Skip to main content

कुम्भ 2021 हरिद्वारः मूलभूत सुविधाओं के लिए काम न होना मेला प्रशासन की असफलता

हरिद्वार। धर्म क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण नगरी हरिद्वार है जो भारी अव्यवस्थाओं के बीच भी धर्मानुयायियों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। हरिद्वार भारत ही नहीं पूरे विश्व की आस्था का ऐसा स्थान है जहां आकर व्यक्ति की तीर्थाटन एवं पर्यटन दोनों आवश्यकताओं की पूर्ति हो जाती है इसीलिए कुम्भ एवं अर्द्धकुम्भ मेलों के आयोजन हेतु केन्द्र एवं राज्य सरकार की तरफ से भारी भरकम धनराशि उपलब्ध करायी जाती है। उत्तराखण्ड नया राज्य बनने के बाद यहां की ब्यूरोक्रेसी ने सोची समझी साजिश के तहत ऐसा मकड़जाल बुना कि हरिद्वार को मांस, मदिरा, खनन और अनेकों प्रकार से इस पावन नगरी को भ्रष्टाचार का केन्द्र बना दिया, यहां सरकारी धन बाद में आता है उसे ठिकाने लगाने की योजनायें पहले ही तैयार हो जाती हैं इस कार्य में यहां के जन प्रतिनिधियों की भूमिका भी संदिग्ध रही है।
हरिद्वार में कुम्भ तथा अर्द्धकुम्भ के मेले उत्तराखण्ड राज्य निर्माण से पूर्व भी आयोजित होते थे उनके आयोजन मंे भी भ्रष्टाचार होता था लेकिन वह एक निश्चित दर से कमीशन के तौर पर। वह इसीलिए कि सरकारी सेवा में आने के बाद चपरसी से लेकर चीफ सेक्रेटरी तक ऐसा कोई कर्मचारी नहीं है जिसने अपने वेतन के अतिरिक्त किसी प्रकार की अन्य सुविधा प्राप्त न की हो इसीलिए माना जाता है कि 90 प्रतिशत सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी सुविधा शुल्क भोगी होते हैं। अब तक विभिन्न मामलों में हुई जांच से यह स्पष्ट भी हो गया है लेकिन इन सरकारी कर्मचारियों ने अपने बचाव के लिए विभागीय जांच का प्राविधान कर रखा है, चूंकि भ्रष्टाचार ऊपर से नीचे तक और नीचे से ऊपर तक दो मुंहे सांप की तरह चलता है इसीलिए विभागीय जांच में भ्रष्ट कर्मचारी को सजा नहीं मिलती और भ्रष्टाचार दिन दूना रात चौगुना बढ़ता जा रहा है। अब बात करते हैं हरिद्वार में आयोजित होने वाले धार्मिक पर्वों की तो राज्य की पहली निर्वाचित सरकार ने मात्र सौ करोड़ की लागत से अर्द्धकुम्भ मेले का आयोजन वर्ष 2004 में कराया जिसमें मेला नियंत्रण कक्ष एवं मेला अस्पताल जैसे दो महत्वपूर्ण स्थायी निर्माण कराये गए यातायात हेतु गंगनहर पर दो पुलों का निर्माण हुआ तथा हरकी पैड़ी का विस्तार हुआ। यह सभी विकास कार्य हरिद्वार में बढ़ने वाली यात्रियों की संख्या को आसानी से नियंत्रित करने में आज भी सहायक हैं। 
जब तक केन्द्र एवं राज्यों में गैर भाजपा सरकारें रहीं तब तक सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी का चलन था लेकिन जब से संघ के नियंत्रण में चलने वाली सरकारों का आगाज हुआ, सरकारी योजनाओं से कमीशन की दर बढ़ कर खुली लूट में तब्दील हो गयी और धर्म, धार्मिक पर्व और धार्मिक स्थलों के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनायें बनाकर उनमें सरकारी धन जो देश की आम जनता की खून पसीना एवं मेहनत की कमाई का पैसा होता है उसकी लूट खसोट प्रारम्भ हो गयी यही कारण है कि आज गाय, गंगा और राम सभी बदनाम हो गए। कुम्भ मेला 2010 हरिद्वार और अर्द्धकुम्भ मेला 2018-2019 प्रयाग जिसे पहले कुम्भ और बाद में महाकुम्भ के नाम से प्रचारित किया गया उसका क्या कारण था देश के नागरिक भलीभांति समझते हैं। जहां तक कुम्भ 2010 हरिद्वार की बात है तो किसी धार्मिक आयोजन में इतना बड़ा भ्रष्टाचार शायद पहली बार हुआ होगा जिसमें मुख्यमंत्री, सांसद, नगर विकास मंत्री और कुम्भ मेलाधिकारी ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के साथ मिलकर बहती गंगा में ‘‘पवित्र स्नान’’ किया था।
जहां तक वर्तमान कुम्भ मेला 2021 हरिद्वार के आयोजन की बात है तो मेले की व्यवस्था के लिए नियुक्त कुम्भ मेला अधिकारी महोदय ने सरकार को कोई ऐस प्लान दिया ही नहीं कि इस आयोजन में ऐसे स्थायी निर्माण कार्य हो जायें जो यहां आयोजित होने वाले अन्य मेलों की व्यवस्था में भी काम आयें। कुम्भ मेला आयोजन में लगे राज्य के नगर विकास मंत्री और मेला अधिकारी की क्या मंशा रही होगी यह तो भगवान ही बेहतर जान पायेगा लेकिन अब कुम्भ पर्व के आयोजन में इतना समय भी नहीं बचा है कि स्थायी निर्माण कार्य सम्पन्न हो सकें फिलहाल कुछ घाटों का निर्माण कराया जा रहा है उन्हीं में संतोष करना पड़ेगा। उत्तराखण्ड राज्य एवं कुम्भ क्षेत्र हरिद्वार के व्यवस्थित विकास के लिए केन्द्र सरकार के पास अब एक ही विकल्प बचा है कि वह सम्पूर्ण हरिद्वार जनपद एवं लक्ष्मण झूला तक लगने वाले कुम्भ क्षेत्र को केन्द्र शासित राज्य का दर्जा प्रदान करे तभी बचेगी गंगा और गंगा तट पर आयोजित होने वाले धार्मिक पर्व।  

