों एवं आगन्तुकों का आभार व्यक्त किया। साकेतवासी जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने वालों में प्रमुख थे बाबा बलरामदास हठयोगी, रविदेव शास्त्री, म. दुर्गादास, म.मं. स्वामी प्रेमानन्द जी महाराज, म. श्याम प्रकाश, म. ज्ञानानंद शास्त्री, म. सूरजदास, म. जगदीशानंद, योगी सत्यव्रतानन्द, म. रघुवीरदास, म. विष्णुदास, म. अरुणदास, म. लोकेश दास, म. शिवशंकर गिरि, स्वामी संतोषनंद देव तथा म. बिहारीशरण तथा पं. जगदीश पाण्डे सहित सैकड़ों संतों ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर भावपूर्ण स्मरण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी प्रेमानन्द शास्त्री ने तथा संचालन स्वामी ऋषिश्वरानन्द महाराज ने किया।

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