हरिद्वार। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्राह्मणों को दूसरा बड़ा झटका देते हुए मठ-मंदिरों से अब पूजा पाठ का काम भी उनसे छीनने का काम शुरु कर दिया है इससे पूर्व उन्होंने सरकारी नौकारियों में मलाईदार पदों से हटाकर अपनी बिरादरी के कार्मिकों की तैनाती कर दी थी जिससे ब्राह्मणों में रोष व्याप्त हो गया था अब योगी आदित्यनाथ ने हनुमान को दलित बताकर दलितों को हनुमान मंदिरों में पूजा-पाठ के लिए कब्जे करवाना प्रारम्भ कर दिया है।
विदित हो योगी आदित्यनाथ उत्तराखण्ड मूल के हैं और गढ़वाल के ऐसे जनपद के निवासी हैं जहां से यूपी एवं उत्तराखण्ड दोनों राज्यों में एक ही जनपद और एक ही जाति के दोनों मुख्यमंत्री हैं। उत्तराखण्ड में एक बहुत बड़ी विसंगति है कि यहां ठाकुर एवं ब्राह्मणों में पुरानी प्रतिद्वन्दता रही है दूसरी प्रतिद्वन्दता गढ़वाल और कुमांयू की है। योगी आदित्यनाथ एक संत ही नहीं राजनेता भी हैं वे जानते हैं कि जिस वर्ग की जनसंख्या मात्र दो-तीन प्रतिशत हो और वह राजनीति हो या ब्यूरोक्रेसी दोनों के मलाईदार पदों पर आसीन हो, उन्होंने इस परिपाटी को बदलने के लिए अब वोटबैंक की तरफ रुख कर लिया है। उत्तर प्रदेश में दलित वर्ग बसपा की मायावती का वोट बैंक माना जाता है उस वोट बैंक को तोड़ने के लिए ही योगी जी ने हनुमान जी को दलित बताया है हनुमान जी मूल रुप से वानर थे और जानवारों की कोई जाति नहीं होती है जाति तो मनुष्यों की भी नहीं होती, भगवान ने सभी को एक जैसा ही पैदा किया है बस मनुष्यों को जातियों में बांटने का काम किसने किया, अब उनको पता लग रहा होगा।
उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का गठबंधन हो रहा है और यह गठबंधन इतना मजबूत है कि दलित, ओबीसी और मुस्लिम जब एक मंच पर आ जायंेगे तो यूपी से भाजपा का सफाया तय है। संघ और भाजपा का काम ही समाज को बांटना है, दूसरों का गठबंधन तुड़वाना है दूसरी पार्टी के दो टुकड़े करवाना है इसी फार्मूले से भजपा सत्ता में आयी है चाहे यूपी हो, बिहार हो या उत्तराखण्ड। भाजपा का चुनाव जीतने का अपना अलग तरीका है और एक तरीका पिट जाता है उसका थिंक टैक कहलाने वाला संघ कोई न कोई नया तरीका सोच लेता है। योगी जी जानते हैं कि किसी भी वर्ग, जाति या सम्प्रदाय का व्यक्ति किसी पार्टी का बंधुआ नहीं होता है वह अपना भला सोचता है। दलित कभी कांग्रेस का वोट बैंक हुआ करते थे, दलितों का कांग्रेस से मोहभंग करने के लिए ही मायावती ने नारा दिया था तिलक, तराजू और तलवार इनके मारो जूते चार, बस दलितों को विश्वास हो गया कि बहिन जी उनकी हितैषी हैं। योगी जी ने हनुमान जी को दलित किसी भ्रम, भूलवश या गलती से नहीं कहा बल्कि ब्राह्मणों को नीचा दिखाने के लिए ही उन्होंने दलितों को हनुमान मंदिरों पर कब्जा करने के लिए उकसाया। इतना ही नहीं आगे चलकर वे भगवान श्रीकृष्ण को यादव बताकर देश के सभी राधाकृष्ण मंदिरों पर यादवों का और भगवान राम को क्षत्रिय बताकर भगवान राम के मंदिरों पर राजपूतों का कब्जा करवा सकते हैं।
योगी जी पक्के राजनेता हैं उन्हें कोई फक्कड़, साधु या भिक्षावृत्ति वाला संत न समझे उन्हें मालूम है कि मोदी जी जब 15-15 लाख रुपये और अच्छे दिन आने का झांसा देकर प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो वे भी भगवान राम को सूर्यवंशी क्षत्रिय बताकर ब्राह्मणों के स्थान पर क्षत्रियों के माध्यम से अयोध्या में राम मंदिर बनवाकर यूपी के दोबारा मुख्यमंत्री तो बन ही सकते हैं। नेता नेता होता है वह राजनीति का विद्वान होता है उसे मालूम होता है कि आज के युग में कोई देशभक्त नहीं है, कोई परमार्थ या लोककल्याण के कार्य नहीं करता जिसका वोट लेना हो उसके स्वार्थ की बात उसके सामने रख दो समझ लो वोट पक्का।
