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नवरात्र साधना से मानव जीवन में होता है स्वास्थ्य एवं समृद्धि का समावेश : स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती

हरिद्वार, 12 अप्रैल। अध्यात्म और विज्ञान के विश्लेषक गीता मनीषी महामण्डलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि नवरात्र साधना व्यक्ति में संस्कार संस्कृति का समावेश कर स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन का समावेश करती है। सृष्टि की रचना एवं नव सवंत्सवर से प्रारम्भ होने वाले इस अनुष्ठान को जो साधक सनातन परम्परा के अनुरूप पूर्ण करते हैं उनके जीवन में उत्साह एवं आत्मबल की अनंत वृद्धि हो जाती है। वे आज विष्णु गार्डन स्थित श्री गीता विज्ञान आश्रम में शक्ति अनुष्ठान में पधारे साधकों को धर्म एवं अध्यात्म के वैज्ञानिक स्वरूप की जानकारी दे रहे थे।  सनातन धर्म एवं संस्कृति को सृष्टि की सर्वोत्तम व्यवस्था बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि मुनियों ने धार्मिक पर्वो का सृजन व्यक्ति के जीवन और उसके शरीर की आवश्यकताओं के अनुरूप किया है यहीं कारण ाहै कि धर्म के सापेक्ष आचारण करने वाला कभी बीमार, बुद्धि और धनहीन नहीं होता है। दान करने से धन पवित्र होता है और ध्यान करने से साधक बुद्धि और विचारों में पवित्रता आती है। नवरात्र साधना को व्यक्ति की दिनचर्या एवं रहन सहन में सुधार का पर्व बताते हुए आध्यात्मिक गुरू महामण्डलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म व विद्या है जो व्यक्ति को कुमार्ग से हटाकर सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है यही कारण है कि सनानत धर्म के अनुयायी सम्पूर्ण सृष्टि में उच्च श्रेणी की मानवता वाली श्रेणी में माने जाते हैं। उन्होंने सभी धर्मो को सन्मार्ग का प्रदाता बताते हुए कहा कि आर्यवर्त विभिन्न धर्म एवं संस्कृतियों का गुलदस्ता है और प्रत्येक व्यक्ति की अपने-अपने धर्म का सम्मान करना चाहिए। क्योंकि सभी धर्मो के रास्ते भले ही अलग-अलग हों लेकिन मंजिल सभी की एक है। दैनिब सत्संग की समाप्ति से पूर्व सभी साधकों ने मां आदि शक्ति आरती उतार कर विश्व कल्याण की कामना की तथा पावन प्रसाद से अपने अंतःकरण को पवित्र किया।

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