बढ़ती वाहनों की संख्या आज यातायात की बड़ी समस्या बनती जा रही है, एक जमाना था जब एक-एक परिवार में चार-पांच से लेकर दस-दस बच्चे पैदा होते थे आज भारत के 70 प्रतिशत परिवार दो या तीन बच्चों तक सिमट गए हैं। उस समय न सड़कें थीं न ही वाहन आज जितनी सड़कें बनी उससे अधिक वाहन सड़क पर आ गए। इंसान की आबादी कम हो रही वाहनों की संख्या बढ़ रही है। पहले शहरों के मोहल्लों में एक दो के पास ही वाहन होते थे आज प्रत्येक परिवार में जितने सदस्य हैं उतने ही वाहन हैं और चार पहिया वाहनों का यह हाल है कि जिसके घर में वाहन खड़ा करने का स्थान नहीं वह भी वाहन खरीद रहा है और पार्किंग स्थल सड़कें बन गयी है। डीजल और पेट्रोल की खपत ही बता रही है कि जनता की कमाई का सर्वाधिक धन कहां खर्च हो रहा है?
उत्तराखण्ड प्रदेश और मुख्य रुप से हरिद्वार में वर्ष पर्यन्त यात्रियों की भरमार रहती है यहां प्रतिवर्ष कांवड़ मेला एक-दो सोमवती अमावस्या के अतिरिक्त भी गंगा दशहरा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे लक्खी मेलों का आयोजन होता रहता है यही कारण है कि हरिद्वार में अक्सर जाम की स्थिति रहती है जो आने वाले यात्रियों तथा स्थानीय जनता को भारी परेशानियों का सबब बनती है। यातायात की व्यवस्था बनाना ही हरिद्वार की मुख्य समस्या है जिस पर आज तक कोई ठोस या स्थायी नीति तैयार नहीं हुई। पूरा यात्रा सीजन जाम में गुजर गया अब गुरु पूर्णिमा एवं कांवड़ मेला का दंश झेलने के लिए जनता को कमर कसनी होगी। अब तक हरिद्वार केवल धर्मनगरी के रुप में जाना जाता था और यहां की अर्थव्यवस्था भी यात्रियों की आमद पर निर्भर करती थी। नया राज्य बनने के बाद यहां बड़ी संख्या में उद्योगों की स्थापना भी हुई जिससे वर्ष 2004 के बाद चार-पांच लाख की आबादी में एकदम इजाफा हो जाने के बाद यह समस्या और बढ़ गयी है। सारी समस्यायें बढ़ने के बाद सरकार का ध्यान इस समस्या के सुधार पर अवश्य गया लेकिन हाईवे का निर्माण पिछले दस वर्षों से अधूरा पड़ा है सरकारी स्तर पर इतनी धीमी गति से चलने वाला निर्माण कार्य हरिद्वार की यातायात व्यवस्था को और पंगु बना रहा है। हरिद्वार की धार्मिक मान्यता को हरकी पैड़ी से इस प्रकार जोड़ दिया गया है कि कुम्भ हो या अर्द्धकुम्भ, कांवड़ मेला हो या अन्य गंगा स्नान प्रत्येक व्यक्ति केवल और केवल हरकी पैड़ी पर ही स्नान कर स्वयं की हरिद्वार यात्रा अथवा गंगा स्नान को सार्थक मानता है। हरकी पैड़ी पर मुख्य गंगा से ही एक नहर को निकाल कर दिव्यता एवं भव्यता प्रदान की गई है जिसका निर्माण ब्रिटिश हुकूमत में कर्नल काटले ने कराया था इसके बाद स्वतंत्रता प्राप्ति से अब तक निर्माण में हुए विस्तार तथा रख-रखाव का कार्य उत्तर प्रदेश का सिंचाई विभाग देख रहा है जबकि संचालन व्यवस्था गंगा सभा करती है और जिला प्रशासन सभी व्यवस्थाओं पर निगरानी एवं कमाण्ड का कार्य देखता है। गंगा की मुख्यधारा में नीलधारा स्नान का भी विशेष महत्व है और केन्द्र सरकार की एक योजना के तहत गंगा को बायें तट पर काली मंदिर से चण्डीघाट पुल तक नए घाटों का निर्माण इसी वर्ष कराया गया है। कांवड़ मेले में यह घाट हरकी पैड़ी के दवाब को कम कर सकते हैं यदि धर्म गुरु एवं गंगा सभा गंगा की मुख्य और नीलधारा में स्नान के महत्व को प्रचारित कर दे। 2021 में कुम्भ पर्व का आयोजन हो रहा है जिसके लिए अभी तक स्थायी निर्माण कार्यों की शुरुआत नहीं हुई है जबकि बजट की राशि पिछले कुम्भ की तुलना में लगभग सात गुनी प्रस्तावित है। गंगा नदी के बायंे तट पर बनाये गए घाटों के समान्तर नीलधारा के दायें तट पर वीआईपी घाट के पास बनी पार्किंग स्थल से चण्डीघाट पुल तक अथवा बैरागी कैम्प की ठोकर तक घाटों का निर्माण कर यात्रियों के दवाब को हरकी पैड़ी पर जाने से कम किया जा सकता है इससे गंगा तथा हरिद्वार की सुन्दरता भी बढ़ेगी और हरकी पैड़ी पर स्नान के दवाब को भी कम किया जा सकेगा। फिलहाल श्रावण मास का कांवड़ मेला सिर पर है, हाइवे का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है और मिट्टी इत्यादि के खुदान के कारण बरसात के समय श्रावण मास की यातायात व्यवस्था और जटिल होने के आसार है। आशा है जिला और मेला प्रशासन इस ओर ध्यान देगा।
Comments
Post a Comment