हरिद्वार, २७ जनवरी। गणतंत्रता दिवस के मौक़े पर हरिद्वार स्थित पूर्वी गंगा के मंडल कार्यालय में आयोजित समारोह में बोलते हुए पूर्वी गंगा के अधिशासी अभियंता श्री विजय वीर सिंह यादव ने भारत के संविधान की ख़ूबियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा संविधान अधिकारों के साथ साथ कर्तव्य का भी बोध करता है। श्री विजय वीर ने संविधान में उल्लिखित प्रस्तावना पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत के संविधान की मूल भावना से छेड़ छाड़ की सम्भावना को समाप्त करने के उद्देश्य से लिखी गई प्रस्तावना वास्तव में संविधान की आत्मा है। इस मौक़े पर उन्होंने सभी कर्मचारियों से आह्वान किया कि यदि हम सब सरकार द्वारा प्रदत्त उत्तरदायित्वों का निर्वहन शिद्दत के साथ करते रहें तो यही संविधान के प्रति सच्चा सम्मान होगा। भारी संख्या में उपस्थित कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने संविधान सभा के सभी सदस्यों और ड्राफ़्टिंग समिति के अध्यक्ष बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर जी के संविधान निर्माण में योगदान को याद किया।
हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वं...
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