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सुन्दरकाण्ड है रामायण का सुन्दरतम अध्याय: स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती

हरिद्वार। श्रीगीता विज्ञान आश्रम के परमाध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि सुन्दरकाण्ड रामायण का सुन्दरतम अध्याय है जिसमें हनुमान रुप में स्वयं शंकर जी ने प्रकट होकर सबके बिगड़े काम बनाये। सुन्दरकाण्ड ही भगवान हनुमानजी का स्वरुप है जिसका श्रवण एवं आयोजन करने वालों के सभी अमंगल कार्य मंगलमय हो जाते हैं। वे आज राजा गार्डन के हनुमान चौक स्थित श्रीसिद्धपीठ प्राचीन हनुमान मंदिर में आयोजित श्रीरामकथा की पूर्णाहुति के अवसर हनुमान जयन्ती की शुभकामनायें दे रहे थे।
भगवान शिव के अवतारी हनुमानजी को सबसे बड़ा संकट मोचक बताते हुए उन्हांेने कहा कि भगवान शिव ने ही हनुमान रुप में प्रकट होकर माता सीता, भाई लक्ष्मण और भरत को जीवन दान दिया जबकि सुग्रीव को उसका राज और रानी दोनों दिलाकर लंका में जिस पराक्रम एवं सनातन संस्कृति का संदेश दिया वह जन-जन में अविस्मरणीय रहेगा। कलियुग में शक्ति एवं शक्तिशाली की पूजा को ही सार्थक बताते हुए कहा कि व्यक्ति जब किसी प्रकार के संकट में फंस जाता है तो उसे बजरंगबली का ही स्मरण करना चाहिए। उन्हांेने राजा गार्डन एवं जगजीतपुर वासियों को हनुमान जयन्ती की शुभकामनायें देते हुए कहा कि आज पंजाब, हरियाणा, यूपी एवं दिल्ली से आये भक्तों के साथ ही निकटवर्ती ग्रामों की श्रद्धालु जनता ने जिस प्रकार हनुमानजी का प्रसाद प्राप्त किया है निश्चित ही बजरंगबली सभी का कल्याण करेंगे।
हनुमान जयन्ती के उपलक्ष में आयोजित श्रीरामकथा की पूर्णाहुति के उपलक्ष में आयोजित वेदान्त सम्मेलन को गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति प्रो. वेदप्रकाश शास्त्री, गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर के प्राचार्य डॉ. हरिगोपाल शास्त्री, संस्कृत उदासीन विद्यालय के प्राचार्य प्रो. नारायण शास्त्री, आचार्य हरिओम, योगाचार्य शिवओम सहित अनेकों वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण तथा वेदान्त रामायण के प्रेरणादायी प्रसंगों से सभी हनुमान भक्तों को कलियुग में जीवन जीने की उस कला का दर्शन कराया, जिसकी आज समाज को आवश्यकता है। सम्पूर्ण कार्यक्रम के आयोजक सरपंच भागीरथ, सतीश बसंल, मूलचन्द शर्मा, राकेश साहनी, नरेश शर्मा, शेखर गुप्ता तथा सुरेश पाल सिंह एडवोकेट सहित हनुमान गौशाला के संचालक कामता प्रसाद तिवारी, कोठारी बाबा सियाराम, रवि शर्मा एवं आशीष जी का योगदान सराहनीय रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता म.मं. स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती ने तथा संचालन आचार्य हरिओम ने किया।

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