विदित हो योगी आदित्यनाथ उत्तराखण्ड मूल के हैं और गढ़वाल के ऐसे जनपद के निवासी हैं जहां से यूपी एवं उत्तराखण्ड दोनों राज्यों में एक ही जनपद और एक ही जाति के दोनों मुख्यमंत्री हैं। उत्तराखण्ड में एक बहुत बड़ी विसंगति है कि यहां ठाकुर एवं ब्राह्मणों में पुरानी प्रतिद्वन्दता रही है दूसरी प्रतिद्वन्दता गढ़वाल और कुमांयू की है। योगी आदित्यनाथ एक संत ही नहीं राजनेता भी हैं वे जानते हैं कि जिस वर्ग की जनसंख्या मात्र दो-तीन प्रतिशत हो और वह राजनीति हो या ब्यूरोक्रेसी दोनों के मलाईदार पदों पर आसीन हो, उन्होंने इस परिपाटी को बदलने के लिए अब वोटबैंक की तरफ रुख कर लिया है। उत्तर प्रदेश में दलित वर्ग बसपा की मायावती का वोट बैंक माना जाता है उस वोट बैंक को तोड़ने के लिए ही योगी जी ने हनुमान जी को दलित बताया है हनुमान जी मूल रुप से वानर थे और जानवारों की कोई जाति नहीं होती है जाति तो मनुष्यों की भी नहीं होती, भगवान ने सभी को एक जैसा ही पैदा किया है बस मनुष्यों को जातियों में बांटने का काम किसने किया, अब उनको पता लग रहा होगा।
उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का गठबंधन हो रहा है और यह गठबंधन इतना मजबूत है कि दलित, ओबीसी और मुस्लिम जब एक मंच पर आ जायंेगे तो यूपी से भाजपा का सफाया तय है। संघ और भाजपा का काम ही समाज को बांटना है, दूसरों का गठबंधन तुड़वाना है दूसरी पार्टी के दो टुकड़े करवाना है इसी फार्मूले से भजपा सत्ता में आयी है चाहे यूपी हो, बिहार हो या उत्तराखण्ड। भाजपा का चुनाव जीतने का अपना अलग तरीका है और एक तरीका पिट जाता है उसका थिंक टैक कहलाने वाला संघ कोई न कोई नया तरीका सोच लेता है। योगी जी जानते हैं कि किसी भी वर्ग, जाति या सम्प्रदाय का व्यक्ति किसी पार्टी का बंधुआ नहीं होता है वह अपना भला सोचता है। दलित कभी कांग्रेस का वोट बैंक हुआ करते थे, दलितों का कांग्रेस से मोहभंग करने के लिए ही मायावती ने नारा दिया था तिलक, तराजू और तलवार इनके मारो जूते चार, बस दलितों को विश्वास हो गया कि बहिन जी उनकी हितैषी हैं। योगी जी ने हनुमान जी को दलित किसी भ्रम, भूलवश या गलती से नहीं कहा बल्कि ब्राह्मणों को नीचा दिखाने के लिए ही उन्होंने दलितों को हनुमान मंदिरों पर कब्जा करने के लिए उकसाया। इतना ही नहीं आगे चलकर वे भगवान श्रीकृष्ण को यादव बताकर देश के सभी राधाकृष्ण मंदिरों पर यादवों का और भगवान राम को क्षत्रिय बताकर भगवान राम के मंदिरों पर राजपूतों का कब्जा करवा सकते हैं।
योगी जी पक्के राजनेता हैं उन्हें कोई फक्कड़, साधु या भिक्षावृत्ति वाला संत न समझे उन्हें मालूम है कि मोदी जी जब 15-15 लाख रुपये और अच्छे दिन आने का झांसा देकर प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो वे भी भगवान राम को सूर्यवंशी क्षत्रिय बताकर ब्राह्मणों के स्थान पर क्षत्रियों के माध्यम से अयोध्या में राम मंदिर बनवाकर यूपी के दोबारा मुख्यमंत्री तो बन ही सकते हैं। नेता नेता होता है वह राजनीति का विद्वान होता है उसे मालूम होता है कि आज के युग में कोई देशभक्त नहीं है, कोई परमार्थ या लोककल्याण के कार्य नहीं करता जिसका वोट लेना हो उसके स्वार्थ की बात उसके सामने रख दो समझ लो वोट पक्का।
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