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देश और संविधान को बचाना है तो इच्छाशक्ति दृढ़ करें राजनेता

  • असली हिन्दुत्व के सामने नकली हिन्दुत्व धराशायी। भाजपा के चाणक्य की चहुंओर निंदा। संविधान और संवैधानिक पदों का दुरुपयोग करने वालों को सरकारी धन पर ऐश करने का अधिकार नहीं। भय का वातावरण बनाने वाले सरकारी अधिकारियों को दी जाये जबरन सेवा निवृत्ति। कोलेजियम का मोह त्याग कर न्यायपालिका निष्पक्ष होकर करे निर्णय। क्या 26/11 की घटना को भुलाने के लिए प्रारम्भ किया गया संविधान दिवस मनाना?

हरिद्वार। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रदेश संयोजक रामनरेश यादव ने कहा है कि देश और संविधान को बचाने के लिए सभी राजनैतिक दलों को आजादी के शहीदों का स्मरण करते हुए इच्छाशक्ति दृढ़ करनी होगी और यदि देश को आजाद कराने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारों के हाथ से देश वापस नहीं लिया तो भारत की जनता को बहुत ही मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर का भावपूर्ण स्मरण करते हुए राजनेता सोचें कि रामायण और महाभारत काल में संविधान न होने के कारण ही गुण्डागर्दी का राज चला और बड़े-बड़े युद्ध हुए क्योंकि उस समय कोई संविधान नहीं था अब उसी मानसिकता के लोग संविधान को समाप्त कर रामराज्य लाने की बात कर रहे हैं जबकि अयोध्या में रामजन्म भूमि को बचाने के लिए भी संविधान का ही निर्णय सर्वोपरि रहा। अयोध्या के निर्णय ने यह सिद्ध कर दिया कि किसी दल का राजनेता नहीं बल्कि राजा राम को भी अपना जन्मस्थान प्राप्त करने के लिए संविधान की ही शरण में जाना पड़ा।
देश में हो रही संविधान की दुर्दशा पर दृष्टिपात करते हुए प्रसपा नेता ने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जब से भाजपा की सरकार बनी तभी से देश में संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग प्रारम्भ हो गया था और भय का वातावरण बनाकर मनमाने ढंग से सरकार का संचालन प्रारम्भ हो गया था। देश की अर्थव्यवस्था हो या बेरोजगारी, महंगाई हो या भ्रष्टाचार किसी पर भी कोई लगाम नहीं लगी बल्कि एक दल विशेष के राजनेताओं ने मनमाना रामराज्य प्रारम्भ कर दिया और संविधान को समाप्त करने के लिए तरह-तरह के प्रयोग प्रारम्भ हो गए थे। 
देश में सत्तासीन दल के नेता पहले भी पद का दुरुपयोग करते थे लेकिन वह केवल अपवाद होता था नोटबंदी के बाद देश का जो वातावरण बिगड़ा तो और भी बिगड़ता ही चला गया। जिस दल और नेता को नीचा दिखाना चाहा उसे दिखा दिया। जिसे पप्पू बनाकर बौना करना था उसे पप्पू बना दिया। किसी को बुआ तो किसी को बबुआ, साहबजादे और दामाद तक को नहीं छोड़ा, न व्यपारी छोड़े न उद्योगपति, न किसान छोड़े न संत। चाहे पुलवामा करना पड़ा हो या मुजफ्फरनगर अथवा सहारनपुर, लव जेहाद चलाया हो या हिन्दुस्तान-पाकिस्तान, हिन्दु-मुसलमान, कश्मीर और राम मंदिर के अलावा कोई विकास कार्य नहीं। 
पूरे देश से धन गायब कर ईवीएम सेंटिंग, प्रचार-विज्ञापन और विधायकों की खरीद-फरोख्त में उड़ा दिया। आज अर्थव्यवस्था चौपट है। बैंकों के कर्जदार बड़ी-बड़ी धनराशि लेकर विदेश भाग गए तो अपना दल छोड़ कर भाजपा में आने वालों के सभी भ्रष्टाचार समाप्त हो गए। अपराधी सज्जन बन गए, बम विस्फोटो की अपराधी न केवल सांसद बनी बल्कि रक्षा समिति की सदस्य भी बन गयी। देश की जनता को इतना बड़ा बेवकूफ आज तक किसी ने नहीं बनाया, हद तो तब हो गयी जब कोलेजियम को समाप्त न करने की अघोषित शर्त पर न्यायपालिका भी सरकार की मंशा के अनुरुप निर्णय सुनाने लगी इससे बड़ा संविधान का अपमान और उसे समाप्त करने का और कौन सा उदाहरण हो सकता है। देश के नेता जब तक जेल जाने से डरते रहेंगे तब तक जो सरकार है वही चलती रहेगी, न रहेगा संविधान और न बचेगी जनता की स्वतंत्रता, फिलहाल की स्थिति भी चिंताजनक है लेकिन भारत की जनता बड़ी सहनशील है इसे पराकाष्ठा तक ले जायेगी।

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