Comments

Popular posts from this blog

गठबंधन और भाजपा के मुकाबले को त्रिकोणीय बनायेगी जविपा सेक्यूलर

राष्ट्रीय अध्यक्ष एन.पी. श्रीवास्तव ने किया गोरखपुर से नामांकन लखनऊ। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा है कि किसान और जवान का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के सम्मान के लिए कार्य करना होगा। उक्त उद्गार उन्होंनेे गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर ते हुए व्यक्त किए। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के गठन एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के अधिकांश राजनैतिक दल शहरीकरण की आंधी में गुम हो गए हैं और गांव एवं देहात की सत्तर प्रतिशत आबादी को विस्मृत कर दिया है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिए गए ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को सार्थक करने की हामी भरते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए गांवों का विकास आवश्यक है और जन विकास पार्टी सेक्यूलर सत्ता में आने पर सबसे पहले कृषकों को उनकी उपज का मूल्य मेहनत मजदूरी के साथ देकर किसानों को मजबूत करेगी तथा कृषि मजदूरों को...

उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के सपनों को साकार करेगी प्रसपा: फुरकान अली एडवोकेट

हरिद्वार ।   प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रत्याशी फुरकान अली एडवोकेट के मुख्य चुनाव कार्यालय का उद्घाटन आज ज्वालापुर रेलवे फाटक के निकट शारदानगर स्थित कैम्प कार्यालय पर हाजी सरफुद्दीन तथा चौ. संसार सिंह एवं चुनाव प्रभारी बलजीत कौर ने संयुक्त रुप से रिबन काटकर करते हुए उत्तराखण्ड में राज्य निर्माण का सपना साकार करने वाले क्षेत्रीय दल का आगाज किया। उद्घाटन सभा को सम्बोधित करते हुए हाजी सरफुद्दीन ने कहा कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी समाजवाद के माध्यम से उत्तराखण्ड को प्रगति के मार्ग पर प्रशस्त करेगी। लोकसभा चुनाव को उत्तराखण्ड की संसद में आवाज उठाने का शुभारम्भ बताते हुए कहा कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी डॉ. राम मनोहर लोहिया की विचारधारा को मूर्त रुप देकर राज्य के गरीब, मजदूर एवं किसानों के हितों की रक्षा के लिए कार्य करेगी। उत्तराखण्ड राज्य में कृषि एवं कृषक की अनदेखी को राज्य के पिछड़ने का मुख्य कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि अब तक सत्तासीन रहे राजनैतिक दलों ने नए राज्य के उद्देश्यों को दरकिनार कर अपनी जेबें भरने के अलावा कुछ नहीं किया। परिणाम स्वरुप पहाड़ों से हुए पलायन...

परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना से हो जाते हैं असंभव कार्य भी संभव

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वं...