हरिद्वार। अन्तर्राष्ट्रीय उपभोक्ता कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामनरेश यादव ने कहा है कि 2019 का चुनाव किसानों का होगा और देश में उसी दल की सरकार बनेगी जो किसानों की उपज का पूरा मूल्य देगा। देश की आजादी के सात दशक और लोकसभाओं के 16 आम चुनावों में जो मुद्दे राजनैतिक दलों ने रखे उससे देश की 75 प्रतिशत आबादी खुश नहीं है। उसी का परिणाम है कि अनेकों दलों द्वारा की जाने वाली महंगाई और बेरोजगारी समाप्ति की घोषणायें झूठी साबित हो रही हैं। हमारे देश की कार्यपालिका हो या विधायिका दोनों ने अब तक अपना और पूंजीपतियों का ही विकास किया जिससे देश में आर्थिक विषमता बढ़ी, न तो बेरोजगारी कम हुई न ही महंगाई।
हमारे देश की राजनीति अब पूरी तरह से पूंजीपतियों की गिरफ्त में आ रही है जो कुल आबादी के एक प्रतिशत भी नहीं हैं। इन पूंजीपतियों की सुझायी गयी राय के अनुसार ही सरकार की योजनायें बनती हैं लेकिन उनके उद्योग देश की दो-तीन प्रतिशत आबादी को भी रोजगार नहीं दे पाते हैं। उनका उत्पादन ऐसा कि अपने देश में बने सामान से सस्ता माल पड़ोसी बेचकर मालामाल हो रहा है और मौका पड़ने पर हमारा विरोध भी करता है। देश के प्रति यदि सच्ची भक्ति और योगदान किसी वर्ग का है तो वह है भारत का किसान।
किसान ही आनाज का उत्पादन कर देश को खाद्यान्न व्यवस्था में आत्मनिर्भर बनाता है और किसान का बेटा ही सीमा पर प्रहरी बनकर राष्ट्र की रक्षा करता है। जो राष्ट्रभक्त होता है वह राष्ट्र और समाज की सोचता है जबकि स्वार्थी तत्व केवल अपने वेतन भत्ते एवं अन्य सुविधा शुल्कों के बारे में सोचते हैं। इस चुनाव में देश के किसान ने पहली बार अन्नदाता के बारे में सोचने वाले के पक्ष में मतदान करने का मन बनाया है।
कृषि और कृषक की समस्या ही देश की समस्या है, देश और समाज को खुशहाल बनाने के लिए कृषि उत्पादन का समुचित मूल्य देकर कृषक को सम्पन्न बना दिया जाये तो देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था सभी का समाधान स्वयं निकल आयेगा। प्रत्येक गांव को सड़क मार्गों से जोड़ा जाये तथा प्रत्येक पचास हजार की आबादी पर एक अरबन हाट के रुप में कृषि उत्पादन की क्रय-विक्रय व्यवस्था का प्रबन्ध किया जाये। जो सरकारें देश की सत्तर प्रतिशत आबादी के उन्नयन की योजना जनता को देगी जनता उसे ही केन्द्र की सत्ता के लिए चुनेगी।
हमारे देश की राजनीति अब पूरी तरह से पूंजीपतियों की गिरफ्त में आ रही है जो कुल आबादी के एक प्रतिशत भी नहीं हैं। इन पूंजीपतियों की सुझायी गयी राय के अनुसार ही सरकार की योजनायें बनती हैं लेकिन उनके उद्योग देश की दो-तीन प्रतिशत आबादी को भी रोजगार नहीं दे पाते हैं। उनका उत्पादन ऐसा कि अपने देश में बने सामान से सस्ता माल पड़ोसी बेचकर मालामाल हो रहा है और मौका पड़ने पर हमारा विरोध भी करता है। देश के प्रति यदि सच्ची भक्ति और योगदान किसी वर्ग का है तो वह है भारत का किसान।
किसान ही आनाज का उत्पादन कर देश को खाद्यान्न व्यवस्था में आत्मनिर्भर बनाता है और किसान का बेटा ही सीमा पर प्रहरी बनकर राष्ट्र की रक्षा करता है। जो राष्ट्रभक्त होता है वह राष्ट्र और समाज की सोचता है जबकि स्वार्थी तत्व केवल अपने वेतन भत्ते एवं अन्य सुविधा शुल्कों के बारे में सोचते हैं। इस चुनाव में देश के किसान ने पहली बार अन्नदाता के बारे में सोचने वाले के पक्ष में मतदान करने का मन बनाया है।
कृषि और कृषक की समस्या ही देश की समस्या है, देश और समाज को खुशहाल बनाने के लिए कृषि उत्पादन का समुचित मूल्य देकर कृषक को सम्पन्न बना दिया जाये तो देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था सभी का समाधान स्वयं निकल आयेगा। प्रत्येक गांव को सड़क मार्गों से जोड़ा जाये तथा प्रत्येक पचास हजार की आबादी पर एक अरबन हाट के रुप में कृषि उत्पादन की क्रय-विक्रय व्यवस्था का प्रबन्ध किया जाये। जो सरकारें देश की सत्तर प्रतिशत आबादी के उन्नयन की योजना जनता को देगी जनता उसे ही केन्द्र की सत्ता के लिए चुनेगी।
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