समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता राम नरेश यादव ने कहा है कि राष्ट्र के विकास के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारें कृषि एवं कृषकों को प्रोत्साहन दें | किसानों को बिचौलिओं से बचाकर कृषि उपज का सीधे तौर पर सरकार क्रय करे तो किसान स्वयं सम्पन्न हो जाये और जब तक भारत का किसान सम्पन्न नहीं होगा जब तक चाहे कोई सा इंडिया बना लो भारत सम्पन्न राष्ट्र की श्रेणी में आने वाला नहीं है प्रेस को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि किसान किसी की कृपा या खैरात का मोहताज नहीं है, भारत में सर्वाधिक मेहनत किसान और सीमा पर देश की सुरक्षा किसान का बेटा करता है, लेकिन अब तक देश पर काबिज रही सरकारों की गलत नीतियों के कारण किसान को अपनी उपज और मेहनत का बाजिब मूल्य नहीं मिला, इसीलिए कृषक परेशान और उद्योगपति खुशहाल हैं। उद्योगपति को सस्ता श्रमिक और कच्चा माल मिल जाता है, वह अपने उत्पाद का मूल्य स्वयं निर्धारित करता है इसीलिए ख़ुशहाल है जबकि कृषि उपज का मूल्य सरकार निर्धारित करती है और खरीद सीधे न कर बिचौलिओं के माध्यम से करती है इसीलिए किसान गरीब और परेशान हैं।किसान यदि तिलहन की खेती करता है तो सरकार उसकी उपज नहीं खरीदती और विदेशों से रेडीमेड तेल खरीदकर उसमें मनचाहा सेंट लगाकर बिचौलियों के माध्यम से बिकवा देती है। सरकार किसान द्वारा पैदा किये गए आलू का मूल्य नहीं देती है, बिचौलिओं के माध्यम से दो से पांच रुपए किलो आलू खरीद कर बिचौलियों के माध्यम से दो सौ रुपये किलो चिप्स बना कर बिक़बा देती है।मेहनत किसान करता है और मुनाफा बिचौलिए लूटते हैं।किसान यदि अपना भाग्य बदलना चाहता है तो बिचौलिओं से बचे और अपने कृषि उत्पाद को उद्योग का दर्जा देकर स्वयं अपने भाग्य का विधाता बने, जब उत्पादन किसान करता है तो भंडारण और विपरण की व्यवस्था भी उसे अपने हाथ में लेनी होगी। किसान को अपना भाग्य बदलना है तो वह किसी भी सामंतशाही सरकार के भरोसे न रह कर किसान राजनेता के समर्थन में ही मतदान करे और अपने हितों की रक्षा करने वाली सरकार बनाये तभी देश और किसान की प्रगति होगी अन्यथा चंद स्वार्थी नेता एक दूसरे की बुराई और आलोचनाओ में भटकाकर सत्ता सुख भोगते रहेंगे, जिसने सरकार में रहते कोई विकास कार्य न किया हो किसान उसके पक्ष में मतदान न कर अपने बीच का नेता चुनें और अपना तथा देश का भविष्य उज्जवल करे.
हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वं...
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