हरिद्वार। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रदेश संयोजक रामनरेश यादव ने कहा है कि कुम्भ मेला 2021 के आयोजन में मात्र 15 महीने का समय शेष है लेकिन स्थायी प्रवृत्ति के कार्यों का अभी तक श्रीगणेश नहीं हुआ है गत दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने 900 करोड़ रुपये की केन्द्र सरकार से मांग करने की बात कही थी। नियमानुसार केन्द्रीय सहायता से 70 प्रतिशत कार्य स्थायी प्रवृत्ति के होने चाहिए परन्तु मेले की आयोजक राज्य सरकार के आला अधिकारियों ने अभी तक स्थायी कार्यों की शुरुआत नहीं की जो मेला प्रशासन की नियति पर संशय की ओर इंगित कर रही है। ज्ञात हो 2010 के कुम्भ में भी केन्द्रीय बजट का सुदपयोग नहीं हुआ था इस बार मुख्यमंत्री बदले हैं लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री अब केन्द्र में मंत्री हैं और नगर विकास मंत्री यथावत हैं जबकि उस समय उप मेलाधिकारी रहे एक अधिकारी को अब अपर मेलाधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। उस समय के उप मेलाधिकारी की नगर विकास मंत्री के अति विश्वास पात्र थे।
प्रेस को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि कुम्भ मेले हांे या श्रावण मास का कांवड़ के मेले में, पार्किंग, प्रसाधन एवं सुरक्षित यातायात आयोजन की सफलता के मुख्य कारक बनते हैं और कुम्भ मेले के बजट से यदि 50 प्रतिशत धनराशि भी स्थायी निर्माण कार्यों पर लगा दी जाये तो प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले श्रावण मास के कांवड़ मेले तथा अन्य लक्खी मेले एवं यात्रा सीजन की व्यवस्था बनाना आसान हो जायेगा। राज्य निर्माण के बाद से अब तक किसी भी अधिकारी ने भविष्य के लिए किसी स्थायी योजना पर कार्य नहीं किया और केन्द्र तथा राज्य सरकार से मिलने वाले भारी-भरकम बजट को तत्कालीन व्यवस्थाओं पर ही व्यय होना दर्शाकर लीपापोती कर दी जिसकी अभी तक न तो कभी उच्च स्तरीय जांच हुई न ही किसी पर्व का श्वेत-पत्र जारी हुआ।
विडम्बना यह है कि जिन अधिकारियों ने भविष्य की आवश्यकताओं के लिए कोई योजना नहीं बनायी उन्हीं को कुम्भ मेला आयोजन का अनुभवी बताकर दोबारा दायित्व सौंप दिया गया। यह सत्य है कि कुम्भ मेला 2010 के बाद हरिद्वार में एक गलत परम्परा का शुभारम्भ हुआ, इससे पूर्व धर्मनगरी में शराब चोरी-छुपे पी जाती थी लेकिन अब न केवल खुलकर पी जाती है बल्कि गली-मौहल्ले में बाकायदा बिक्री भी होती है जो तीर्थस्थल की मर्यादा के विपरीत है। नगर पालिका बायलाज के अनुसार शराब के ठेके नगर निगम सीमा से 5 मील (लगभग साढे सात किमी0) दूर होने चाहिए जो पहले होते भी थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। हद तो तब हो गयी जब नगर निगम हरिद्वार के प्रथम मेयर एवं हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी जो अब कुम्भ मेले का दायित्व संभाल रहे हैं के कार्यकाल में शराब के दो ठेके रानीपुर झाल और सलेज फार्म दोनों को अब नगर निगम की सीमा पर स्थापित कर दिया गया है जो देश के संविधान, नगर पालिका बायलाज एवं तीर्थस्थल की आस्था तथा पवित्रता सभी के साथ अन्याय है राज्य तथा केन्द्र सरकार दोनों को इस बिगाड़ी गयी व्यवस्था पर तुरन्त ध्यान देकर नियमानुसार समाधान करना चाहिए। हरिद्वार की धर्मपरायण जनता यहां आयोजित होते आ रहे अनेकों कुम्भ-अर्द्धकुम्भ तथा प्रतिवर्ष के कांवड़ मेलों की व्यवस्थाओं से भलीभांति वाकिफ है, हरिद्वार की जनता ने अनेकों दलों की सरकार, उसके राजनेताओं एवं उनके निर्देशन में कार्य करने वाली ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली को देखा है हरिद्वार का एक कुम्भ भाजपा की यूपी सरकार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के कार्यकाल को भी देखा है तो नया राज्य बनने के बाद वर्ष 2004 में कांग्रेस सरकार के मुखिया नारायणदत्त तिवारी के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। अर्द्धकुम्भ मेले के स्थायी निर्माण कार्य जिसका कुल बजट एक सौ करोड़ का था जबकि वर्ष 2010 में भाजपा सरकार के नेतृत्व में सम्पन्न हुए कुम्भ मेले का बजट 750 करोड़ था और स्थायी विकास के नाम पर लगभग शून्य। 2021 का कुम्भ मेला भी भाजपा सरकार और नगर विकास मंत्री (पूर्व एवं वर्तमान) के नेतृत्व में होने जा रहा है यही कारण है कि माननीय मंत्री जी हरिद्वार से ही विधायक हैं और राज्य के नगर विकास मंत्री, उन्होंने न तो 2010 में ही स्थायी निर्माण कार्य करवाये और न ही 2021 के लिए अभी तक प्रारम्भ करवाये जब समय बीत जायेगा तो बिना स्थायी निर्माण के ही तत्कालिक व्यवस्थाओं पर धन व्यय कर दिया जायेगा।
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