हरिद्वार। गीता एवं गायत्री के उपासक महामण्डलेश्वर स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज विष्णु गार्डन स्थित श्रीगीता विज्ञान आश्रम में महारुद्राभिषेक का आयोजन कर राष्ट्र एवं समाज के कल्याण की कामना की। अपने हजारों अनुयायियों के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक एवं श्रृंगार कर राष्ट्र और समाज को संभावित संकट के उबारने के लिए भगवान शिव एवं मां गंगा से प्रार्थना की।
देश और धर्म को सम्पूर्ण मानवता के लिए सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने कहा कि सत्कर्म करने वाला शतायु होकर सुख एवं समृद्धि का आनन्द लेता है जबकि कुमार्ग पर चलकर भय का वातावरण बनाने वाले स्वयं अपने विनाश का वातावरण बनाते हैं। भारत को विश्व का सर्वाधिक सहिष्णुतावादी राष्ट्र बताते हुए कहा कि इस महाशिवरात्रि पर अधिकांश शिवालयों में राष्ट्र और समाज के कुशलक्षेम के लिए जलाभिषेक के साथ ही प्रार्थना सभाओं का भी आयोजन हुआ है। भगवान शिव को सृष्टि का सर्वशक्तिमान देव बताते हुए कहा कि देवता और राक्षस दोनों ही उनके उपासक हैं जबकि सभी शक्तिपीठ उनकी अर्द्धागिनी सती के अवशेषों पर तथा दस महाविद्याओं का प्राकट्य माता पार्वती की शक्ति से हुआ है। महाशिवरात्रि का यह पर्व शिव एवं शक्ति के समन्वय का पर्व है और निश्चित ही इन अनुष्ठानों से राष्ट्र तथा समाज में आत्मबल एवं अर्न्तशक्ति का समावेश होगा। इस अवसर पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश के साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय भक्त उपस्थित थे।
देश और धर्म को सम्पूर्ण मानवता के लिए सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने कहा कि सत्कर्म करने वाला शतायु होकर सुख एवं समृद्धि का आनन्द लेता है जबकि कुमार्ग पर चलकर भय का वातावरण बनाने वाले स्वयं अपने विनाश का वातावरण बनाते हैं। भारत को विश्व का सर्वाधिक सहिष्णुतावादी राष्ट्र बताते हुए कहा कि इस महाशिवरात्रि पर अधिकांश शिवालयों में राष्ट्र और समाज के कुशलक्षेम के लिए जलाभिषेक के साथ ही प्रार्थना सभाओं का भी आयोजन हुआ है। भगवान शिव को सृष्टि का सर्वशक्तिमान देव बताते हुए कहा कि देवता और राक्षस दोनों ही उनके उपासक हैं जबकि सभी शक्तिपीठ उनकी अर्द्धागिनी सती के अवशेषों पर तथा दस महाविद्याओं का प्राकट्य माता पार्वती की शक्ति से हुआ है। महाशिवरात्रि का यह पर्व शिव एवं शक्ति के समन्वय का पर्व है और निश्चित ही इन अनुष्ठानों से राष्ट्र तथा समाज में आत्मबल एवं अर्न्तशक्ति का समावेश होगा। इस अवसर पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश के साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय भक्त उपस्थित थे।
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