हरिद्वार। श्रीगीता विज्ञान आश्रम के पर
माध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि रामायण प्रेक्टिकल विज्ञान है और ब्रह्मविद्या का ज्ञान संतों की वाणी से होता है। गंगा स्नान से व्यक्ति का तन पवित्र होता है जबकि मन की पवित्रता के लिए व्यक्ति को संतों के सानिध्य में आना पड़ता है, वे आज राजा गार्डन के हनुमान चौक स्थित श्री हनुमान मंदिर के वार्षिकोत्सव के उपलक्ष में श्रीराम कथा की अमृतवर्षा कर रहे थे।
रामकथा को मानव जीवन का सबसे बड़ा विज्ञान बताते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा ही जीवन का स्वर्ग है और जिस पर बुजुर्गों का आशीर्वाद होता है वही समाज में पद, प्रतिष्ठा और समृद्धि को प्राप्त कर सुखमय जीवन का आनन्द लेता है। रामकथा रुपी सत्संग का भावार्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि परमात्मा संसार के कण-कण में विद्यमान है लेकिन जिसके जीवन में सत्संग रुपी ज्योति प्रज्ज्वलित हो जाती है भगवान उसी के अन्तःकरण में प्रकट हो जाते हैं। राष्ट्र और समाज की सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कथा व्यास ने कहा कि सत्य, तप, दया और दान धर्म के चार चरण हैं और व्यक्ति जो बांटता है उसी वही प्राप्त होता है। भारत विश्व का कल्याण चाहने वालों का एक ऐसा देश है जो गंगा, गाय और गायत्री के आधार पर टिका है यही कारण है कि भारत का अस्तित्व कभी मिटने वाला नहीं है। युगों के अनुसार समाज में आने वाले बदलावों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि युग तथा समय परिवर्तनशील हैं और प्रत्येक अर्थ युग के बाद सतयुग की आवृत्ति होती है। श्रीराम कथा में भक्तों को आशीर्वाद देने पधारे महामण्डलेश्वर स्वामी आनंतानन्द ने कहा कि परमात्मा ने संसार को समस्त प्रकार के पदार्थों से परिपूर्ण किया है लेकिन पुण्य का फल व्यक्ति को कर्मों के अनुरुप मिलता है म.मं. स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती को वैदिक ज्ञान एवं संतत्व की सरलता की प्रतिमूर्ति बताते हुए उन्हांेने कहा कि किसी महान तपस्वी एवं ज्ञानी संत का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मुश्किल से मिलता है। ऋषिकेश से पधारे संत स्वामी राम स्वरुप ब्रह्मचारी ने समाज एवं परिवार के संगठनात्मक ढांचे की उपयोगिता का वर्णन करते हुए कहा कि सत्संग का लाभ अर्जित करने वालों का परिवार ही स्वर्ग बन जाता है। आचार्य हरिओम ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि रामायण वह दैवीय वृक्ष है जिसका सानिध्य प्राप्त करते ही साधक के समस्त दुःखों का शमन हो जाता है और व्यक्ति वैकुण्ठ सदृश सुख को प्राप्त करता है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उन्हांेने बताया कि 18 अप्रैल को प्रातः 7 से 12 बजे तक गायत्री महायज्ञ एवं हवन तथा 19 अप्रैल को प्रातः 7 बजे से 10 बजे तक संगीतमय सुन्दरकाण्ड का पाठ आयोजित होगा तत्पश्चात संत सम्मेलन का आयोजन एवं पावन प्रसाद से भक्त अपने अन्तःकरण को पवित्र करेंगे।
माध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि रामायण प्रेक्टिकल विज्ञान है और ब्रह्मविद्या का ज्ञान संतों की वाणी से होता है। गंगा स्नान से व्यक्ति का तन पवित्र होता है जबकि मन की पवित्रता के लिए व्यक्ति को संतों के सानिध्य में आना पड़ता है, वे आज राजा गार्डन के हनुमान चौक स्थित श्री हनुमान मंदिर के वार्षिकोत्सव के उपलक्ष में श्रीराम कथा की अमृतवर्षा कर रहे थे।
रामकथा को मानव जीवन का सबसे बड़ा विज्ञान बताते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा ही जीवन का स्वर्ग है और जिस पर बुजुर्गों का आशीर्वाद होता है वही समाज में पद, प्रतिष्ठा और समृद्धि को प्राप्त कर सुखमय जीवन का आनन्द लेता है। रामकथा रुपी सत्संग का भावार्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि परमात्मा संसार के कण-कण में विद्यमान है लेकिन जिसके जीवन में सत्संग रुपी ज्योति प्रज्ज्वलित हो जाती है भगवान उसी के अन्तःकरण में प्रकट हो जाते हैं। राष्ट्र और समाज की सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कथा व्यास ने कहा कि सत्य, तप, दया और दान धर्म के चार चरण हैं और व्यक्ति जो बांटता है उसी वही प्राप्त होता है। भारत विश्व का कल्याण चाहने वालों का एक ऐसा देश है जो गंगा, गाय और गायत्री के आधार पर टिका है यही कारण है कि भारत का अस्तित्व कभी मिटने वाला नहीं है। युगों के अनुसार समाज में आने वाले बदलावों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि युग तथा समय परिवर्तनशील हैं और प्रत्येक अर्थ युग के बाद सतयुग की आवृत्ति होती है। श्रीराम कथा में भक्तों को आशीर्वाद देने पधारे महामण्डलेश्वर स्वामी आनंतानन्द ने कहा कि परमात्मा ने संसार को समस्त प्रकार के पदार्थों से परिपूर्ण किया है लेकिन पुण्य का फल व्यक्ति को कर्मों के अनुरुप मिलता है म.मं. स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती को वैदिक ज्ञान एवं संतत्व की सरलता की प्रतिमूर्ति बताते हुए उन्हांेने कहा कि किसी महान तपस्वी एवं ज्ञानी संत का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मुश्किल से मिलता है। ऋषिकेश से पधारे संत स्वामी राम स्वरुप ब्रह्मचारी ने समाज एवं परिवार के संगठनात्मक ढांचे की उपयोगिता का वर्णन करते हुए कहा कि सत्संग का लाभ अर्जित करने वालों का परिवार ही स्वर्ग बन जाता है। आचार्य हरिओम ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि रामायण वह दैवीय वृक्ष है जिसका सानिध्य प्राप्त करते ही साधक के समस्त दुःखों का शमन हो जाता है और व्यक्ति वैकुण्ठ सदृश सुख को प्राप्त करता है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उन्हांेने बताया कि 18 अप्रैल को प्रातः 7 से 12 बजे तक गायत्री महायज्ञ एवं हवन तथा 19 अप्रैल को प्रातः 7 बजे से 10 बजे तक संगीतमय सुन्दरकाण्ड का पाठ आयोजित होगा तत्पश्चात संत सम्मेलन का आयोजन एवं पावन प्रसाद से भक्त अपने अन्तःकरण को पवित्र करेंगे।

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