समाजवादी विचारक एवं पत्रकार रामनरेश यादव ने कहा है कि राजनेताओं की विकृत हो रही वाणी से जनता को सावधान रहना होगा अन्यथा सत्ता सुख के स्वार्थी नेता धर्म और सम्प्रदाय का जहर घोलकर हिन्दुस्तान को 1947 वाली स्थिति में पहुंचाने में सफल हो जायेंगे। देश की स्वतंत्रता एवं स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों का अपमान वही कर सकता है जिसके परिवार अथवा पार्टी का कोई व्यक्ति आजादी की लड़ाई से न जुड़ा हो ऐसे लोग देश का संविधान, इतिहास और भूगोल बदलने का प्रयास कर रहे हैं देश की जनता को समय रहते सावधान हो जाना चाहिए।
सत्ताधारी दल हो या विपक्षी राजनेता देश के राजा का स्वरुप होता है और ‘यथा राजा तथा प्रजा’ वाली कहावत काफी पुरानी है कि राजा की भाषा और कर्म जैसा होता है जनता का कार्य और व्यवहार भी वैसा ही बन जाता है। भारत लोकतांत्रिक देश है यहां जनता का अधिकार सर्वोपरि होता है लेकिन वर्तमान सरकार के राजनेता जनता को अपना गुलाम और अनुयायी समझ कर उनकी मानसिकता बदलने के लिए भाषा का अपभ्रंस पैदा कर रहे हैं। देश का संविधान धर्मनिरपेक्ष के साथ हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी को समान रुप से स्वायत्तता प्रदान करता है लेकिन एक दल विशेष के नेता केवल हिन्दू हित की बात कर समाज में वैमनस्यता का वातावरण तैयार कर रहे हैं शायद इसलिए वे अंग्रेजों के पिछलग्गू रहे और उन्हें न तो भारत की स्वतंत्रता रास आ रही है न ही देश का संविधान। लोकसभा के चुनाव नजदीक हैं और राजनेताओं ने आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति प्रारम्भ कर देश की जनता को गुमराह करना प्रारम्भ कर दिया है। धर्म के नाम पर देश को लूटने वालों से जनता को अब समय रहते सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि राम मंदिर के नाम पर देश की अधिसंख्य जनता का वोट लिया जा रहा है और मंदिर कभी नहीं बनेगा। लेकिन काम उल्टे हो रहे हैं। गंगा अपनी स्वच्छता स्वयं करना जानती है और बरसात की बाढ़ में गंगा सहित सभी नदियां अपने-अपने तटों को स्वयं साफ कर लेती हैं। जो गंगा सम्पूर्ण मानवता का कल्याण करती है उसका कल्याण साम्प्रदायिकता की भाषा बोलने वाला कैसे कर सकता है? जो भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम और सम्पूर्ण संसार को भवसागर से पार उतारने वाले है उनका घर सत्ता के स्वार्थी नेता कैसे बनवा सकते? जो राजनेता झूठे वादे और झूठा प्रचार कर सत्ता प्राप्त कर ले उससे कभी भी राष्ट्रहित की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। देश की जनता साढ़े चार साल से कैसा अनुभव कर रही है और देश किधर जा रहा है देश को राम के आदर्शों की आवश्यकता है न कि मंदिर बनाने की आवश्यकता है देश को पटेल के चरित्र की आवश्यकता है लेकिन उनकी मूर्ति बनवा दी, देश को रोजगार की आवश्यकता है सरकार ने रोजगार समाप्त कर दिए। देश की उन्नति आपसी सौहार्द और भाईचारा बढ़ने से होती है लेकिन यहां हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ाने की बात हो रही है। देश की सत्तर प्रतिशत जनता गांवों में रहती है देश के विकास के लिए किसान और कृषि के विकास की आवश्यकता है लेकिन किसान और गरीबों पर करों का भार डालकर उनको दबाया जा रहा है और सरकारी कर्मचारी अधिकारी और राजनेताओं के वेतन भत्ते बढ़ाकर लोकतंत्र एवं संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा है। देश का भविष्य अब किसी राजनेता अथवा ब्यूरोक्रेट्स के हाथ में न होकर जनता के हाथ में है और देश को बचाने, देश के संविधान को बचाने और देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरुप को बचाने के लिए देश की जनता को स्वयं ध्यान में रखकर 2019 के लोकसभा चुनाव में स्वविवेक से मतदान करना होगा।
