हरिद्वार। अन्तर्राष्ट्रीय उपभोक्ता कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामनरेश यादव ने कहा है कि संविधान ही देश, समाज एवं धर्म की आजादी बरकरार रखने का आधार है और जब तक संविधान सुरक्षित है तभी तक देश की सुरक्षा तथा सामाजिक एकता कायम रहेगी। संविधान से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का संचालन होता है, अतः संविधान की रक्षा करना देश की सरकार और जनता दोनों का सामूहिक दायित्व होता है। संविधान से ही विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका में समन्वय स्थापित होता है जबकि मीडिया लोकतांत्रिक स्तम्भों को कर्तव्यबोध का संदेश देता है। स्वार्थ की भावना जब परोपकार से ऊपर उठ जाती है तो नैतिक पतन का शुभारम्भ होता है जिससे लोकतंत्र के चारों स्तम्भ दायित्व को भुलाकर स्वार्थ की ओर पलायन कर जाते हैं जिसे रोकना आज राष्ट्र रक्षा के लिए आवश्यक हो गया है।
देश के बिगड़ते हालात पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तनशील होती है अतः सत्तारुढ़ दल और विशेषकर कार्यपालिका को संविधान सम्मत आचरण करने के लिए संकल्पबद्ध होना चाहिए। राजनैतिक दल अपनी सत्ता को बरकरार रखने अथवा खोयी सत्ता प्राप्त करने के लिए वोट बैंक को बढ़ाने के लिए कुछ भी निर्णय ले सकते हैं लेकिन वह निर्णय संविधान अथवा लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल है या नहीं इस पर विचार करना कार्यपालिका का दायित्व होता है। आजादी के बाद इन सात दशकों मंे देश ने कई राजनैतिक उतार-चढ़ाव एवं सत्ता परिवर्तन के दौर देखे हैं उन पर मंथन कर कार्यपालिका को उनके परिणामों पर विचार करना होगा कि देश की जनता अपने खून पसीने की कमाई से जिस सरकारी तंत्र का पोषण करती है इस तंत्र को जनता के हितों का ध्यान रखना चाहिए। जनता जब सरकारी मशीनरी की तानाशाही से तंग आती है तभी सरकार को बदलती है लेकिन तंत्र पर अंकुश लगाना अभी आम जनता के हाथ में नहीं है यही कारण है कि सरकारी तंत्र और आम जनता के रहन-सहन में भारी अन्तर आ गया है जिससे देश में आर्थिक विषमता बढ़ रही है।
देश की जनता पर जब विधायिका एवं कार्यपालिका का अंकुश तेज हो जाता है तब संविधान पर खतरे के बादल मंडराने लगते हैं और ऐसा आभास होने लगता है कि संविधान को बदल कर देश की आजादी के लिए खतरा पैदा किया जा रहा है। तानाशाही लोकतांत्रिक व्यवस्था की दुश्मन होती है और जब देश की जनता की कमाई से पलने वाली ब्यूरोक्रेसी किसी दल विशेष पर जनता के साथ मनमानी करने पर उतर आये तो समझ लेना चाहिए कि देश का भविष्य अंधकार की ओर जाने वाला है।
देश के वर्तमान हालात आज अच्छे नहीं है और ऐसा वातावरण बनाया जा रहा है जैसा ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने बनाकर देश में चल रही बादशाहत को समाप्त कर अंग्रेजों का शासन लागू करवा दिया था आज भी इण्टरनेट का प्रयोग बढ़कर उस ईस्ट इण्डिया कम्पनी रुपी संस्था के इशारे पर देश को चलाया जा रहा है। जिस देश को संविधान के तहत चलना चाहिए या उसमें आज संविधान को बदलकर व्यापार चलाने वालों के इशारे पर चलाने का षड़यंत्र चल रहा है और इस बदलाव को रोकने के लिए फिर से महात्मा गांधी, सुभाषचन्द्र बोस, भगत सिंह, सुखदेव तथा राजगुरु सहित उन तमाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान का स्मरण कर देश के संविधान, स्वतंत्रता एवं सामाजिक सौहार्द के लिए सामूहिक प्रयास करने हांेगे। संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों तथा संवैधानिक संस्थाओं को भी अपनी गरिमा बनाये रखने के लिए अब राष्ट्रहित में कार्य करने का समय आ गया है।
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