Skip to main content

देश का किसान बदलेगा राजनीति की दिशा: लालसिंह यादव

बरेली। समाजवादी कृषक नेता चौ. लालसिंह यादव ने कहा है कि किसान देश की आत्मा है जो अन्नदाता बनकर देशवासियों को खाद्यान्न व्यवस्था प्रदान करता है और किसान का ही बेटा सेना में सिपाही बनकर राष्ट्र की रक्षा करता है। किसान की कुर्बानी से ही देश आत्मनिर्भर बना और देश की सत्ता का संचालन करने वाली सरकारों का चयन भी देश की सत्तर प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के योगदान से ही होता है। किसान किसी राजनेता अथवा सरकार की कृपा का मोहताज नहीं है लेकिन उसी के द्वारा चयनित सरकारें किसान के साथ नाइंसाफी कर कृषि उपज का पूरा मूल्य नहीं देती हैं परिणाम स्वरुप  किसान और उसके परिवार का स्तर अपनी कार्यपालिका एवं विधायिका के स्तर से काफी नीचा रह गया है।
प्रेस को जारी एक बयान में उन्होंने देश में आर्थिक विषमता बढ़ाने के लिए केन्द्र की सत्ता पर काबिज रही सरकारों की नीतियों को दोषी बताते हुए कहा कि हमारे राजनेता अपने वेतन भत्ते स्वयं बढ़ा लेते हैं और कार्य पालिका वेतन आयोगों का गठन कर अपने-अपने वेतन भत्ते लगातार बढ़ाती जा रही है। जितने वेतन भत्ते  बढ़ रहे हैं उतना ही भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। जब तक सरकारी कर्मचारी कम वेतन में गुजारा करता था तब तक ईमानदार हुआ करता था जिस गति से वेतन भत्ते और सरकारी सुविधायें बढ़ीं उसी गति से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, इस भ्रष्टाचार को रोकने के लिए क्या करना होगा इसका फैसला भी इस देश के किसान को ही करना होगा। कृषि क्षेत्र से जुड़ी देश की सत्तर प्रतिशत आबादी अभावों में जी रही है और दस प्रतिशत सरकारी सेवा से जुड़े कर्मचारी, अधिकारी तथा राजनेता मालामाल होकर मजे मार रहे हैं। भारत कृषि प्रधान देश है और कृषि को मजबूती प्रदान करने से ही देश विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आयेगा लेकिन हमारी ब्यूरोक्रेसी कृषि विकास पर ध्यान न देकर केवल और केवल अपना विकास कर रही है। अशिक्षा को किसानों की दुर्दशा का मुख्य कारण बताते हुए कृषक नेता ने कहा कि किसान ही देश की दिशा और दशा को बदल सकता है इसके लिए उसे स्वयं को बदलना होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान शिक्षा प्रणाली के स्थान पर बड़े शहरों की भांति निजी क्षेत्र की शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना करनी होगी। जब किसान का बेटा शिक्षित होगा तभी देश में स्थायी विकास का सूत्रपात होगा इसके लिए किसानों को संगठित होकर तथा दलीय प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर कृषि को प्रोत्साहन देने वाले किसान के बेटों का ही अपने प्रतिनिधियों के रुप में चयन करन होगा। देश पर अब तक काबिज रही सरकारों ने उद्योगों का भरपूर संरक्षण किया लेकिन ये उद्योग न तो बेरोजगारी दूर कर सके न ही अपने उत्पादों से देश को आत्मनिर्भर बना पाये। हमारे देश की जनता आज भी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए विदेशी आयात पर निर्भर है। सरकार जितना प्रोत्साहन उद्योगों एवं पूंजीपतियों को देती है उतना ही यदि कृषि एवं किसान को दे तो दो साल के अन्दर देश से बेरोजगारी और भ्रष्टाचार दोनों का नामोनिशान मिट जायेगा। उन्होंने केन्द्र तथा राज्य सरकारों से मांग की है कि कृषि उपज का मूल्य निर्धारित करते समय बीज, खाद एवं सिंचाई के साथ ही कृषकों की मेहनत मजदूरी भी सम्मिलित करें तभी कृषि तथा कृषकों का विकास होगा और देश समृद्धिशाली बनेगा। उन्होंने वेतन आयोग की सिफारिशों की भांति कृषि उपज का समर्थन मूल्य घोषित मूल्य से तीन गुना करने की मांग की है।

