हरिद्वार 2 फरबरी ।समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता रामनरेश यादव ने कहा है कि केंद्र सरकार ने 70 करोड़ में से 6 प्रतिशत मात्र 12 करोड़ किसानों को 17 रुपया प्रतिदिन देने की घोषणा के माध्यम से बड़ी वाहवाही लूटी है जिसे किसान अपना अपमान समझ कर दोबारा झांसे में आने वाले नहीं हैं । सरकार ने अपने ऊपर75000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ने की बात कही है लेकिन बजट में केवल 20000 करोड़ रुपये का ही प्राविधान किया है जो किसानों के साथ सीधा छलावा है । [3:46 PM, 2/2/2019] Ganga Ka Sandesh: केंद्र सरकार के बजट को राजनेता एवं व्यूरोक्रेट्स के हितों की रक्षा करने वाला बताते हुए उन्होंने कहा कि किसान किसी खैरात का मोहताज नहीं है, वह केवल और केवल अपनी मेहनत और लागत के अनुरूप अपनी उपज का मूल्य चाहता है जिसे सरकार न देकर उसको तरह तरह के प्रलोभनों में बहका रही है । किसानों के लिए 17 रुपये प्रतिदिन की खैरात को मेहनतकश अन्नदाता का अपमान बताते हुए उन्होंने कहा कि किसान यदि एक चाय और एक पकोड़ा खरीदता है तो उसे 20 रुपये देने पड़ते हैं, इसके अतिरिक्त आधा किलो दूध का मूल्य बीस रुपये, एक किलो आटे का मूल्य 25 रुपये तथा एक बीड़ी के बंडल का मूल्य भी 20 रुपये देना पड़ता है । किसान की रबी की फसल हो या खरीफ की दोनों फसलों की तैयारी में चार पांच महीने का समय लगता है, सरकार किसान की आय दोगुनी करने की बात तो कहती है लेकिन किसान की मेहनत मजदूरी और लागत का भी पूरा धन उसके खाद्यान्न उत्पादन के रूप में नहीँ देती है । केंद्र सरकार पूजीपतियों को तो पैकेज देती है लेकिन जब किसान का नाम आता है तो सरकार बजट का रोना रोने लगती है । इस बार भी सरकार ने कई विभागों के बजटों में कटौती की है लेकिन किसान की उपज का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाया । अब तक केंद्र में काबिज रहीं सभी सरकारों को किसान विरोधी बताते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की उपज को सरकार सीधे न खरीदकर बिचौलिओं के माध्यम से घोषित मूल्य से कम कीमत पर खरीदती है और किसान यदि भंडारण कर ले तो उसे नुकसान पहुचाने के लिए ही अनेकों राज्य सरकारें किसान की उपज पर सब्सिडी देकर दो रुपये किलो गेंहू तथा तीन रुपये किलो चावल सरकारी सस्ता गल्ला बिक्रेताओं के माध्यम से बिक़बाकर किसान पर चौतरफा मार करती है । उन्होंने देश के किसानों से झूठे वादे एवं अपमान करने वाले अनुदान के झांसे में न आकर अपमान का बदला अपने वोट की चोट से लेने का सुझाव दिया है ।
हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वं...
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