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यथा राजा तथा प्रजाः जिसकी लाठी उसकी भैंस

समाजवादी विचारक रामनरेश यादव ने कहा है कि जिस देश-प्रदेश का शासक नियम और कानून को तिलांजलि देकर स्वेच्छाचारिता से सरकार चलाता तथा संविधान का सम्मान न कर केवल सत्ता में बना रहना ही उसका उद्देश्य होता है उस देश की जनता और ब्यूरोक्रेसी भी मनमानी पर उतर आती है। स्वतन्त्राता प्राप्ति के बाद एक बार 1975 में सरकार ने मनमानी कर आपातकाल लगाया जिसके दुष्परिणाम देश को भुगतने पड़े और दूसरी बार 2014 में नई सरकार बनने के बाद 2016 से सरकार की तानाशाही प्रारम्भ हुई जो रुकने का नाम नहीं ले रही है। यूपी हो या बिहार जहां भी एक दल विशेष की सरकारंे हैं कानून और व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ रही हैं जिससे देश ही नहीं विदेशों में भी भारत की बिगडती कानून व्यवस्था पर चिन्ता व्यक्त की जा रही है।
25 जून, 1975 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार की मुखिया इन्दिरा गांधी ने जिस आपातकाल की घोषणा थी उससे पूरे देश मंे सरकार के प्रति जो भय का वातावरण बना था उसे देश की पुरानी पीढ़ी जिसने वो मंजर देखे थे अभी भूल भी नहीं पायी थी कि 2016 में देश की जनता को बड़े आर्थिक आपातकाल से जूझना पड़ा। बैंक और एटीएम की लाइनों मंे लगकर सैंकड़ों लोगों की मृत्यु हो गई लेकिन सरकार ने मरने वालांे के प्रति भी कोई सहानुभूति नहीं दिखाई। संवैधानिक संस्थाओं पर एकाधिकार कर देश में जो तानाशाही का वातावरण बनाया गया उससे जनता काफी मर्माहत है लेकिन विडम्बना है आजादी के पूर्व से बाद तक जो लोग देशद्रोही रहे वे ही अब अपने खिलापफ आवाज उठाने वालों को देशद्रोही बता रहे हैं ताकि उनके ऊपर लगा राष्ट्रद्रोह का धब्बा धुल जाये। 
जिस प्रकार आपातकाल में इन्दिरा गांधी ने तानाशाही चलायी तो पूरी ब्यूरोक्रेसी तानाशाह बन गई ठीक उसकी प्रकार 2016 के बाद से केन्द्र सरकार के तानाशाही पूर्ण फैसलों के बाद आज पूरे देश की ब्यूरोक्रेसी ही नहीं बल्कि अपराधी एवं असामाजिक तत्व भी तानाशाह हो गए हैं। कई स्थानों पर बेकाबू भीड़ तानाशाही का मंजर तैयार करती है तो एक धर्म विशेष के लोगों को अपने पक्ष में करने के लिये मारपीट कर उन पर दबाव बनाया जा रहा है। 2016 की आर्थिक आपात वाली तानाशाही का ही परिणाम था कि 2017 में यूपी में सरकार बनते ही एक नए प्रकार की गुण्डागर्दी का शुभारम्भ हुआ और धर्म विशेष को सरेआम निशाना बनाया जाने लगा जो धर्म निरपेक्ष देश में संविधान के विरूद्ध है। जब यूपी सरकार ने तानाशाही चलायी तो यूपी पुलिस भी आक्रामक हो गई और उसने ताबड़तोड़ एनकाउन्टर कर दो जाति विशेष को बहुतायत में निशाना बनाया लेकिन लखनऊ मैं जब एक ब्राह्मण की हत्या हुई तभी से एनकाउन्टर प्रणाली पर रोक लग गई। आज यूपी हो या बिहार भीड़ का बेकाबू होना आम बात हो गई है। कानून का भय समाप्त हो गया है। अस्पतालों में ऑक्सीजन के अभाव में बच्चे मर रहे हैं तो बाल संरक्षण गृहों में बालिका-महिलाओं के साथ दुराचार की वारदातंे आम हो गई हैं। समाज इतना निर्ल्जज बन गया कि घर हो, खेत हो, स्कूल हो या बालिका संरक्षण गृह कहीं भी बालिकायें-महिलायें सुरक्षित नहीं है। भ्रष्टाचार का यह आलम है कि थाना हो या तहसील इसके अतिरिक्त कोई भी विभाग हो बिना रिश्वत के कोई काम नहीं हो रहा है और सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। इस पर देश ही नहीं विदेशों में भी बड़े स्तर पर चिंतन हो रहा है।

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