हरिद्वार। समाजवादी विचारक रामनरेश यादव ने कहा है कि पांच राज्यों में भाजपा को मिली पराजय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नियति और नीतियां जिम्मेदार हैं जिसे कांग्रेस की विजय न मानकर नरेन्द्र मोदी के अहंकार एवं असत्य की पराजय के रुप में देखा जा रहा है क्योंकि असंवेदनशीलता, असत्य, अहंकार, तानाशाही, भ्रष्टाचार और भय का वातावरण जब सभी एकत्र हो जाते हैं तो पतन का कारक बनते हैं। वर्तमान चुनाव परिणाम सीधे-सीधे अहंकार के पतन के प्रमाण हैं जो कांग्रेस और भाजपा दोनों को आयना दिखा रहे हैं। पूरा चुनाव विकास के मुद्दे से अलग था, जो काम मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व किया था वही काम राहुल गांधी ने इन विधानसभा चुनावों में किया। विकास न तब था न अब बिना विकास के चुनाव जीतना देश, लोकतंत्र और संविधान सभी के लिए खतरा है। देश की जनता को सोचना होगा कि जो पार्टी विकास की बात न करे या केवल दूसरों की बुराई के आधार पर चुनाव लड़े तो उसे सिरे से नकार दे।
विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर आयी प्रतिक्रियाओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि केवल शिवसेना की टिप्पणी बेबाक है जिसने सीधे तौर पर इन नतीजों को अन्याय व असत्य की पराजय बताया है जबकि भाकियू ने किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया तो एक संत ने यहां तक कह दिया कि मंदिर नहीं बनाया तो और नुकसान होगा। कांग्रेस नेताओं ने इसे किसान, दलित, मजदूर एवं युवाओं के आक्रोश का परिणाम बताया तो केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने सत्ता विरोधी लहर बताते हुए कहा कि राज्यों के चुनाव से लोस चुनावों पर कोई असर नहीं होगा। भाजपा नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री संघप्रिय गौतम ने मोदी मंत्र को फेल बताते हुए योगी एवं शाह को हटाने की मांग तक कर डाली। भाजपा हो या विपक्ष सभी दलों ने एक स्वर में मोदी की नियति एवं नीतियों को इस हार का जिम्मेदार बताते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्त्ता एवं नेता सभी निराश हैं लेकिन मुंह नहीं खोल सकते, मोदी का अहंकार ही है जो राष्ट्र निर्माण मंे योगदान देने वाले जवाहर लाल नेहरु, इन्दिरा गांधी एवं राजीव गांधी को स्वीकार नहीं कर रहे और न ही भाजपा को उठाने वाले राजनेता लालकृष्ण आडवानी या मुरली मनोहर जोशी जैसे को अधिमान दे रहे हैं।
मोदी की हिटलरशाही से देश का बच्चा-बच्चा नाराज है इसीलिए विकल्प के रुप में कांग्रेस को चुना, कांग्रेस को भी अपने अहंकार का पता राजस्थान और मध्य प्रदेश में चल गया यदि कांग्र्रेस ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया होता तो स्पष्ट बहुमत वाली सरकार बनती। कांग्रेेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ में सपा से दूरी बनाकर रखी लेकिन यूपी में सपा से गठबंधन को तैयार है यह उनकी नेक नियति का नमूना है। 2019 का चुनाव जनता विकास के मुद्दे, विश्वसनीयता और उदारता के आधार पर जितायेगी तथा एक-दूसरे की बुराई कर चुनाव जीतने वाले दलों एवं नेताओं को जनता सीधे-सीधे नकार देगी। जनता अब भली भांति जान चुकी है कि राम मंदिर आम जनता का मुद्दा नहीं है केवल जाति विशेष का मुद्दा है जो राम मंदिर को व्यवसाय के रुप में चलाकर बड़ी मात्रा में दान का धन एकत्र करेंगे। सारे हिन्दू धन देंगे और जायेगा एक जाति की जेब में, यह देश की जनता का मुद्दा नहीं है। जनता यह भी जानती है कि किसानों की कर्ज माफी किसानों की समस्या का समाधान नहीं है। दो-तीन रुपये किलो गेहूं, चावल बेचना गरीबी निवारण का स्थायी समाधान नहीं है। शिक्षा समाज की आवश्यकता है मिड डे मील शिक्षा का शत्रु है और सरकारी प्राथमिक विद्यालय ऐसे सफेद हाथी हैं जो भावी पीढ़ी की बुनियाद कमजोर कर रहे हैं।
