Skip to main content

फिर शुरु हो गयी नयी सरकार की जनता को हरा-हरा दिखाने की नीतियां

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दूसरी बार देश की बागडोर संभालते ही देश की जनता का स्वाभिमान और स्वतंत्रता समाप्त करने के उद्देश्य सम्मान निधि के नाम से खैरात बांटने का प्रचार प्रारम्भ कर दिया है। पूरा विश्व जानता है कि भारत में साठ प्रतिशत आबादी आज भी शुद्ध रुप से गांव में रहती है जो 130 करोड़ की जनसंख्या के अनुपात में किसानों की संख्या लगभग अस्सी करोड़ बैठती है जिसमें 40 से 50 करोड़ व्यक्ति खेती किसानी से जुड़े हैं। केन्द्र सरकार ने 14.5 करोड़ किसानों को सम्मिलित करते हुए 75 हजार करोड़ रुपये खर्च होने की बात कहते हुए दावा किया है कि अब सभी किसान इसके दायरे में हांेगे यह देखने में ही मिथक प्रतीत हो रहा है। अब तक गठित हुई केन्द्र तथा राज्यों की सरकारों ने किसानों को इसी प्रकार ठगा है। हमारे देश के नेता चुनाव जीतने के बाद सर्वाधिक कमजोर एवं कम अक्ल किसान को ही समझते हैं। कोई किसान का कर्ज माफ करता है तो कोई 72000 रुपये देने की घोषणा करता है जबकि वास्तविकता यह कि किसान को उसकी उपज का पूरा धन न देकर केवल लागत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देते हैं उसमें भी 15 से 20 प्रतिशत बिचौलिये खा जाते हैं। आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी आज तक उसे अपनी मेहनत का मूल्य नहीं मिला जबकि व्यापारी एवं उद्योगपति अपना उत्पाद एम.आर.पी. ;अधिकतम खुदरा मूल्य द्ध लिखकर धड़ल्ले से बेच रहे हैं।
सरकार किसान की आय डेढ़ गुनी और दो गुनी करने की घोषणा कर झूठी वाहवाही तो लूटती है लेकिन कृषि उपज का एम.आर.पी. निर्धारित करने की किसान को छूट नहीं देती है व्यापारी और उद्योगपति अपने माल का मूल्य स्वयं निर्धारित करते हैं जबकि किसान की उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार घोषित करती है जो कृषि और कृषक दोनों का अपमान है।केन्द्र एवं राज्य सरकारें किसान को मोहताज समझ कर खैरात न बांटे बल्कि किसान को उसकी उपज का लागत के साथ उसकी मेहनत का मूल्य देकर गेंहू, धान तथा अन्य दलहनी एवं तिलहनी फसलों का मूल्य लागत के आधार पर निर्धारित 1800 रु. प्रति कुन्तल के स्थान पर मयश्रम मूल्य पांच हजार रुपये प्रति कुन्तल करने की कृषक को छूट दें। किसान को खैरात देकर मोहताज और बेचारा न समझे केन्द्र सरकार। भारत के लगभग साठ करोड़ किसानों में से साढ़े चौदह करोड़ किसानों को पांच सौ रुपये मासिक देकर सरकार उनका उपहास उड़ा रही है लेकिन प्रचारित इस प्रकार कर रही है कि वह किसानों की बहुत बड़ी हितैषी या मददगार है। केन्द्र सरकार ने अपनी स्वयं की नीतियों को भ्रामक बनाते हुए पांच करोड़ छोटे किसानों को तीन हजार रुपये मासिक पेंशन की घोषणा इस आधार पर की है कि सीमांत किसानों को इसके तहत 18 से 40 वर्ष के किसानों को 60 साल की उम्र के बाद तीन हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलेगी, योजना पर 10.774 हजार करोड़ का व्यय बताते हुए 13 करोड़ लोगों को लाभ मिलने की दिलासा दी गई है जो दोनों योजनायें एक-दूसरे से मेल नहीं खाती हैं क्योंकि यह लाभ उन किसानों को 20 से 42 वर्ष बाद मिलेगा, घोषणा के आधार पर यह योजना के बीस वर्ष बाद लागू होने की आशंका व्यक्त की गई है, किसान को इस तरह प्रचार के आंकड़ों में फंसा कर बनाया जा रहा है। पहले चार माह में दो हजार दिए जा रहे थे अब एक साल में छः हजार दिए जाने की नई घोषणा कर दी गई आंकड़ा वही 16-17 रुपये प्रतिदिन का है जिसमें एक पकौड़ा और एक चाय भ्ी नहीं मिलेगी घोषणा इतनी बड़ी कि अखबारों की फस्ट लीड में लिखा कि ‘मोदी सरकार का बड़ा फैसला’ इसी के तहत तीन करोड़ दुकानदार एवं खुदरा व्यापारियों तथा शहीदों के बच्चों की छात्रवृत्ति बढ़ाकर सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा दिया गया है जबकि राष्ट्र निर्माण में किसान, व्यापारी, सेना, पुलिस से लेकर मजदूर वर्ग तक सभी की बराबर भगीदारी है फिर अलग-अलग रिझाने की कोई आवश्यकता ही नहीं होनी चाहिए।

