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बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण न करना सरकार की सबसे बड़ी विफलता

हरिद्वार। अन्तर्राष्ट्रीय उपभोक्ता कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामनरेश यादव ने कहा है कि बढ़ता वायु प्रदूषण मानवता के लिए महामारी बनकर मंडरा रहा है लेकिन सरकार केन्द्र की हो या राज्य की प्रदूषण पर नियंत्रण करने के नाम पर बेखबर होकर भ्रष्ट एवं नाकारा ब्यूरोक्रेसी के शिकन्जे में फंसकर रह गयी है। सरकारी कर्मचारी ही स्वयं को सरकार समझ कर अपने वेतन भत्ते तथा राजनेताओं के मानदेय वेतन एवं भत्ते बढ़ाने के अलावा जनहित या लोकहित के किसी भी मुद्दे पर काम करने को तैयार नहीं है तथा न्यायपालिका एवं संवैधानिक संस्थाओं ने भी स्वयं संज्ञान लेना अब बंद कर दिया है। भारत की आम जनता अब करों की भरमार से मर रही है और सरकार तथा सरकारी कर्मचारी राजस्व बढ़ाकर अपनी सुख सुविधायें बढ़ाने का काम कर रहे हैं। देश की सरकार हो या सरकारी तंत्र सभी ने अप्रत्यक्ष रुप से संविधान के विपरीत कार्य करना प्रारम्भ कर दिया है जो निकट भविष्य में देश के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है और समय रहते इस पर नियंत्रण करने की आवश्यकता है।
प्रेस को जारी एक बयान में उन्हांेने कहा कि देश में प्रदूषण फैलाने का काम उद्योग, वाहन तथा घरों एवं कारों में लगे वातानुकूलन यंत्र कर रहे हैं जिससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है लेकिन अधिकारी हों या अदालतें सभी का ध्यान केवल खेतों में पराली जलाने तक सीमित होकर रह गया है। सरकारंे न तो धान गेंहू की उपज का मूल्य ही बढ़ा रहे हैं और न ही कीटनाशक अथवा उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच करवा रहे हैं जो सरकार और सरकारी तंत्र की सबसे बड़ी नाकामी है। भारत कृषि प्रधान देश है लेकिन हमारी सरकारें एवं सरकारी तंत्र ने इसे तंत्र प्रधान, उद्योग प्रधान एवं कर वृद्धि प्रधान बनाकर रख दिया है। आलम यह है कि आम जनता अब अपने ही देश की सड़कों पर बिना कर दिए चल नहीं सकती प्रत्येक 50 किमी पर टोल प्लाजा बनाये जा रहे हैं। पीने के पानी की कीमत चुकानी पड़ती है और बढ़े दरों पर बिजली लेने को जनता मजबूर है जबकि जल संस्थान एवं जल निगम के कर्मचारी अधिकारी मुफ्त का पानी पीते हैं और बिजली विभाग के अधिकारी, कर्मचारी मुफ्त की बिजली जलाते हैं और बिजली चोरी के मुकदमे जनता पर दर्ज होते हैं।  

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