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आतंकी हमलों की पुनरावृत्ति तुरन्त रोके भाजपा सरकार

दशहतगर्दी फैलाकर किसी को कमजोर करना और अपनी बात मनवाने के लिए दूसरे को मजबूर करने जैसी घटनायें तभी होती हैं जब किसी व्यक्ति का अपना घर मजबूत नहीं होता है या घर का मुखिया अपने ही घर के किसी पर दवाब बनाकर अपना प्रभुत्व स्थापित करता है। शक्ति व्यक्ति की सामर्थ्य से परिलक्षित होती है और जो बातों के बताशे बनाकर अनावश्यक डींगे मारते हैं उन पर दुश्मन हावी होने के लिए हथकण्डे अपनाते रहते हैं। 14 फरवरी को कश्मीर के पुलवामा में हुआ आतंकी हमला अब तक का सबसे बड़ा हमला है जिसमें हमारे 44 जवान व्यवस्था की खामियों के कारण मौत के मुंह में समा गए।
पाकिस्तान आतंक का पर्याय है और 1947 से अब तक भारत के साथ उसके रिश्ते कैसे रहे यह किसी से छुपा नहीं है। भारत का एक-एक नागरिक जानता है कि पाकिस्तान कश्मीर के रास्ते भारत में अस्थिरता का वातावरण बनाता रहता है इस बात से हमारी सेनाएं भी बखूबी वाकिफ हैं और केन्द्र की सत्ता तथा विपक्ष में बैठे राजनेता भी। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक एवं संस्कारित राष्ट्र है और जब राष्ट्र पर किसी प्रकार का संकट आता है तो भारत का एक-एक नागरिक सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो जाता है। विडम्बना यह है कि जब किसी व्यक्ति पर कोई संकट आता है तो वह धर्म या राष्ट्र रक्षा का लबादा ओढ़कर अपना बचाव कर लेता है यही कार्य भाजपा अपने गठन काल से करती आयी है। भाजपा ने जब से सत्ता का स्वाद चखा है तब से उनके जेहन में एक ऐसा जुनून सवार हो गया है कि वह कुछ भी कर सकती है। जब-जब कोई आम चुनाव आता है तो भाजपा देश की जनता का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए कभी राम मंदिर, कभी मुजफ्फरनगर, कभी बुलन्दशहर, कारगिल, संसद हमला, उड़ी और अब पुलवामा के माध्यम से उसने 14 फरवरी से अब तक सम्पूर्ण विपक्ष का अपने भ्रष्टाचार और नाकामियों से ध्यान हटाकर हाथों में मोमबत्तियां थमा दीं और स्वयं राजनीति करने में मस्त है। यह प्रयोग भाजपा और संघ ने पहले अयोध्या और गोधरा से किया था जिसका उसे इतना लाभ मिला कि अब उसका सारा ध्यान इन्हीं कामों पर लग गया है। यह सत्य है कि चौकीदार चोर है के नारों के बीच अब सीएजी की रिपोर्ट भी आनी शुरु हो गयी हैं। सीबीआई की असलियत देश की जनता ही नहीं पूरा विश्व जान गया है।
वर्तमान सरकार ने पूरे देश के प्रत्येक वर्ग को ठगने, देश की आर्थिक व्यवस्था खराब करने और संविधान तथा संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा गिराने के अलावा आज तक कोई ऐसा कार्य नहीं किया जिसके आधार पर देश की जनता उसे दोबारा सत्ता सौंपने की सोच सके। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, अतीत पर निगाह डालें तो भाजपा ने पिछली सरकार की किन-किन नीतियों का विरोध किया था और सत्ता में आने के बाद क्या किया जिससे देश का कितना बड़ा नुकसान हुआ। देश की जनता अपने ही बीच के चंद लोगों के हाथों ठगी गयी, कालाधन नहीं आया जो सफेद धन था वह भी विदेश  चला गया। कई सरकारी, अर्द्ध सरकारी विभागों से काम छीन कर चहेतों को दे दिया गया, देश की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी धुरी रेलवे को धीरे-धीरे निजी हाथों में देने की कवायत शुरु हो चुकी है। राष्ट्रीय राजमार्ग पहले ही निजी हाथों में सौंपे जा चुके हैं। ओएनजीसी, एच.ए.एल. और टेलीकॉम सेक्टर का गला घोट दिया गया है। देश को किस तरफ ले जाया जा रहा है, देश की जनता को अब आंखें खोलकर देख लेना चाहिए कि देश की आजादी से पूर्व और आजादी के बाद स्वायत्तता एवं स्वतंत्रता के विरोधी लोग तथा देश को आजाद कराने वाले के हत्यारों के हाथ में देश की सत्ता सौंपने का क्या हस्र हुआ। पहले इस देश की जनता को असुरक्षित किया फिर विपक्ष को और अब सेना और अर्द्धसैनिक बलों पर हमला करवा कर देश को असुरक्षित करने का काम किया।

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