हरिद्वार। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के प्रदेश प्रभारी गिरिश वर्मा ने कहा है कि उत्तराखण्ड की दुर्दशा के लिए राज्य सरकार की नीतियां दोषी हैं परिणाम स्वरुप नया राज्य बनने के दो दशक पूर्ण होने को हैं और राज्य में भ्रष्टाचार, अव्यवस्था, अवैध खनन एवं अवैध शराब के अलावा कोई प्रगति नहीं हुई है। उक्त जानकारी उन्होंने नैनीताल, उधमसिंह नगर, देहरादून तथा हरिद्वार के चार दिवसीय दौरे से आने के बाद यहां दी।
प्रेस को जारी एक बयान में प्रसपा नेता ने कहा कि नया राज्य बनने के बाद यहां घोटालों की भरमार हो गयी है और जो भी सरकार सत्ता में आयी उसने जमकर दोनों हाथों से लूट की। राज्य बनने के बाद से ही बारी-बारी से काबिज रही सरकारों के कार्यकाल पर यदि श्वेत पत्र जारी किया जाये तो उत्तराखण्ड देश का सबसे बड़ा घोटाला प्रदेश के रुप में सामने आयेगा। अवैध खनन एवं अवैध शराब के कारोबार के लिए उत्तराखण्ड की एक अलग पहचान बन चुकी है यहां धार्मिक आयोजन हांे या दैवीय आपदा जो दल सत्ता में होता है जमकर लूट-खसोट करता है। एनएच-74 का घोटाला हो या शिक्षा विभाग में छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य विभाग का ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाला, सिडकुल घोटाला, वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना घोटाला एवं 2013 की केदारनाथ त्रासदी में हुए घोटालों ने यहां के राजनेताओं की संवेदनशीलता की भी पोल खोल दी है। उत्तराखण्ड की राजधानी पहाड़ पर बनाये जाने का पक्ष लेते हुए उन्हांेने कहा कि पहाड़ पर न कोई उद्योग लगे न ही राजधानी बनी परिणाम स्वरुप इतनी बड़ी संख्या में पलायन हुआ कि सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्र जनसंख्या शून्यता की ओर जा रहे हैं और मैदानी क्षेत्रों पर जनसंख्या का भार बढ़ने से कृषि क्षेत्रफल सिकुड़ रहा है। उत्तराखण्ड के राजनेताओं ने कृषि एवं कृषक दोनों को समाप्त कर राज्य के भविष्य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ किया है जिसे संभालने के लिए अब प्रगतिशील समाजवादी पार्टी राज्य में नए सिरे से संगठन की मजबूती के लिए प्रयास कर रही है। प्रसपा के मिशन 2022 की जानकारी देते हुए उन्हांेने बताया कि राज्य की जनता का अब तक यहां की सत्ता पर काबिज रही पार्टियों से विश्वास उठ गया है और जनता का झुकाव धीरे-धीरे प्रसपा की ओर बढ़ रहा है। इस अवसर पर प्रदेश संयोजक रामनरेश यादव ने प्रसपा के सदस्यता अभियान की जानकारी दी।
प्रेस को जारी एक बयान में प्रसपा नेता ने कहा कि नया राज्य बनने के बाद यहां घोटालों की भरमार हो गयी है और जो भी सरकार सत्ता में आयी उसने जमकर दोनों हाथों से लूट की। राज्य बनने के बाद से ही बारी-बारी से काबिज रही सरकारों के कार्यकाल पर यदि श्वेत पत्र जारी किया जाये तो उत्तराखण्ड देश का सबसे बड़ा घोटाला प्रदेश के रुप में सामने आयेगा। अवैध खनन एवं अवैध शराब के कारोबार के लिए उत्तराखण्ड की एक अलग पहचान बन चुकी है यहां धार्मिक आयोजन हांे या दैवीय आपदा जो दल सत्ता में होता है जमकर लूट-खसोट करता है। एनएच-74 का घोटाला हो या शिक्षा विभाग में छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य विभाग का ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाला, सिडकुल घोटाला, वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना घोटाला एवं 2013 की केदारनाथ त्रासदी में हुए घोटालों ने यहां के राजनेताओं की संवेदनशीलता की भी पोल खोल दी है। उत्तराखण्ड की राजधानी पहाड़ पर बनाये जाने का पक्ष लेते हुए उन्हांेने कहा कि पहाड़ पर न कोई उद्योग लगे न ही राजधानी बनी परिणाम स्वरुप इतनी बड़ी संख्या में पलायन हुआ कि सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्र जनसंख्या शून्यता की ओर जा रहे हैं और मैदानी क्षेत्रों पर जनसंख्या का भार बढ़ने से कृषि क्षेत्रफल सिकुड़ रहा है। उत्तराखण्ड के राजनेताओं ने कृषि एवं कृषक दोनों को समाप्त कर राज्य के भविष्य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ किया है जिसे संभालने के लिए अब प्रगतिशील समाजवादी पार्टी राज्य में नए सिरे से संगठन की मजबूती के लिए प्रयास कर रही है। प्रसपा के मिशन 2022 की जानकारी देते हुए उन्हांेने बताया कि राज्य की जनता का अब तक यहां की सत्ता पर काबिज रही पार्टियों से विश्वास उठ गया है और जनता का झुकाव धीरे-धीरे प्रसपा की ओर बढ़ रहा है। इस अवसर पर प्रदेश संयोजक रामनरेश यादव ने प्रसपा के सदस्यता अभियान की जानकारी दी।
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