हरिद्वार। चंद पूंजीपतियों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से 2014 में बनाये गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव पूर्व किए गए वादों में से एक भी पूर्ण नहीं किया और जनता का ध्यान विकास के मुद्दों से भटकाने के लिए जो काम किए उनसे पूरे देश की जनता त्राहिमाम-त्राहिमाम करने लगी, परिणाम स्वरुप चार साल का कार्यकाल तथा लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के अंतिम बजट देखकर जनता ने अब भाजपा से मुंह फेरना प्रारम्भ कर दिया है। यूपी के उपचुनाव तथा पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को कड़ी शिकस्त देकर देश की जनता ने संकेत दे दिए है कि 2019 में भाजपा का विदाई समारोह विपक्षी एकता के साथ धूमधामपूर्वक मनाया जायेगा। भाजपा से जनता के विमुख होने का मुख्य कारण विकास कार्यों का नदारत होना तथा प्रधानमंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष सहित अन्य नेताओं की बद्जुबानी है जनता ने साढ़े चार साल में ही भली प्रकार समझ लिया कि जिन नेताओं को बोलने की अक्ल नहीं उन्हें सत्ता सौंपना अब बड़ी नादानी सबित होगी।
चुनाव पूर्व की जाने वाली भाजपा की गतिविधियों का आकलन कर जनता अब इस नतीजे पर पहुंच गयी है कि भाजपा सत्ता पाने के लिए कुछ भी कर सकती है वह न तो देश का भला चाहती न ही समाज का, भाजपा न तो गंगा की स्वच्छता एवं अविरलता चाहती न ही गाय और गीता को, न तो धर्म को चाहती न ही धार्मिक आयोजनों में निष्ठा, धर्म हो या समाज, गाय हो गंगा, हनुमान हो या राम भाजपा सभी को अपनी सत्ता प्राप्ति का साधन मात्र मानती है। जिस प्रकार 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व भाजपा ने मुजफ्फरनगर में हिन्दू-मुस्लिम दंगा कराया था उसी तर्ज पर अने कार्यकर्त्ताओं से गाय कटवाकर मुसलमानों पर थोपने की नियति से बुलन्दशहर में साजिश रची थी और भगवा बिग्रेड के हाथों मारे गए पुलिस इंसपेक्टर की शहादत ने दंगा रोक दिया अन्यथा एक बड़े मुस्लिम आयोजन को बदनाम करने के लिए बड़ी साजिश रची थी। यूपी में भाजपा सरकार ने पहले पुलिस से जनता को इन्काउन्टर दिखाकर मरवाया अब अपने कार्यकर्त्ताओं से पुलिस पर गोलियां चलवा रही है। भाजपा हिन्दू से हिन्दू को मरवाकर हिन्दुस्तान को तालिबान बनाना चाह रही है, यूपी में कानून का राज न होकर जंगलराज चल रहा है। जनता हो या नेता सभी पर भय का इतना बड़ा वातावरण बना दिया गया कि कोई भी जुबान खोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है लेकिन देश की जनता और नेता सभी 2019 के लोकसभा चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नवम्बर के दूसरे पखवाड़े में आये पांच राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम एवं तेलंगाना के चुनाव परिणामों ने भाजपा का सफाया कर दिया है और 2019 में लोकसभा चुनावों के साथ ही 2022 तक अन्य हिन्दी भाषी राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद भारत पुनः भाजपा विहीन बन जायेगा। भाजपा के भ्रष्टाचारी नेता या जेल में हांेगे या फिर पाकिस्तानी पूर्व प्रधानमंत्रियों जैसा हस्र होगा। उत्तराखण्ड भारत का भाल और विश्व का सबसे मनोरम एवं सुख-सम्पदा, शांति, सम्पन्नता तथा आस्था से परिपूर्ण राज्य है लेकिन भाजपा ने भ्रष्टाचार की चारागाह के रुप में विकसित करने के अलावा और कुछ नहीं किया। राज्य के राजनेता एवं ब्यूरोक्रेट्स द्वारा किए गए भ्रष्टाचारों की फेहरिस्त बड़ी लम्बी है। भाजपा की एक और विशेषता है कि वह चाहे पूरे देश को लूट कर खा जाये, सारा धन विदेशों को भेज दे, कर्जदारों को कर्जा देकर विदेश भगा दे, अर्थव्यवस्था चौपट कर दे, देश को गर्त में डुबोने के बाद भी देशभक्त पार्टी कहलाती है। जो नेता दूसरे दलों में रहकर भ्रष्टाचारी कहलाते थे वे सभी भाजपा में आकर दूध के धुले हो गए भ्रष्टाचार के दाग आजीवन के लिए साफ हो गए। चाहे कारगिल युद्ध के शहीदों के लिए बनाए गए ताबूतों में घोटाला हुआ हो या राफेल की खरीद में चूंकि यह सौदे भाजपा ने किए इसलिए न्यायालय में भी इसका सबूत नहीं मानकर क्लीन चिट दे दिया, इसके आगे और क्या हो सकता है। अब तो वास्तव में किसी नेता के बस की बात नहीं बस जो भी करना होगा देश की जनता ही करेगी। अब 1975 से लेकर 2000 तक जो भी राजनैतिक घटनाक्रम रहे शायद उसकी पुनरावृत्ति का समय आ गया है और लोकतंत्र का नियम है कि जो भी करेगी जनता ही करेगी।
