हरिद्वार में प्रतिवर्ष श्रावण मास का कांवड़ मेला आता है जो जिला प्रशासन के लिए सकुशल सम्पन्न कराना एक बड़ी चुनौती होती है लेकिन इस मेले की परम्परा है कि मेला भले ही भगवान भरोसे हो, भोले के भक्त कष्ट सहकर भी संतुष्ट नजर आते हैं, उनका उद्देश्य यहां सुविधाएं प्राप्त करना नहीं बल्कि कष्ट सहकर भी गंगा जल लेकर अपने गन्तव्य तक पहुंचना होता है। कांवड़ मेले का केन्द्र बिन्दु हरकी पैड़ी होता है और अधिकांश कांवड़ यात्रियों का दवाब रोड़ी बेलवाला यानी कि हरकी पैड़ी से चण्डीघाट तक रहता है जहां नजीबाबाद तथा रुड़की की तरफ जाने वाले यात्रियों का बंटवारा होता है। इस वर्ष इस क्षेत्र में हाईवे का निर्माण कार्य चल रहा है और सबसे विकराल स्थिति होगी चन्द्राचार्य चौक पर जो भीड़ के दवाब का सबसे बड़ा केन्द्र है लेकिन यहां पुल का निर्माण कार्य चल रहा है और कच्ची मिट्टी का खुदान कार्य जारी होने के कारण कीचड़ की समस्या भी विकराल रहेगी।
हरिद्वार में लगने वाले जाम और यातायात की अव्यवस्था के लिए हरिद्वार में तैनात रहे पूर्व अधिकारी जिनमें तत्कालीन जिला अधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दोनों दोषी रहे जिन्होंने गंगनहर की दायीं पटरी पर अवैध कब्जे करवा दिए अन्यथा गंगनहर की दोनों पटरी पक्की हो जातीं तो हरिद्वार में कभी भी जाम की स्थिति नहीं आती। हरिद्वार में कार्यपालिका और विधायिका दोनों ही यहां की स्थायी व्यवस्थायें बनाने के नाम पर तटस्थ रहे यही कारण है कि कुम्भ आयोजन के लिए विशाल माने जाने वाला हरिद्वार का अधिकांश मेला क्षेत्र अतिक्रमित हो चुका है जिसमें बैरागी कैम्प सबसे बड़ा अपवाद है। इतना ही नहीं गत कुम्भ 2010 में शेष बचे बैरागी कैम्प को मेला आयोजन से पूर्व अतिक्रमण मुक्त किया गया लेकिन मेला अवधि में ही मेला अधिकारी एवं अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की मिलीभगत से पक्के निर्माण बनकर तैयार हो गए।
हरिद्वार मंे इस बार कुम्भ मेला अपनी परम्पराओं से हटकर एक वर्ष पूर्व यानी कि 12 वर्ष के स्थान पर 11 वर्ष बाद 2021 में आयोजित होने जा रहा है और मेले की व्यवस्थाओं के लिए हरिद्वार में अब तक जिलाधिकारी रहे दीपक रावत को मेला अधिकारी तथा हरिद्वार में ही पूर्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रहे आईजी संजय गुंज्ज्याल को मेला पुलिस व्यवस्था की कमान सौंपी गई है और संजय गुंज्ज्याल ने तो विधिवत रुप से 1 जुलाई को कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है। दोनों अधिकारियों के लिए पहली बड़ी अग्नि परीक्षा श्रावण मास का कांवड़ मेला है जो 17 जुलाई से 30 जुलाई तक चलेगा। हरिद्वार की यातायात व्यवस्था चूंकि स्थायी तौर पर सुदृढ़ करने की आवश्यकता है अतः गंगनहर की दायीं पटरी पर पक्की सड़क बनना समय की आवश्यकता है और बढ़ते वाहनों के दवाब तथा चार पहिया वाहनों की बढ़ती संख्या एक महामारी का रुप ले रही है ऐसी स्थिति में गंगनहर की दायी पटरी पर हरिद्वार से रुड़की तक बनना बहुत बड़ी आवश्यकता है क्योंकि रुड़की से सहारनपुर, पंजाब, हरियाणा की तरफ जाने वाला ट्रैफिक बंट जाने से मुजफ्फरनगर-मेरठ, दिल्ली की तरफ का ही ट्रैफिक शेष बचता है। उत्तराखण्ड एवं केन्द्र दोनों ही जगह एक ही दल की सरकार है तथा कुम्भ मेले के दोनों अधिकारी उत्तराखण्ड मूल के हैं यदि दोनों अधिकारी राज्य सरकार के साथ मिलकर देवभूमि की भलाई के लिए अपनी इच्छाशक्ति दृढ़ कर लें तो हरिद्वार में यातायात की व्यवस्था सदैव के लिए सुदृढ़ हो सकती है। 2010 का कुम्भ मेला भी भाजपा सरकार ने ही सम्पन्न कराया था जिसमें साढे़ सात सौ करोड़ रुपये का बजट था जबकि इस वर्ष इस बजट को सात गुना बढ़ाकर पांच हजार करोड़ की मांग की गई है और केन्द्र सरकार यदि पूरा धन कुम्भ आयोजन हेतु दे दे तो तीन से चार हजार करोड़ में इतने स्थायी कार्य हो जायेंगे कि मेले के बाद आयोजित होने वाले कांवड़ मेले सहित तमाम लक्खी मेलों के लिए अलग से बजट आमंत्रित करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
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