Skip to main content

सरकारी मशीनरी को भ्रष्ट बनाकर देश को गुलाम बनायेगी भाजपा

देश को बेचकर पुनः गुलाम बनाने की प्रक्रिया केन्द्र सरकार ने प्रारम्भ कर दी है और इस कार्य मंे सहयोग देने वाली सरकारी मशीनरी अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रही है जिसमें पुलिस प्रशासन सबसे आगे है अब पुलिस के पर कतरने की व्यवस्था का शुभारम्भ प्रयोग के तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया गया है वहां की योगी सरकार ने पुलिस को धड़ाधड़ एन्काउण्टर करने का आदेश देकर दोषियों को दण्ड दिलाने वाली पुलिस को ही दोषी बनवाकर उनकी सेवायें समाप्त कर जेल जाने का रास्ता साफ कर दिया है। अभी हाल में ही राज्य से पच्चीस हजार होमगार्डों की सेवायें समाप्त की गई हैं उन सभी को सेवाओं में कमी का दोषी और सेवा में आने के लिए गलत तथ्यों का होना तथा कार्य के प्रति गैर जिम्मेदाराना व्यवहार बताने वाली रिपोर्ट के आधार पर नौकरी से हटाया गया है।
यूपी की भाजपा सरकार से पुलिस ने इतने एन्काउण्टर करवा दिए हैं कि सरकार बदलते ही इनकी जांच करायी जायेगी और दोषी पुलिस कार्मियों की सेवायें समाप्त होंगी चूंकि भाजपा में संघ का दिमाग चलता है इसीलिए दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही दूसरी सरकार में होगी संघ की नीति है कि दूसरे के कन्धे पर रखकर बन्दूक चलाओ और ऐसा दांव चलो कि सांप भी मर जाये और अपनी लाठी भी सुरक्षित रहे यही कारण है कि केन्द्र में मोदी सरकार के आने के बाद सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया और नोटबंदी के दौरान बैंककर्मियों के वारे के न्यारे हो गए अब उनके गुणदोष के आधार पर सेवाएं समाप्त करने का क्रम जारी होगा। केन्द्र की भाजपा सरकार ने जो भी नीतियां और योजनायें चालू की उनमें सरकारी कर्मचारियों को जमकर लूट करने की खुली छूट दे दी सभी ने दोनों हाथों से धन बटोरा और आज भी बटोर रहे है। उत्तराखण्ड राज्य में एक भी सरकारी योजना भ्रष्टाचार से अछूती नहीं है बल्कि लाभार्थियों से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों ने उसका लाभ उठाया अब इसका खामियाजा भी इन्हीं सरकारी कर्मचारियों को भुगतना पड़ेगा। उत्तराखण्ड में तो नया राज्य बनने के बाद क्षेत्रवाद का ऐसा डंका बजा कि नियम कानूनों को धता बताकर क्षेत्र विशेष के नेता हों या सरकारी कर्मचारी सभी ने खुलकर बहती गंगा में स्नान किया। चूंकि गंगा का उद्गम क्षेत्र ही हिमालय है तो हिमालय के वासियों ने गंगा के नाम पर भी अरबों के वारे-न्यारे किए इसमें कई धार्मिक, सामाजिक संस्थायें संघ के आनुसंगिक संगठन तथा संत भी शामिल हैं। 
भाजपा जानती है कि जिस देश को गुलाम बनाना हो वहां का संविधान, संस्कृति और सरकारी मशीनरी को समाप्त कर दो, इसके अलावा और अधिक कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं है। देश में एक-एक कर सरकारी विभागों को समाप्त करने, उनका नाम बदलने और उनको भ्रष्टाचार अथवा नियम विरुद्ध काम करवाने का सिलसिला शुरु कर दिया गया है सबसे पहले भाजपा ने योजना आयोग का नाम बदला तथा दूसरे चरण में रेल बजट को अलग से जारी करने के स्थान पर आम बजट में ही सम्मिलित कर दिया इसका उद्देश्य क्या था किसी को भनक तक नहीं लगी, भाजपा के अतिरिक्त अन्य दलों के नेताओं को उनके पिछले कार्यों का ब्योरा देकर इतना डरा दिया गया कि अब वर्तमान सरकार द्वारा किए जा रहे घोटाले, भ्रष्टाचार एवं देशद्रोही कार्यों पर मुंह खोलने की उनकी हिम्मत ही नहीं पड़ती है। केन्द्र ने नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू कर आम जनता को लूटने के लिए पुलिस तथा परिवहन विभाग को खुली छूट दे रखी है अब पुलिस कर्मियों ने बकायदा अपनी अलग-अलग चालान बुक छपवा रखीं है और जमकर उगाही कर रहे हैं। पुलिस द्वारा काटे गए चालानों की धनराशि कोषागार में जमा नहीं हो रही है जो भविष्य में खुलने वाला सबसे बड़ा घोटाला बनकर उभरेगा उसी घोटाले के आधार पर पुलिस और परिवहन विभाग के कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। जिस प्रकार रेलवे का निजीकरण हो रहा है, शिक्षा, चिकित्सा का व्यवसायीकरण पहले ही हो चुका है शीघ्र ही देश व्यवसायिक घरानों के अधीन आने वाला है।

