हरिद्वार। उत्तराखण्ड जल संस्थान में व्याप्त भ्रष्टाचार अब खुलकर सामने आ गया है और पूर्व पेयजल मंत्री स्व. प्रकाश पंत के आदेश से जो जांच अधीक्षण अभियंता सुबोध कुमार ने की थी वह पूर्णतयः झूठी निकली और शिकायतकर्ता की वे सभी शिकायतें सही निकलीं जो जांच से पूर्व राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री के समक्ष प्रस्तुत की गई थीं। यह भी सत्य सिद्ध हुआ कि विभागीय जांच में उच्चाधिकारी अपने अधीनस्थों को बचाने के लिए सरकार और विभाग सभी को गुमराह कर झूठी जांच आख्या भेजते हैं फिर भी झूठी जांच आख्या देने वाले अधिकारी के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होती है।
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रदेश संयोजक रामनरेश यादव ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को दिए पत्र में लिखा है कि उत्तराखण्ड जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता हरिद्वार सुबोध कुमार ने जो जांच आख्या 2 अगस्त 2019 को मुख्य महाप्रबन्धक को सौंपी थी वह मनगढ़त और वास्तविक तथ्यों को छुपाते हुए दोषी व्यक्तियों से बड़ी साज कर प्रेषित की गई थी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि सुबोध कुमार जांच सौंपने पर जांच बदलवाने के लिए मुख्य महाप्रबंधक को पत्र लिखा गया था लेकिन उन्होंने जांच नहीं बदली इससे उत्तराखण्ड जल संस्थान में नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार होने का प्रमाण मिल रहा है। शिकायत और जांच आख्या में अधीक्षण अभियंता ने जो जिस प्रकार से भाषा और तथ्यों को उलट कर अपने उच्चाधिकारी को गुमराह किया और मुख्य महाप्रबंधक ने उनकी जांच आख्या पर संतोष व्यक्त किया वह उत्तराखण्ड जल संस्थान में व्याप्त भ्रष्टाचार की नई पटकथा लिख रहा है। रामनरेश यादव में दोबारा जांच कर अधिकारी तथा दोषी विभागीय कर्मचारी एवं राइजिंग मेन से कनेक्शन लेकर पेयजल योजना को पंगु बनाने वालों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है।
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