Skip to main content

सनातन धर्म के पर्व ही नहीं संस्कृति और संविधान को बदलने की चल रही है साजिश

किसी धर्म का अनुयायी होना या किसी पर्व को मनाने की औपचारिकता पूर्ण करना अलग बात है लेकिन उसे व्यवहारिक जीवन में उतारना अलग बात होती है और इस प्रकार की भावना केवल राष्ट्र भक्तों में ही होती है अंध भक्तों या किसी व्यक्ति विशेष की भक्ति में नहीं। विजय दशमी का पर्व प्रतिवर्ष आता है और चला जाता है प्रतिवर्ष रटा-रटाया एक ही स्लोगन पूरे भारत वर्ष में गूंजता है कि असत्य पर सत्य की विजय का पर्व दशहरा सम्पन्न, सो इस वर्ष भी सम्पन्न हो गया। आज उस स्लोगन का उल्टा हो रहा है चाहे सरकार हो या समाज अथवा हमारी कार्यपालिका सर्वत्र सत्यमेव जयते के स्थान पर असत्यमेव जयते को चरितार्थ किया जा रहा है। क्या हमें मालूम है कि हमारे पर्वों का क्या महत्व है और इन्हें प्रतिवर्ष क्यों मनाया जाता है। वास्तविकता तो यही है कि इस पर्व से हमें अहंकार, अत्याचार और अधर्म को त्याग कर सदाचार, सत्कर्म एवं धर्म के सापेक्ष आचरण करने की प्रतिज्ञा करनी चाहिए लेकिन अब इन पर्वों को मनाने की मात्र औपचारिकता पूर्ण की जा रही है।
धर्म की ठेकेदार कहलाने वाली एक पार्टी ने बिल्कुल ही अपनी कथनी का उल्टा करना प्रारम्भ कर दिया, न केवल अब प्रारम्भ कर दिया बल्कि जब से सत्तासीन हुई तभी से जो कहा था उसके विपरीत किया चाहे कालाधन हो, भ्रष्टाचार का खत्मा और रोजगार देने की बात। जब ये सारी बातें आ गयी तो ‘विकास’ बाबू की बात करनी ही बेकार है बल्कि इस देश को जितना इस छः वर्षों में लुटाया गया उतना इससे पूर्व किसी भी सरकार ने नहीं किया भले ही वह सरकार इसी पार्टी की क्यों न रही हो। आश्चर्य तो इस बात को लेकर हो रहा है कि जिन लोगों ने अपनी कुर्बानियां देकर देश को आजाद करवाया उन्हें और उनके समर्थकों को आज देशद्रोही करार दिया जा रहा है क्योंकि उस समय जो अंग्रेजों के मुखबिर और आजादी के विरोधी थे वे आज सत्ता में आ गए हैं तो निश्चित ही देश की आजादी, सम्पन्नता, अर्थव्यवस्था और संविधान के विरुद्ध कार्य करेंगे यह उनकी प्रवृत्ति है जिस पर एक अपंजीकृत/असंवैधानिक संस्था का दिमाग काम कर रहा है। वास्तविकता यह नहीं कि हमारे पर्वों को मानने की औपचारिकता  पूर्ण की जा रही बल्कि इनका स्वरुप बदल कर भारत की संस्कृति को ही समाप्त करने की साजिश चल रही है। न केवल दशहरा बल्कि भारत का प्रत्येक पर्व विसंगति प्रधान होता जा रहा है क्योंकि पर्व का स्वरुप बदलने के लिए उसे विसंगतियों से घेरना आवश्यक होता है इसीलिए आज राम के चरित्र को त्याग कर रावण संस्कृति का आगाज हो रहा है। अहंकार, अत्याचार, भ्रष्टाचार और स्वेच्छाचारिता पूरे समाज तथा कार्यपालिका एवं विधायिका में एकाधिकार कर रही है। हमारे देश के नेता ने अपने शासन काल में कई मनमाने निर्णय थोपे हैं और देश के धन को इस कदर पानी की तरह बहाया जैसे कि वह इन्हीं की कमाई का हो आखिर जिस देश की जनता ने अपने करों की भरमार से दबकर इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था तैयार की उसकी भी तो भागीदारी होनी चाहिए। आज जनता के स्थान पर जनता का खून चूसने वालों को प्रश्रय दिया जा रहा है वे लोग ही भारत का धन लेकर विदेशों में जा रहे हैं और उन्हींे के कर्जे माफ हो रहे हैं। देश के समक्ष आज बड़ा संकट है लेकिन सत्तारुढ़ दल अपनी सत्ता के नशे में इतना चूर है कि उसे न तो आम जनता की आवाज सुनाई दे रही न ही विपक्ष की। कश्मीर में लगाए गए आपातकाल को यदि क्षेत्र विशेष पर सीमित कर दें तो भी पूरा देश आर्थिक आपातकाल के दौर से गुजर रहा है।

Comments

Popular posts from this blog

परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना से हो जाते हैं असंभव कार्य भी संभव

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वं...

राम और रावण ने संयुक्त रुप से की रामेश्वरम् में ज्योतिर्लिंग की स्थापना

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी ने 3 अक्टूबर से प्रारम्भ हुए रामलीला रुपी अनुष्ठान की अंतिम बेला में आज सेतुबन्ध रामेश्वरम् में ज्योतिर्लिंग की उस अद्भुत स्थापना का दृश्य प्रस्तुत किया जिसमें भगवान श्रीराम तथा रावण ने संयुक्त रुप से शिवोपासना कर धर्म एवं अध्यात्म के माध्यम से वैर भावना को भुलाने का संदेश दिया रामलीला का यह दृश्य चरित्र एवं मर्यादा की उस सीमा का पर्याय बन गया जब श्रीराम ने रावण को मुक्ति का वरदान दिया तो रावण ने राम को आसन्न युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद दिया। रावण विद्वान, बलशाली, अहंकारी के साथ कर्मवीर भी था जिसने अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए न किसी की राय मानी न ही अनुरोध। रावण दूरदृष्टा भी था इसीलिए उसने भाई विभीषण को लंका से निकाल दिया जो रामादल में सम्मिलित होकर लंका का राजा बना। रामलीला के बहुप्रतीक्षित अंगद-रावण संवाद की भी जमकर सराहना हुई। भगवान राम ने युद्ध के अंतिम क्षणों में भी शांतिदूत के रुप में अंगद को रावण के पास भेजा लेकिन रावण ने जानकी को देने के स्थान पर जान की बाजी देने का अपना निर्णय नहीं टाला और दोनों ओर से युद्ध की घोषणा हो गयी। श्रीरा...

गठबंधन और भाजपा के मुकाबले को त्रिकोणीय बनायेगी जविपा सेक्यूलर

राष्ट्रीय अध्यक्ष एन.पी. श्रीवास्तव ने किया गोरखपुर से नामांकन लखनऊ। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा है कि किसान और जवान का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के सम्मान के लिए कार्य करना होगा। उक्त उद्गार उन्होंनेे गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर ते हुए व्यक्त किए। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के गठन एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के अधिकांश राजनैतिक दल शहरीकरण की आंधी में गुम हो गए हैं और गांव एवं देहात की सत्तर प्रतिशत आबादी को विस्मृत कर दिया है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिए गए ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को सार्थक करने की हामी भरते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए गांवों का विकास आवश्यक है और जन विकास पार्टी सेक्यूलर सत्ता में आने पर सबसे पहले कृषकों को उनकी उपज का मूल्य मेहनत मजदूरी के साथ देकर किसानों को मजबूत करेगी तथा कृषि मजदूरों को...