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स्वस्थ एवं चिरायु जीवन का आधार है योग: योगाचार्य शिवओम

हरिद्वार। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स दिल्ली के योग चिकित्सक योगगुरु शिवओम आचार्य ने आज श्रीगीता विज्ञान आश्रम ट्रस्ट द्वारा संचालित स्वामी विज्ञानानन्द संस्कृत विद्यालय के छात्रों के लिए सप्तऋषि आश्रम के निकट गंगा तट पर योग कार्यशाला का आयोजन कर योग के माध्यम से स्वस्थ एवं चिरायु जीवन के सूत्रों को समझाया तथा सभी ब्रह्मचारियों को प्राणायाम, योगासान क्रियाओं का अभ्यास भी कराया।
भारत की युवा पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल बनाने के उद्देश्य से आयोजित योग शिविर का शुभारम्भ करते हुए योगगुरु शिवओम आचार्य ने कहा कि मानव तन सृष्टि की अमूल्य धरोहर है जिसे भगवान ने स्वस्थ रहने के लिए बनाया है लेकिन हमारे समाज को कुछ लोग पाश्चात्य सभ्यता की तरफ मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं जबकि पूरा विश्व भारत की ऋषि परम्परा का अनुपालन करने के लिए लालायित है। भारत के ऋषि मुनियों द्वारा स्थापित परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए ही पूज्य गुरुदेव म.मं. स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज ने भारतीय सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के उद्देश्य से संस्कृत विद्यालय की स्थापना की है, ऐसे योग्य, ज्ञानी एवं सनातन धर्म तथा संस्कृति के संवाहक महान संत के आदर्शों को हमे आत्मसात करना होगा। सभी ब्रह्मचारियों से अपनी दिनचर्या तथा खान-पान को आजीवन संतुलित रखने का आवाह्न करते हुए उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था समाज निर्माण की प्रारम्भिक स्थिति है और संस्कारित तथा स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए बाल्यावस्था से ही संस्कार देने की हमारी परम्परा रही है, जब गुरुकुलीय व्यवस्था का वर्चस्व रहा समाज में कोई विसंगति नहीं आयी। उन्होंने श्रीगीता विज्ञान आश्रम ट्रस्ट को संस्कृत विद्यालय की स्थापना के लिए साधुवाद देते हुए कहा कि अपने राष्ट्र की युवा शक्ति के भविष्य निर्माण के लिए मैं सदैव समर्पित भावना से कार्य करता रहूंगा।
कार्यक्रम के संयोजक वैदिक ज्ञान तथा धर्म शास्त्रों के मर्मज्ञ आचार्य हरिओम ने सप्तऋषि गंगा तट पर योग शिविर के आयोजन की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऋषि परम्परा ही सनातन संस्कृति की¬¬ आधार है और ब्रह्मचारियों को योग शिविर से पूर्व भारतीय सभ्यता के गौरव सातों ऋषियों के चित्रों का दर्शन इस उद्देश्य से कराया गया कि सभी छात्र ऋषियों के द्वारा स्थापित परम्पराओं को आत्मसात कर उनके चरित्र को अपने जीवन में उतारंे ताकि भारत की संस्कृति विश्व का सिरमौर बनी रहे। योग शिविर में दिनेशचंद शास्त्री, पं. विकास शास्त्री, सूरज शास्त्री तथा कैलाश शास्त्री ने भारतीय संस्कृति तथा संस्कृत भाषा के अध्ययन में समर्पित सभी ब्रह्मचारियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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