भारत माता को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने वाले महानायक तथा राष्ट्रपिता की उपाधि से अलंकृत मोहनदास करमचन्द गांधी जिनको हरिद्वार के गुरुकुल में ही महात्मा गांधी के नाम से सम्बोधित किया गया था वे कोई साधारण मनुष्य नहीं बल्कि एक बड़ी विचारधारा थे जिन्होंने भारत के भविष्य को संवारने के लिए क्या-क्या योजनायें बनायीं और ऐसे संविधान का निर्माण कराया उसे पूरा विश्व सम्मान दे रहा है, लेकिन अंग्रेजों के सिपहसालार रहे कुछ राष्ट्र विरोधी तत्व जो उस समय भी अंग्रेजों की मुखबरी किया करते थे अब महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोड़से के गीत गाकर भारतवासियों की मनोवृत्ति बदलने का कुचक्र रच रहे हैं। क्या हमारे देश की जनता में बुद्धि और विवेक का इतना अभाव हो गया है कि जिन महान बलिदानी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने इस देश को आजाद कराया उनको भुलाकर बापू के हत्यारों का समर्थन कर अंधभक्ति का परिचय देंगे?
2 अक्टूबर 2019 को हमारा राष्ट्र महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती मना रहा है लेकिन पूरे देश में किसी प्रकार के जश्न ;उत्सवद्ध का वातावरण नहीं है। एक वो दीवाने थे जिन्हांेने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देश की आजादी के लिए यातानायें सहीं और आज वे लोग देश की जनता को गांधी के प्रति बरगला रहे हैं जो देश को दोबारा गुलाम बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं जिन लोगों ने सत्ता पर काबिज होते ही दो साल में ही देश को लूटने का सिलसिला शुरु कर दिया और आज अर्थव्यवस्था हो या कानून व्यवस्था व्यभिचार हो या भ्रष्टाचार सभी मामलों में देश पूरे विश्व के सामने बड़ी बदनामी झेल रहा है। देश की जनता द्वारा जुटाए गए संसाधनों को ही देश और देश की जनता को बर्बाद करने में प्रयोग किया जा रहा है क्योंकि हमारी वर्तमान युवा पीढ़ी आज दारु पीकर वोट देने में विश्वास करने लगी है।
महात्मा गांधी एवं लालबहादुर शास्त्री की जयंती कभी एक साथ मनायी जाती थी और भावी पीढ़ी को उनके आदर्शों की जानकारी देने के लिए बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। आजकल सरकारी विभाग हांे या शिक्षण संस्थान सभी जगह 2 अक्टूबर को राजपत्रित अवकाश के रुप में मनाया जाता है। महात्मा गांधी के साथ जुड़े भारत माता के लाल पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम को भी अब हटा दिया गया है ऐसा इस जयंती पर पहली बार नहीं हो रहा है बल्कि इससे पूर्व भी शास्त्री जी को उपेक्षित रखा गया और जब कहीं से कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी तो इस बार उसी प्रकार महात्मा गांधी के नाम से लाल बहादुर शास्त्री के नाम को अलग कर दिया गया जिस प्रकार एक दल विशेष ने अपने पुराने राजनेताओं को दरकिनार कर अन्य वर्गों से राजनेता तलाशने शुरु कर दिए हैं, यह देश के साथ कैसा व्यवहार हो रहा और कैसा वातावरण तैयार किया जा रहा? कैसे संसद का निर्माण हो रहा है और किस प्रवृत्ति के लोगों को एक दल विशेष राजनीति में प्रवेश दे रहा है यह देश का दुर्भाग्य बनाने की कवायत चल रही है। ऐसा पहली बार हो रहा कि प्रचार माध्यमों से वास्तविकता के विपरीत प्रचार करवाया जा रहा है क्या हमारे देश की जनता इतनी संवेदनहीन हो गयी है कि वह देश की आजादी को सौ साल तक भी बरकरार नहीं रख सकती जिसको प्राप्त करने के लिए हमारे पूर्वजों ने सौ साल तक संघर्ष किया और दादा के संघर्ष का प्रतिफल उसकी तीसरी पीढ़ी को मिला। राजा भगीरथ और हमारे ऋषि मुनियों की तपस्याओं को आज क्यों भुलाया जा रहा है आज त्याग और तपस्या के नाम पर स्वार्थ की पौध तैयार की जा रही है जो देश के भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
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