अंतराष्ट्रीय उपभोक्ता कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष राम नरेश यादव ने कहा है कि आसन्न लोकसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर ही मतदान हो और एक दूसरे की आलोचना करने वाले लोगों को जनता सिरे से नकार कर राष्ट्र हित में निर्णय ले। निर्वाचन आयोग को देश की 70%जनता तथा विपक्षी पार्टियों की बात को स्वीकार करते हुए राष्ट्रहित में निर्णय ले लेना चाहिए। लोकतंत्र में बहुमत के आधार पर ही निर्णय लिए जाते हैं लेकिन हमारे देश का चुनाव आयोग पहली बार विपक्ष की बात को न मानकर केवल सत्ता पक्ष के इशारे पर ही कार्य कर रहा है, इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इससे पूर्व चुनाव आयोग को जनहित में निर्णय लेने के लिए आदेशित कर दिया था लेकिन आयोग की कार्यशैली में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। विपक्ष के बार बार कहने के बाद भी कोई कार्यवाही न होना आयोग की संवैधानिकता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है। लोकसभा चुनाव में अभी इतना समय है कि मतपत्र के माध्यम से मतदान कराने की तैयारी की जा सकती है।
समाचार-पत्र समाज के मार्ग दर्शक होते हैं और समाज के आईना (दर्पण) भी होते हैं, समाचार-पत्र का प्रकाशन एक ऐसा पवित्र मिशन है जो राष्ट्र एवं समाज को समर्पित होता है। समाचार-पत्र ही समाज और सरकार के बीच एक सेतु का काम करते हैं, जनता की आवाज सरकार तक तथा सरकार की योजनायें जनता तक पहुंचाकर विकास का सोपान बनते हैं। आजादी के पूर्व तथा आजादी के बाद से लगभग पांच दशक तक समाचार-पत्रों ने सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का निर्वाह किया। 1975 में लगे आपातकाल से भी समाचार-पत्र विचलित नहीं हुए और उन्होंने अपने पत्रकारिता धर्म का निर्वाह किया ऐसा तब तक ही हुआ जब तक पत्रकार ही समाचार पत्र के प्रकाशक, स्वामी एवं संपादक होते थे ऐसा अब नहीं है। समाचार पत्रों की निष्पक्षता और निर्भीकता कुछ पंूजीपतियों को रास नहीं आयी और उन्होंने मीडिया जगत पर अपना प्रभुत्व जमाना प्रारम्भ कर दिया। पहले तो समाचार-पत्रों की जनता से पकड़ ढीली करने के लिए इलैक्ट्रोनिक मीडिया को जन्म दिया और बाद में प्रिंट मीडिया का स्वरुप बदल कर उसके मिशन को समाप्त कर व्यावसायिकता में बदल दिया। चंद पूंजीपतियों ने सरकार से सांठगांठ कर मीडिया...
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