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देश लुट रहा है, जनता मायूसी में जीने को मजबूर


विदेशों में जमा कालाधन भारत वापस लाने वालों ने देश की जनता को अच्छे दिन आने का झांसा देकर सत्ता पर ऐसा कब्जा किया कि पूरे देश को धन से खाली करने का जो विश्व रिकार्ड बनाया उसका खुलासा कभी इनके सत्ता में न रहने पर यदि कोई राष्ट्रभक्त ईमानदार व्यक्ति देश की कुर्सी पर बैठा तो अवश्य करेगा। फिलहाल नोटबंदी कराकर दूसरों का धन निकलवाया, जीएसटी से करों की भरमार की, डीजल-पेट्रोल की बिक्री से धन बटोरा, जनता से जुर्माना वसूलकर ब्यूरोक्रेसी को मजबूत किया। देश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के बहाने सोना गिरवी रखा। बैंकों का धन देकर कई चहेतों को विदेश भगा दिया। अब रिजर्व बैंक का रिजर्व धन भी ले लिया, देश के साथ क्या पूरे विश्व के किसी भी देश में इतनी बड़ी लूट कहीं नहीं हुई जितनी वर्तमान सरकार ने की। 
जब कोई सरकार देश के विभागों की व्यवस्था अपने हाथ में न रखकर निजी क्षेत्र को सौंप दे तो समझ लो सरकार ने देश बेच दिया और जनता नए व्यवस्थापकों की गुलाम हो गयी। देश को आजाद कराने में किसका योगदान रहा और आजादी के महानायक की हत्या किसने की, अंग्रेजों के मुखबिर कौन थे ये सब बातें जनता जानती है लेकिन जनता स्वार्थ के सामने नतमस्तक हो जाती है यह वो लोग जान गए जो आज देश को लूट कर धन विहीन बना रहे हैं। देश की जनता करों की मार से मर रही है, सरकार के पास कोई विकास कार्य नहीं, कोई योजना नहीं, कोई अधूरा कार्य पूर्ण नहीं हुआ तो फिर देश का धन कहां जा रहा? यह पूछने की किसी की हिम्मत नहीं। फेसबुक अथवा ट्वीटर पर तो लिखने की किसी की हिम्मत है ही नहीं कुछ लोग दबी जुबान से चण्डूखानी उड़ा रहे हैं कि संविधान, संवैधानिक संस्थायें और ब्यूरोक्रेसी ही नहीं इस नेता ने तो यमराज को भी अपनी मुठ्ठी में बंद कर लिया है। कहते हैं कि यमराज भी उसी नेता के कहने में चल रहा है। उस माता को नमन करने की इच्छा होती है जिसने ऐसे सपूत को जन्म देकर भारत माता को समर्पित किया। आज उस बलशाली और चारो वेदों के ज्ञाता रावण की याद आती है जिसने काल को बांध दिया था, धन के राजा कुबेर को बंदी बना लिया था और भगवान राम की भार्या का अपहरण कर ले गया था जिसने भगवान को ही चकमा दिया था वह भी धन्य था। 
एक कटु सत्य जो प्रत्यक्ष रुप से परिलक्षित हो रहा है कि जब तक देश में आजादी की जंग में सम्मिलित या आजादी से पूर्व जन्मे राजनेताओं का राज रहा तब तक भारत भ्रष्टाचार से मुक्त रहा। जब तक आजादी से पूर्व जन्मे सरकारी कर्मचारी और अधिकारी सेवाओं में रहे वे भी भ्रष्टाचार से डरते थे। 1975 में लगाये गए आपातकाल से पूर्व शायद ही एक-दो ऐसे मामले प्रकाश में आये हों लेकिन अस्सी के दशक के बाद शुरु हुए भ्रष्टाचार के खेल ने ऐसे पांव पसारे कि 21वीं सदी आते-आते अधिकांश राजनेता और अधिकतम सरकारी अधिकारी तथा कर्मचारी भ्रष्टाचार को अपनी शान समझने लगे। देश के साथ लूट-खसोट की परिपाटी ने सर्वाधिक जोर पकड़ा है कालेधन वालों की सरकार आने के बाद क्योंकि जिन पूंजीपतियों ने 2014 का आम चुनाव कराया वे ही देश की सत्ता के मालिक बन गए परिणाम स्वरुप आज भ्रष्टाचार का यह आलम है कि ग्राम प्रधान अथवा वार्ड मेम्बर हो या जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका का चेयरमैन हो या मंत्री, मुख्यमंत्री या केन्द्रीय, सांसद, विधायक कोई भी भ्रष्टाचार से अछूता नहीं रह गया। कहते हैं भ्रष्टाचार हो या शिष्टाचार ऊपर से नीचे की ओर चलता है यथा राजा तथा प्रजा। आज थाना और तहसील से लेकर कोई भी सरकारी विभाग ऐसा नहीं है जहां भ्रष्टाचार चरम पर न हो। सरकारी कर्मचारी/अधिकारी खुलेआम पैसा ले रहे हैं। उनके भ्रष्टाचार की जांच करवाओ तो विभागीय उच्च अधिकारी जांच शुल्क लेकर क्लीन चिट दे देता है, ऐसे चल रहा देश।
देश में ऊपर से लेकर नीचे तक चल पड़े लूट-खसोट के धन्धे का एक कारण यह भी है कि आजादी से पूर्व जन्मे अधिकांश राजनेताओं को दरकिनार कर दिया गया चाहे लालकृष्ण आडवाणी और मुरलीमनोहर जोशी हों या मुलायम सिंह यादव, एचडी देवगौड़ा हों या लालू प्रसाद यादव कोई भी पुराना नेता आज पावर में नहीं है जबकि आजादी से पूर्व जन्मे सरकारी अधिकारी सब रिटायर हो चुके है, यदि इसका प्रत्यक्ष प्रमाण जनता देखना चाहती है तो देश की जनता स्वयं 2004 से 2014 और 2014 से 2019 तक के सत्ता संचालक की तुलना कर ले उसे स्वयं अन्तर समझ में आ जायेगा। देश की सत्ता के संचालन में दिनों-दिन बढ़ रही विसंगतियों का एक कारण यह भी है कि पहले भ्रष्टाचार के दोषी को सजा दी जाती थी आज क्लीन चिट देकर प्रोत्साहित किया जाता है, प्रस्तुत हैं कुछ ऐसे ही नमूने। कर्नाटक में येदिउरप्पा को अवैध खनन के आरोप में सीएम पद से हटाया गया अब फिर सीएम। उत्तराखण्ड में सीएम निशंक से कुम्भ 2010 को लेकर इस्तीफा लिया गया, अब केन्द्र में मंत्री हैं, हेमन्त विसवा शर्मा, विजय बहुगुणा और नारायण राणे कांग्रेस छोड़ भाजपा में सम्मिलित हो गए सारे गुनाह माफ। एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान व्यापम घोटाले के नायक लेकिन सीबीआई खामोश, इसके साथ ही मुकुल राय, रेडी बन्धु एवं सुजाता चौधरी जैसे अनेकों उदाहरण हैं जो अब दूध के धुले हुए हो गए हैं। इस मामले में तो मुख्य न्यायाधीश भी टिप्पणी कर चुके हैं लेकिन कोई असर नहीं जिसे जैसा करना था वह वैसा ही कर रहा है कोई कुछ नहीं कर सकता।

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