Comments

Popular posts from this blog

चुनौती बनता जा रहा है समाचारों पत्रों का संचालन

समाचार-पत्र समाज के मार्ग दर्शक होते हैं और समाज के आईना (दर्पण) भी होते हैं, समाचार-पत्र का प्रकाशन एक ऐसा पवित्र मिशन है जो राष्ट्र एवं समाज को समर्पित होता है। समाचार-पत्र ही समाज और सरकार के बीच एक सेतु का काम करते हैं, जनता की आवाज सरकार तक तथा सरकार की योजनायें जनता तक पहुंचाकर विकास का सोपान बनते हैं। आजादी के पूर्व तथा आजादी के बाद से लगभग पांच दशक तक समाचार-पत्रों ने सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का निर्वाह किया। 1975 में लगे आपातकाल से भी समाचार-पत्र विचलित नहीं हुए और उन्होंने अपने पत्रकारिता धर्म का निर्वाह किया ऐसा तब तक ही हुआ जब तक पत्रकार ही समाचार पत्र के प्रकाशक, स्वामी एवं संपादक होते थे ऐसा अब नहीं है।  समाचार पत्रों की निष्पक्षता और निर्भीकता कुछ पंूजीपतियों को रास नहीं आयी और उन्होंने मीडिया जगत पर अपना प्रभुत्व जमाना प्रारम्भ कर दिया। पहले तो समाचार-पत्रों की जनता से पकड़ ढीली करने के लिए इलैक्ट्रोनिक मीडिया को जन्म दिया और बाद में प्रिंट मीडिया का स्वरुप बदल कर उसके मिशन को समाप्त कर व्यावसायिकता में बदल दिया। चंद पूंजीपतियों ने सरकार से सांठगांठ कर मीडिया...

गठबंधन और भाजपा के मुकाबले को त्रिकोणीय बनायेगी जविपा सेक्यूलर

राष्ट्रीय अध्यक्ष एन.पी. श्रीवास्तव ने किया गोरखपुर से नामांकन लखनऊ। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा है कि किसान और जवान का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के सम्मान के लिए कार्य करना होगा। उक्त उद्गार उन्होंनेे गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर ते हुए व्यक्त किए। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के गठन एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के अधिकांश राजनैतिक दल शहरीकरण की आंधी में गुम हो गए हैं और गांव एवं देहात की सत्तर प्रतिशत आबादी को विस्मृत कर दिया है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिए गए ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को सार्थक करने की हामी भरते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए गांवों का विकास आवश्यक है और जन विकास पार्टी सेक्यूलर सत्ता में आने पर सबसे पहले कृषकों को उनकी उपज का मूल्य मेहनत मजदूरी के साथ देकर किसानों को मजबूत करेगी तथा कृषि मजदूरों को...

रावण ने भगवान श्रीराम के हाथों अपने मुक्ति के लिए किया माता सीता का हरण

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज त्रेता युग की उस दुर्लभ लीला का दर्शन कराया जिसमें चार वेदों के ज्ञाता रावण ने भगवान के हाथों अपनी मुक्ति के लिए माता सीता का हरण किया और उनके शरीर पर बिना हाथ लगाये सम्मोहन क्रिया से रथ में बिठाकर लंका ले गया। रामलीला के इस अद्भुत एवं महत्वपूर्ण दृश्य में रावण की भूमिका का सफल निर्वाह करते हुए मनोज सहगल ने जमकर वाहवाही लूटी वहीं श्रीरामलीला कमेटी ने रावण दरबार को जिस प्राचीन राजशाही शैली में सजाया ऐसा दरबार शायद ही किसी अन्य लीला में मिलता है। श्रीरामलीला कमेटी द्वारा भव्य रुप में सजाये गए रावण दरबार में जब राजसी शैली में राज दरबारी तथा रावण पुत्रों का आगमन हुआ और स्वयं लंकाधिपति रावण का जब पुष्प वर्षा से राजदरबार में स्वागत हुआ तो उस दृश्य को देखकर दर्शक भी अपने अतीत से गौरवान्वित हुए। रावण दरबार में जब उसकी बहन सूर्पनखा ने अपने साथ घटित घटना की जानकारी देते हुए बताया कि खर और दूषण भी अब इस दुनिया में नहीं रहे तो रावण समझ गया कि भगवान का अवतार हो गया है और उनके हाथों अपनी मुक्ति का उपाय करना चाहिए। रावण भले ही अहंकारी था ल...