Skip to main content

एस॰ई॰ पाण्डुवाल और ई॰ ई॰ विजय वीर ने की नई पहल

हरिद्वार, 27 जनवरी। गणतंत्र दिवस को गण के तंत्र की मजबूती का पर्व बताते हुए सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश के अधिकारी श्री दिनेश पाण्डुवाल एस॰ई॰ और श्री विजय वीर सिंह यादव अधिशासी अभियंता ने नयी पहल आरम्भ की है। पूर्वी गंगा के अधीक्षण अभियंता दिनेश कुमार पाण्डुवाल तथा अधिशासी अभियंता विजयवीर सिंह यादव ने आज गणतंत्र दिवस को सार्थकता प्रदान करते हुए मायापुर स्थिति प्राथमिक विद्यालय संख्या-29 के बच्चों को पाठ्य सामग्री के साथ ही नकद पारितोषिक देकर शिक्षित नागरिक बनने का संकल्प दिलाया। यहाँ बता दें कि इस स्कूल में अधिकतर छात्र बेहद ग़रीब हैं। मायापुर स्थित प्राथमिक विद्यालय संख्या- २९ में समाज हित के लिए समर्पित संस्था साहित्य, संस्कृति एवं समाज सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामनरेश यादव के समन्वय के कारण सम्भव हुई इस अनूठी पहल के अंतर्गत सिंचाई विभाग इन अधिकारियों ने अपने कार्यालय पर झंडारोहण कार्यक्रम विधिवत पूर्ण करने के पश्चात अपने वेतन से ख़रीदी स्टेशनरी इत्यादि लेकर मायापुर स्थित प्राथमिक विद्यालय संख्या- २९ के लिए प्रस्थान किया। वहाँ पहुँच कर न केवल छात्रों को प्रेरणा दायक बातें बतायीं बल्कि अपने साथ लाए स्टेशनरी और अन्य पारितोषिक समस्त बच्चों को प्रदान किए। विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज सहगल ने इस पहल के समन्वयक एवं समाज हित के लिए समर्पित संस्था साहित्य, संस्कृति एवं समाज सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामनरेश यादव के साथ साथ सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई इस अनूठी पहल की भूरि भूरि प्रशंसा भी की गई।

Comments

Popular posts from this blog

गठबंधन और भाजपा के मुकाबले को त्रिकोणीय बनायेगी जविपा सेक्यूलर

राष्ट्रीय अध्यक्ष एन.पी. श्रीवास्तव ने किया गोरखपुर से नामांकन लखनऊ। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा है कि किसान और जवान का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के सम्मान के लिए कार्य करना होगा। उक्त उद्गार उन्होंनेे गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर ते हुए व्यक्त किए। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के गठन एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के अधिकांश राजनैतिक दल शहरीकरण की आंधी में गुम हो गए हैं और गांव एवं देहात की सत्तर प्रतिशत आबादी को विस्मृत कर दिया है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिए गए ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को सार्थक करने की हामी भरते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए गांवों का विकास आवश्यक है और जन विकास पार्टी सेक्यूलर सत्ता में आने पर सबसे पहले कृषकों को उनकी उपज का मूल्य मेहनत मजदूरी के साथ देकर किसानों को मजबूत करेगी तथा कृषि मजदूरों को...

परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना से हो जाते हैं असंभव कार्य भी संभव

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वं...

राम और रावण ने संयुक्त रुप से की रामेश्वरम् में ज्योतिर्लिंग की स्थापना

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी ने 3 अक्टूबर से प्रारम्भ हुए रामलीला रुपी अनुष्ठान की अंतिम बेला में आज सेतुबन्ध रामेश्वरम् में ज्योतिर्लिंग की उस अद्भुत स्थापना का दृश्य प्रस्तुत किया जिसमें भगवान श्रीराम तथा रावण ने संयुक्त रुप से शिवोपासना कर धर्म एवं अध्यात्म के माध्यम से वैर भावना को भुलाने का संदेश दिया रामलीला का यह दृश्य चरित्र एवं मर्यादा की उस सीमा का पर्याय बन गया जब श्रीराम ने रावण को मुक्ति का वरदान दिया तो रावण ने राम को आसन्न युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद दिया। रावण विद्वान, बलशाली, अहंकारी के साथ कर्मवीर भी था जिसने अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए न किसी की राय मानी न ही अनुरोध। रावण दूरदृष्टा भी था इसीलिए उसने भाई विभीषण को लंका से निकाल दिया जो रामादल में सम्मिलित होकर लंका का राजा बना। रामलीला के बहुप्रतीक्षित अंगद-रावण संवाद की भी जमकर सराहना हुई। भगवान राम ने युद्ध के अंतिम क्षणों में भी शांतिदूत के रुप में अंगद को रावण के पास भेजा लेकिन रावण ने जानकी को देने के स्थान पर जान की बाजी देने का अपना निर्णय नहीं टाला और दोनों ओर से युद्ध की घोषणा हो गयी। श्रीरा...