सत्ताधारी दल हो या विपक्षी राजनेता देश के राजा का स्वरुप होता है और ‘यथा राजा तथा प्रजा’ वाली कहावत काफी पुरानी है कि राजा की भाषा और कर्म जैसा होता है जनता का कार्य और व्यवहार भी वैसा ही बन जाता है। भारत लोकतांत्रिक देश है यहां जनता का अधिकार सर्वोपरि होता है लेकिन वर्तमान सरकार के राजनेता जनता को अपना गुलाम और अनुयायी समझ कर उनकी मानसिकता बदलने के लिए भाषा का अपभ्रंस पैदा कर रहे हैं। देश का संविधान धर्मनिरपेक्ष के साथ हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी को समान रुप से स्वायत्तता प्रदान करता है लेकिन एक दल विशेष के नेता केवल हिन्दू हित की बात कर समाज में वैमनस्यता का वातावरण तैयार कर रहे हैं शायद इसलिए वे अंग्रेजों के पिछलग्गू रहे और उन्हें न तो भारत की स्वतंत्रता रास आ रही है न ही देश का संविधान। लोकसभा के चुनाव नजदीक हैं और राजनेताओं ने आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति प्रारम्भ कर देश की जनता को गुमराह करना प्रारम्भ कर दिया है। धर्म के नाम पर देश को लूटने वालों से जनता को अब समय रहते सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि राम मंदिर के नाम पर देश की अधिसंख्य जनता का वोट लिया जा रहा है और मंदिर कभी नहीं बनेगा। लेकिन काम उल्टे हो रहे हैं। गंगा अपनी स्वच्छता स्वयं करना जानती है और बरसात की बाढ़ में गंगा सहित सभी नदियां अपने-अपने तटों को स्वयं साफ कर लेती हैं। जो गंगा सम्पूर्ण मानवता का कल्याण करती है उसका कल्याण साम्प्रदायिकता की भाषा बोलने वाला कैसे कर सकता है? जो भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम और सम्पूर्ण संसार को भवसागर से पार उतारने वाले है उनका घर सत्ता के स्वार्थी नेता कैसे बनवा सकते? जो राजनेता झूठे वादे और झूठा प्रचार कर सत्ता प्राप्त कर ले उससे कभी भी राष्ट्रहित की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। देश की जनता साढ़े चार साल से कैसा अनुभव कर रही है और देश किधर जा रहा है देश को राम के आदर्शों की आवश्यकता है न कि मंदिर बनाने की आवश्यकता है देश को पटेल के चरित्र की आवश्यकता है लेकिन उनकी मूर्ति बनवा दी, देश को रोजगार की आवश्यकता है सरकार ने रोजगार समाप्त कर दिए। देश की उन्नति आपसी सौहार्द और भाईचारा बढ़ने से होती है लेकिन यहां हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ाने की बात हो रही है। देश की सत्तर प्रतिशत जनता गांवों में रहती है देश के विकास के लिए किसान और कृषि के विकास की आवश्यकता है लेकिन किसान और गरीबों पर करों का भार डालकर उनको दबाया जा रहा है और सरकारी कर्मचारी अधिकारी और राजनेताओं के वेतन भत्ते बढ़ाकर लोकतंत्र एवं संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा है। देश का भविष्य अब किसी राजनेता अथवा ब्यूरोक्रेट्स के हाथ में न होकर जनता के हाथ में है और देश को बचाने, देश के संविधान को बचाने और देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरुप को बचाने के लिए देश की जनता को स्वयं ध्यान में रखकर 2019 के लोकसभा चुनाव में स्वविवेक से मतदान करना होगा।
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