हरिद्वार। समाजवादी पार्टी के युवा नेता एवं उत्तराखण्ड सपा के फ्रंटल संगठनों के प्रभारी सिद्धार्थ सिंह ने सोमवार को पुल जटवाड़ा स्थित जिला कार्यालय पर सपा कार्यकर्ताओं से भेंटकर उत्तराखण्ड में पार्टी के पुर्नगठन पर चर्चा की वे उत्तराखण्ड में गढ़वाल एवं कुमांऊ मण्डल के एक सप्ताह के दौरे पर आए हैं तथा कार्यकर्ताओं के विचारों से राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत कराएंगे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का कार्यकर्ताओं को संदेश देते सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड में सपा कार्यकर्ता हों या राज्य की जनता किसी को भी अब उपेक्षित नहीं रहने दिया जाएगा इसके लिए राष्ट्रीय नेतृत्व स्वयं संगठन की समीक्षा बैठकों का आयोजन कर कार्यकर्ताओं को जन-जन से जोड़ने का कार्य करेगा। उत्तराखण्ड को भारत का सर्वोत्तम राज्य बताते हुए उन्होंने काह कि इस नए राज्य का सृजन ही समाजवादी पार्टी ने किया था ताकि सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्र के युवाओं को अपने राज्य में सेवाओं के अवसर प्राप्त हों और स्थानीय नेता स्वयं राज्य के विकास में योगदान दें लेकिन अब तक जो दल सत्ता पर काबिज रहे उन्होंने नए राज्य निर्माण के सपने को भुलाकर स्वार्थ की राजनीति की जिससे राज्य का बड़ा अहित हुआ और बड़े पैमाने पर पलायन होने से पहाड़ खाली हो गए और मैदानों पर भार बढ़ गया, परिणाम स्वरूप राज्य की न तो आर्थिक स्थिति सुधरी न ही युवाओं को रोजगार मिला। समाजवादी पार्टी अब राज्य निर्माण का सपना पूर्ण करेगी। समाजवादी पार्टी को उन्होंने सबको साथ लेकर समाजवाद स्थापित करने वाला संगठन बताते हुए कहा कि समाजवादी लोग बिना किसी भेदभाव से सभी समाज एवं धर्म सम्प्रदाय को एकता के सूत्र में पिरोकर समान अधिकार और भागीदारी देने वाला संगठन बताते हुए उन्होंने कहा कि 15 दिन के अंदर देहरादून में एक वृहद कार्यकर्ता बैठक का आयोजन किया जाएगा और शीघ्र ही सपा के फ्रन्टल संगठनों की को जिम्मेदारियां दे दी जाएंगी। बैठक में सभी कार्यकर्ता एवं पदाधिकारियों ने राज्य संगठन के विषय में अपने अपने सुझाव दिए। इस अवसर पर सपा लोहिया वाहिनी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर यादव, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता रामनरेश यादव, युवजन सभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आशीष यादव, पूर्व जिला अध्यक्ष सजिद अंसारी, मौसम अली, दीनानाथ यादव तथा सुभाष कश्यप सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।
समाचार-पत्र समाज के मार्ग दर्शक होते हैं और समाज के आईना (दर्पण) भी होते हैं, समाचार-पत्र का प्रकाशन एक ऐसा पवित्र मिशन है जो राष्ट्र एवं समाज को समर्पित होता है। समाचार-पत्र ही समाज और सरकार के बीच एक सेतु का काम करते हैं, जनता की आवाज सरकार तक तथा सरकार की योजनायें जनता तक पहुंचाकर विकास का सोपान बनते हैं। आजादी के पूर्व तथा आजादी के बाद से लगभग पांच दशक तक समाचार-पत्रों ने सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का निर्वाह किया। 1975 में लगे आपातकाल से भी समाचार-पत्र विचलित नहीं हुए और उन्होंने अपने पत्रकारिता धर्म का निर्वाह किया ऐसा तब तक ही हुआ जब तक पत्रकार ही समाचार पत्र के प्रकाशक, स्वामी एवं संपादक होते थे ऐसा अब नहीं है। समाचार पत्रों की निष्पक्षता और निर्भीकता कुछ पंूजीपतियों को रास नहीं आयी और उन्होंने मीडिया जगत पर अपना प्रभुत्व जमाना प्रारम्भ कर दिया। पहले तो समाचार-पत्रों की जनता से पकड़ ढीली करने के लिए इलैक्ट्रोनिक मीडिया को जन्म दिया और बाद में प्रिंट मीडिया का स्वरुप बदल कर उसके मिशन को समाप्त कर व्यावसायिकता में बदल दिया। चंद पूंजीपतियों ने सरकार से सांठगांठ कर मीडिया...

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