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स्वार्थ रुपी श्रद्धा ने दिखाया आस्था का असली चेहरा, हरकी पैड़ी पर बांध बनाकर तालाब में कराया जा रहा स्नान

उत्तराखण्ड राज्य अपनी किशोरावस्था को पार कर अब वयस्क की श्रेणी में आ गया है लेकिन 19 वर्ष की पूर्णता के बाद भी यहां की कार्यपालिका एवं विधायिका मंे सकारात्मक विचारधारा का अभाव है। क्षेत्रवाद की समस्या समाप्त होने का नाम नहीं ले रही तो विकास का विरोध करने के लिए कुतर्कों के अंबार लगाये जा रहे हैं। विकास की परिभाषा क्या होती है और विकास कैसे होता है शायद इस बात का ज्ञान न तो राजनेताओं को है न ही यहां की ब्यूरोक्रेसी को। जनता की मेहनत की कमाई का धन जो करों के रुप में जनता सरकार चलाने के लिए देती है सरकार और सरकारी कर्मचारी उसका जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं।
हरिद्वार जनपद और शहर इस राज्य का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान है यहां अवैध शराब और अवैध खनन के माध्यम से कैसा नंगा नाच हो रहा किसी से छुपा नहीं है। राज्य बनने के बाद एक ऐसे नेता ने विधानसभा में यहां के प्रतिनिधित्व की बुनियाद रखी कि पूरा शहर शराबमय हो गया। जनता के धन का विधायक निधि के नाम पर यह नेता इतना दुरुपयोग कर रहा है कि शहर की अच्छी भली सड़कों को खोद-खोद कर उनको दोबारा बनवाकर धन का दुरुपयोग कर रहा है, कोई देखने वाला नहीं। जहां तक ब्यूरोक्रेट्स की मानसिकता की बात है तो अब मा0 न्यायालय के निर्णय से ही साफ हो गया है कि यहां से सांसद का चुनाव जीते निशंक का नामांकन बिजली-पानी-किराया बकाया राशि अदा न करने के कारण निरस्त हो जाना चाहिए था लेकिन जिला निर्वाचन अधिकारी और उस समय के कलक्टर रहे दीपक रावत ने उसे स्वीकार कर चुनाव आयोग को अपनी मुठ्ठी में बंद होने की मिसाल कायम की। धर्म के नाम पर धर्मनगरी में कितना बड़ा ढोंग रचा जा रहा है आजकल गंगनहर बंदी के दौरान हरकी पैड़ी पर इसका स्पष्ट नजारा देखा जा सकता है। यदि राज्य की किसी नदी पर विद्युत उत्पादन एवं बाढ़ नियंत्रण हेतु बांध का निर्माण कराया जाय तो धर्म के नाम पर ढोंग फैलाने वाले अनशन और धरना प्रदर्शन कर पूरा बबाल खड़ा कर देते हैं कि गंगा बंध जायेगी, आस्था समाप्त हो जायेगी। गंगा के बंधने से उसके दिव्य गुण समाप्त हो जाते हैं और आज हरकी पैड़ी पर बकायदा बांध बनाकर तालाब में श्रद्धालुओं को स्नान कराया जा रहा है यह कैसी श्रद्धा और आस्था? महामना मदन मोहन मालवीय जी की जय हो-गंगा सभा की जय हो। 
राज्य सरकार की संवेदनहीनता इसी बात से स्पष्ट हो रही है कि यहां प्रतिवर्ष सितम्बर महीने में डेंगू फैलता है और इसी महीने में टमाटर एवं प्याज के दाम बढ़ते हैं, नया राज्य बनने के बाद सरकार किसी भी दल की रही हो विकास के मुद्दों पर किसी ने काम नहीं किया और जो विकास हुए उससे पलायन इतना बढ़ा कि पूरे पहाड़ खाली हो गए। राज्य बनने के बाद से अब तक उत्तराखण्ड की एक भी ऐसी योजना नहीं जिसमें भ्रष्टाचार न हुआ हो क्या इस राज्य का निर्माण भ्रष्टाचार करने और क्षेत्रवाद को बढ़ावा देने के लिए हुआ था, सरकार इस पर विचार करे। यहां कुम्भ और अर्द्धकुम्भ बीत गए केन्द्र और राज्य दोनों से धन आया आज तक इतने स्थायी निर्माण कार्य नहीं हुए कि श्रावण मास का कांवड़ मेला निरापद सम्पन्न हो सके।

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