चुनाव पूर्व की जाने वाली भाजपा की गतिविधियों का आकलन कर जनता अब इस नतीजे पर पहुंच गयी है कि भाजपा सत्ता पाने के लिए कुछ भी कर सकती है वह न तो देश का भला चाहती न ही समाज का, भाजपा न तो गंगा की स्वच्छता एवं अविरलता चाहती न ही गाय और गीता को, न तो धर्म को चाहती न ही धार्मिक आयोजनों में निष्ठा, धर्म हो या समाज, गाय हो गंगा, हनुमान हो या राम भाजपा सभी को अपनी सत्ता प्राप्ति का साधन मात्र मानती है। जिस प्रकार 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व भाजपा ने मुजफ्फरनगर में हिन्दू-मुस्लिम दंगा कराया था उसी तर्ज पर अने कार्यकर्त्ताओं से गाय कटवाकर मुसलमानों पर थोपने की नियति से बुलन्दशहर में साजिश रची थी और भगवा बिग्रेड के हाथों मारे गए पुलिस इंसपेक्टर की शहादत ने दंगा रोक दिया अन्यथा एक बड़े मुस्लिम आयोजन को बदनाम करने के लिए बड़ी साजिश रची थी। यूपी में भाजपा सरकार ने पहले पुलिस से जनता को इन्काउन्टर दिखाकर मरवाया अब अपने कार्यकर्त्ताओं से पुलिस पर गोलियां चलवा रही है। भाजपा हिन्दू से हिन्दू को मरवाकर हिन्दुस्तान को तालिबान बनाना चाह रही है, यूपी में कानून का राज न होकर जंगलराज चल रहा है। जनता हो या नेता सभी पर भय का इतना बड़ा वातावरण बना दिया गया कि कोई भी जुबान खोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है लेकिन देश की जनता और नेता सभी 2019 के लोकसभा चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नवम्बर के दूसरे पखवाड़े में आये पांच राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम एवं तेलंगाना के चुनाव परिणामों ने भाजपा का सफाया कर दिया है और 2019 में लोकसभा चुनावों के साथ ही 2022 तक अन्य हिन्दी भाषी राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद भारत पुनः भाजपा विहीन बन जायेगा। भाजपा के भ्रष्टाचारी नेता या जेल में हांेगे या फिर पाकिस्तानी पूर्व प्रधानमंत्रियों जैसा हस्र होगा। उत्तराखण्ड भारत का भाल और विश्व का सबसे मनोरम एवं सुख-सम्पदा, शांति, सम्पन्नता तथा आस्था से परिपूर्ण राज्य है लेकिन भाजपा ने भ्रष्टाचार की चारागाह के रुप में विकसित करने के अलावा और कुछ नहीं किया। राज्य के राजनेता एवं ब्यूरोक्रेट्स द्वारा किए गए भ्रष्टाचारों की फेहरिस्त बड़ी लम्बी है। भाजपा की एक और विशेषता है कि वह चाहे पूरे देश को लूट कर खा जाये, सारा धन विदेशों को भेज दे, कर्जदारों को कर्जा देकर विदेश भगा दे, अर्थव्यवस्था चौपट कर दे, देश को गर्त में डुबोने के बाद भी देशभक्त पार्टी कहलाती है। जो नेता दूसरे दलों में रहकर भ्रष्टाचारी कहलाते थे वे सभी भाजपा में आकर दूध के धुले हो गए भ्रष्टाचार के दाग आजीवन के लिए साफ हो गए। चाहे कारगिल युद्ध के शहीदों के लिए बनाए गए ताबूतों में घोटाला हुआ हो या राफेल की खरीद में चूंकि यह सौदे भाजपा ने किए इसलिए न्यायालय में भी इसका सबूत नहीं मानकर क्लीन चिट दे दिया, इसके आगे और क्या हो सकता है। अब तो वास्तव में किसी नेता के बस की बात नहीं बस जो भी करना होगा देश की जनता ही करेगी। अब 1975 से लेकर 2000 तक जो भी राजनैतिक घटनाक्रम रहे शायद उसकी पुनरावृत्ति का समय आ गया है और लोकतंत्र का नियम है कि जो भी करेगी जनता ही करेगी।
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