समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता रामनरेश यादव ने कहा है कि समाजवाद भारत की आवश्यकता है जबकि अलगाववाद बढ़ाने से देश को आतंकी गतिविधियों का सामना करना पड़ता है। संगठन में बड़ी शक्ति होती है और जब राजनेता एक-दूसरे की बुराई करने को ही अपना कर्तव्य मान लेते हैं तब कमजोर पड़ोसी भी हमलों की साजिश रचने लगते हैं। वाणी की कटुता और शब्दों के अपभ्रंस से व्यक्ति के चरित्र सभ्यता और गंभीरता का बोध होता है तथा जो राजनेता वाणी से गिर जाता है उसकी गरिमा गिरनी प्रारम्भ हो जाती है जो देश के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरती है।
प्रेस को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि सत्तारुढ़ भाजपा में सम्मान की संस्कृति नहीं है चाहे पद कितना ही बड़ा मिल जाये इस दल का नेता पद की गरिमा पर कभी खरा नहीं उतर पाता है। भारत की जनता ने दोबारा भाजपा को पूरे कार्यकाल के लिए देश की सत्ता सौंपी लेकिन भाजपा का कोई भी नेता देश की जनता की भावनाओं और अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। केन्द्र की वर्तमान सरकार ने देश का जो नुकसान किया उसकी पूर्ति आगामी दस वर्षों में भी नहीं हो पायेगी और धनहानि को अनदेखा कर दिया जाये तो भी जनहानि के कलंक को कभी भी धोया नहीं जा सकता है। भारत की जनता एवं विपक्षी राजनेताओं की देशभक्ति को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि आज संकट की घड़ी में पूर देश सरकार के साथ है लेकिन निर्णय लेना सरकार का काम है। कारगिल पर कब्जा हो या संसद भवन पर हमला, उड़ी का हमला हो या पुलवामा का सबसे बड़ा नरसंहार, ऐसी घटनाओं से देश की जनता आहत है। देश की जनता नोटबंदी का दंश झेल सकती है, जीएसटी की मार झेल सकती है, जो भारत का धन लेकर विदेश भाग गए वह घाटा भी झेल सकती है, किसी एक मूर्ति के लिए पड़ोसी देश को बड़ी धनराशि दे दी जाये उसे भी मजबूरन बर्दाश्त कर सकती है लेकिन अपने वीर सपूतों की नृशंस हत्या का दुःख अब जनता की सहनशीलता से ऊपर हो गया है सरकार को चाहिए भविष्य में इन घटनाओं की पुनरावृत्ति रोके।
प्रेस को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि सत्तारुढ़ भाजपा में सम्मान की संस्कृति नहीं है चाहे पद कितना ही बड़ा मिल जाये इस दल का नेता पद की गरिमा पर कभी खरा नहीं उतर पाता है। भारत की जनता ने दोबारा भाजपा को पूरे कार्यकाल के लिए देश की सत्ता सौंपी लेकिन भाजपा का कोई भी नेता देश की जनता की भावनाओं और अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। केन्द्र की वर्तमान सरकार ने देश का जो नुकसान किया उसकी पूर्ति आगामी दस वर्षों में भी नहीं हो पायेगी और धनहानि को अनदेखा कर दिया जाये तो भी जनहानि के कलंक को कभी भी धोया नहीं जा सकता है। भारत की जनता एवं विपक्षी राजनेताओं की देशभक्ति को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि आज संकट की घड़ी में पूर देश सरकार के साथ है लेकिन निर्णय लेना सरकार का काम है। कारगिल पर कब्जा हो या संसद भवन पर हमला, उड़ी का हमला हो या पुलवामा का सबसे बड़ा नरसंहार, ऐसी घटनाओं से देश की जनता आहत है। देश की जनता नोटबंदी का दंश झेल सकती है, जीएसटी की मार झेल सकती है, जो भारत का धन लेकर विदेश भाग गए वह घाटा भी झेल सकती है, किसी एक मूर्ति के लिए पड़ोसी देश को बड़ी धनराशि दे दी जाये उसे भी मजबूरन बर्दाश्त कर सकती है लेकिन अपने वीर सपूतों की नृशंस हत्या का दुःख अब जनता की सहनशीलता से ऊपर हो गया है सरकार को चाहिए भविष्य में इन घटनाओं की पुनरावृत्ति रोके।
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