Comments

Popular posts from this blog

परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना से हो जाते हैं असंभव कार्य भी संभव

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वं...

राम और रावण ने संयुक्त रुप से की रामेश्वरम् में ज्योतिर्लिंग की स्थापना

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी ने 3 अक्टूबर से प्रारम्भ हुए रामलीला रुपी अनुष्ठान की अंतिम बेला में आज सेतुबन्ध रामेश्वरम् में ज्योतिर्लिंग की उस अद्भुत स्थापना का दृश्य प्रस्तुत किया जिसमें भगवान श्रीराम तथा रावण ने संयुक्त रुप से शिवोपासना कर धर्म एवं अध्यात्म के माध्यम से वैर भावना को भुलाने का संदेश दिया रामलीला का यह दृश्य चरित्र एवं मर्यादा की उस सीमा का पर्याय बन गया जब श्रीराम ने रावण को मुक्ति का वरदान दिया तो रावण ने राम को आसन्न युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद दिया। रावण विद्वान, बलशाली, अहंकारी के साथ कर्मवीर भी था जिसने अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए न किसी की राय मानी न ही अनुरोध। रावण दूरदृष्टा भी था इसीलिए उसने भाई विभीषण को लंका से निकाल दिया जो रामादल में सम्मिलित होकर लंका का राजा बना। रामलीला के बहुप्रतीक्षित अंगद-रावण संवाद की भी जमकर सराहना हुई। भगवान राम ने युद्ध के अंतिम क्षणों में भी शांतिदूत के रुप में अंगद को रावण के पास भेजा लेकिन रावण ने जानकी को देने के स्थान पर जान की बाजी देने का अपना निर्णय नहीं टाला और दोनों ओर से युद्ध की घोषणा हो गयी। श्रीरा...

गठबंधन और भाजपा के मुकाबले को त्रिकोणीय बनायेगी जविपा सेक्यूलर

राष्ट्रीय अध्यक्ष एन.पी. श्रीवास्तव ने किया गोरखपुर से नामांकन लखनऊ। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा है कि किसान और जवान का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के सम्मान के लिए कार्य करना होगा। उक्त उद्गार उन्होंनेे गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर ते हुए व्यक्त किए। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के गठन एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के अधिकांश राजनैतिक दल शहरीकरण की आंधी में गुम हो गए हैं और गांव एवं देहात की सत्तर प्रतिशत आबादी को विस्मृत कर दिया है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिए गए ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को सार्थक करने की हामी भरते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए गांवों का विकास आवश्यक है और जन विकास पार्टी सेक्यूलर सत्ता में आने पर सबसे पहले कृषकों को उनकी उपज का मूल्य मेहनत मजदूरी के साथ देकर किसानों को मजबूत करेगी तथा कृषि मजदूरों को...