Comments

Popular posts from this blog

चुनौती बनता जा रहा है समाचारों पत्रों का संचालन

समाचार-पत्र समाज के मार्ग दर्शक होते हैं और समाज के आईना (दर्पण) भी होते हैं, समाचार-पत्र का प्रकाशन एक ऐसा पवित्र मिशन है जो राष्ट्र एवं समाज को समर्पित होता है। समाचार-पत्र ही समाज और सरकार के बीच एक सेतु का काम करते हैं, जनता की आवाज सरकार तक तथा सरकार की योजनायें जनता तक पहुंचाकर विकास का सोपान बनते हैं। आजादी के पूर्व तथा आजादी के बाद से लगभग पांच दशक तक समाचार-पत्रों ने सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का निर्वाह किया। 1975 में लगे आपातकाल से भी समाचार-पत्र विचलित नहीं हुए और उन्होंने अपने पत्रकारिता धर्म का निर्वाह किया ऐसा तब तक ही हुआ जब तक पत्रकार ही समाचार पत्र के प्रकाशक, स्वामी एवं संपादक होते थे ऐसा अब नहीं है।  समाचार पत्रों की निष्पक्षता और निर्भीकता कुछ पंूजीपतियों को रास नहीं आयी और उन्होंने मीडिया जगत पर अपना प्रभुत्व जमाना प्रारम्भ कर दिया। पहले तो समाचार-पत्रों की जनता से पकड़ ढीली करने के लिए इलैक्ट्रोनिक मीडिया को जन्म दिया और बाद में प्रिंट मीडिया का स्वरुप बदल कर उसके मिशन को समाप्त कर व्यावसायिकता में बदल दिया। चंद पूंजीपतियों ने सरकार से सांठगांठ कर मीडिया...

गठबंधन और भाजपा के मुकाबले को त्रिकोणीय बनायेगी जविपा सेक्यूलर

राष्ट्रीय अध्यक्ष एन.पी. श्रीवास्तव ने किया गोरखपुर से नामांकन लखनऊ। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा है कि किसान और जवान का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के सम्मान के लिए कार्य करना होगा। उक्त उद्गार उन्होंनेे गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर ते हुए व्यक्त किए। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के गठन एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के अधिकांश राजनैतिक दल शहरीकरण की आंधी में गुम हो गए हैं और गांव एवं देहात की सत्तर प्रतिशत आबादी को विस्मृत कर दिया है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिए गए ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को सार्थक करने की हामी भरते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए गांवों का विकास आवश्यक है और जन विकास पार्टी सेक्यूलर सत्ता में आने पर सबसे पहले कृषकों को उनकी उपज का मूल्य मेहनत मजदूरी के साथ देकर किसानों को मजबूत करेगी तथा कृषि मजदूरों को...

रावण ने भगवान श्रीराम के हाथों अपने मुक्ति के लिए किया माता सीता का हरण

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज त्रेता युग की उस दुर्लभ लीला का दर्शन कराया जिसमें चार वेदों के ज्ञाता रावण ने भगवान के हाथों अपनी मुक्ति के लिए माता सीता का हरण किया और उनके शरीर पर बिना हाथ लगाये सम्मोहन क्रिया से रथ में बिठाकर लंका ले गया। रामलीला के इस अद्भुत एवं महत्वपूर्ण दृश्य में रावण की भूमिका का सफल निर्वाह करते हुए मनोज सहगल ने जमकर वाहवाही लूटी वहीं श्रीरामलीला कमेटी ने रावण दरबार को जिस प्राचीन राजशाही शैली में सजाया ऐसा दरबार शायद ही किसी अन्य लीला में मिलता है। श्रीरामलीला कमेटी द्वारा भव्य रुप में सजाये गए रावण दरबार में जब राजसी शैली में राज दरबारी तथा रावण पुत्रों का आगमन हुआ और स्वयं लंकाधिपति रावण का जब पुष्प वर्षा से राजदरबार में स्वागत हुआ तो उस दृश्य को देखकर दर्शक भी अपने अतीत से गौरवान्वित हुए। रावण दरबार में जब उसकी बहन सूर्पनखा ने अपने साथ घटित घटना की जानकारी देते हुए बताया कि खर और दूषण भी अब इस दुनिया में नहीं रहे तो रावण समझ गया कि भगवान का अवतार हो गया है और उनके हाथों अपनी मुक्ति का उपाय करना चाहिए। रावण भले ही अहंकारी था ल...