चाचा के हाथ में होगी फिरोजाबाद के विकास की चाबी?
हरिद्वार, 26 अप्रैल। समाजवादी विचारक रामनरेश यादव ने कहा है कि राज करने की नीति को ही राजनीति कहते हैं और जादू तथा राजनीति दो ऐसी विद्यायें हैं जो आम आदमी की समझ से बाहर होती हैं। उत्तर प्रदेश का शैफई गांव आज विश्व स्तरीय राजनीति के शिखर पर अपनी अलग पहचान रखता है जिसके सृजन का श्रेय एक ऐसे व्यक्तित्व को जाता है जिन्हें सुभाषचन्द बोस के बाद नेताजी के नाम से पुकारा जाता है। शून्य से उठकर शिखर पर पहुंचे नेताजी ने अपनी राजनैतिक विरासत भारतीय सभ्यता संविधान एवं परम्परा के अनुकूूल अपने पुत्र को सौंपी जो वर्तमान राजनीति के चाणक्य के रुप में अपनी अलग हैसियत बना रहे हैं और फिरोजाबाद का चुनाव उसी चाणक्य नीति का एक नमूना है।
राजनीति में प्रवेश कर उसके शिखर पर पहुंचना और स्वयं को शिखर पर स्थापित रखना ही कुशल राजनीति होती है। भारत में राजनीति के शिखर पर पहुंचने वालों मंे इन्दिरा गांधी और नरेन्द्र मोदी के बाद अखिलेश यादव तीसरे ऐसे नेता हैं जो राजनीति के दांव-पेंचों में अपने पिता से भी कई कदम आगे हैं। राजनीति का नियम होता है कि कोई भी नेता दूसरे को स्वयं से आगे बढ़ता देखना नहीं चाहता है, इसी नियम के तहत स्व. इन्दिरा गांधी ने अपने पिता की विरासत पर कब्जा करने के लिए पुरानी कांग्रेस को समाप्त कर कांग्रेस आई का गठन किया और स्वयं को राजनीति के शिखर पर स्थापित करने में कामयाब हुईं। वही काम नरेन्द्र मोदी ने किया और भाजपा के दिग्गज नेताओं को घर बैठाकर पूरी भाजपा को अपनी मुठ्ठी मंे बंद कर पूरे देश में अपना प्रभुत्व स्थापित किया। कोई भी व्यक्ति राजनीति के शिखर पर तभी रह सकता है जब वह किसी दूसरे को अपने बराबर का नेता न बनने दे, कई दलों के नेता यह काम कर चुके हैं। शिवपाल यादव का समाजवादी पार्टी के गठन से लेकर सत्ता तक पहुंचाने में अहम रोल रहा है और नेताजी के बाद सपा में उनकी हैसियत दूसरे नम्बर की थी, आज भी पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि भारत में वे अपनी पहचान बताने के मोहताज नहीं हैं उनके अनुयायियों की संख्या सपा के अन्य नेताओं से आज भी अधिक है। समाजवादी पार्टी में अपने उत्तराधिकारी का चयन करना नेताजी का नैतिक दायित्व था जिसका निर्वाह उन्होंने बड़े ही राजनैतिक ढंग से किया। यह सर्वविदित है कि प्रत्येक पिता का उत्तराधिकारी उसका पुत्र ही होता है इसीलिए अखिलेश यादव सपा के सर्वेसर्वा बने।
पिछले ढाई वर्षों में शिवपाल सिंह यादव के साथ सपा में क्या हुआ यह अखिलेश यादव की चाणक्य नीति का नमूना है और फिरोजाबाद में अक्षय यादव के मुकाबले शिवपाल सिंह यादव को चुनाव मैदान में क्यों उतारा गया यह भी अखिलेश यादव की उसी चाणक्य नीति का परिणाम है क्योंकि शैफई परिवार और सपा में जो घटनाक्रम हुए उसके बाद प्रो. रामगोपाल यादव स्वयं को सपा का चाणक्य मानकर अखिलेश के भाग्य का विधाता मानने लगे थे लेकिन कोई भी नेता दूसरे को अपने से सुपर मानने को तैयार नहीं होता है। अखिलेश यादव ने जिस प्रकार चाचा शिवपाल की ताकत को कमजोर करने के लिए स्वयं से अलग किया उसी प्रकार उनके दूसरे चाचा प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव भी भविष्य में उनके लिए खतरा न बन जायें उनके पर कतरना जरुरी हो गया था। अखिलेश यादव राजनीति के ऐसे चाणक्य बन गए हैं कि वे भविष्य में अपने लिए किसी को खतरा नहीं बनने देना चाहते हैं। उनका मिशन अब प्रो. रामगोपाल की शक्ति को कमजोर करना था और यह सत्य है कि अक्षय यादव को शिवपाल सिंह यादव के अलावा कोई अन्य व्यक्ति नहीं हरा सकता था। चाणक्य नीति का जीवंत उदाहरण देखें कि सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे। फिरोजाबाद नेता जी के परिवार की पैत्रिक जन्मभूमि है जिसे वे खोना नहीं चाहते थे। फिरोजाबाद में शैफई परिवार का कब्जा भी रहे और अखिलेश यादव के लिए भविष्य का खतरा भी समाप्त हो जाये इसीलिए चाचा शिवपाल को फिरोजाबाद से उतारा गया जो सीधे तौर पर क्लीन स्वीप करने की स्थिति में है।
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