देश की जनता चाहती है सरकार कृषि को प्रोत्साहन दे जिससे देश की सत्तर प्रतिशत बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो जायेगा। पूरी सरकारी मशीनरी भ्रष्ट है अब तो योजनाओं में पहले से ही कार्यपालिका और विधायिका का कमीशन जोड़कर स्टीटमेंट बनाये जाते हैं। ब्यूरोक्रेसी का भ्रष्टाचार देश और समाज में असमानता का वातावरण बना रहा है। भ्रष्टाचारी कर्मचारी या अधिकारी की शिकायत पर त्वरित कार्यवाही हो और जांचकर्ता की भी जांच हो। शिक्षा का अधिकार सशक्त किया जाये तथा शिक्षा एवं चिकित्सा को व्यवसायीकरण से मुक्त किया जाये। यदि कोई राजनेता चाहे वह ग्राम प्रधान, पालिकाध्यक्ष हो या मुख्यमंत्री अथवा प्रधानमंत्री यदि जन भावनाओं के प्रतिकूल कार्य करे तो उसे निर्धारित तिथि से पूर्व हटाने का अधिकार भी जनता के पास हो तभी देश और समाज का भला हो सकता है और देश की स्वतंत्रता, एकता एवं अखण्डता अक्षुण्य रह सकती है।
विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर आयी प्रतिक्रियाओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि केवल शिवसेना की टिप्पणी बेबाक है जिसने सीधे तौर पर इन नतीजों को अन्याय व असत्य की पराजय बताया है जबकि भाकियू ने किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया तो एक संत ने यहां तक कह दिया कि मंदिर नहीं बनाया तो और नुकसान होगा। कांग्रेस नेताओं ने इसे किसान, दलित, मजदूर एवं युवाओं के आक्रोश का परिणाम बताया तो केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने सत्ता विरोधी लहर बताते हुए कहा कि राज्यों के चुनाव से लोस चुनावों पर कोई असर नहीं होगा। भाजपा नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री संघप्रिय गौतम ने मोदी मंत्र को फेल बताते हुए योगी एवं शाह को हटाने की मांग तक कर डाली। भाजपा हो या विपक्ष सभी दलों ने एक स्वर में मोदी की नियति एवं नीतियों को इस हार का जिम्मेदार बताते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्त्ता एवं नेता सभी निराश हैं लेकिन मुंह नहीं खोल सकते, मोदी का अहंकार ही है जो राष्ट्र निर्माण मंे योगदान देने वाले जवाहर लाल नेहरु, इन्दिरा गांधी एवं राजीव गांधी को स्वीकार नहीं कर रहे और न ही भाजपा को उठाने वाले राजनेता लालकृष्ण आडवानी या मुरली मनोहर जोशी जैसे को अधिमान दे रहे हैं।
मोदी की हिटलरशाही से देश का बच्चा-बच्चा नाराज है इसीलिए विकल्प के रुप में कांग्रेस को चुना, कांग्रेस को भी अपने अहंकार का पता राजस्थान और मध्य प्रदेश में चल गया यदि कांग्र्रेस ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया होता तो स्पष्ट बहुमत वाली सरकार बनती। कांग्रेेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ में सपा से दूरी बनाकर रखी लेकिन यूपी में सपा से गठबंधन को तैयार है यह उनकी नेक नियति का नमूना है। 2019 का चुनाव जनता विकास के मुद्दे, विश्वसनीयता और उदारता के आधार पर जितायेगी तथा एक-दूसरे की बुराई कर चुनाव जीतने वाले दलों एवं नेताओं को जनता सीधे-सीधे नकार देगी। जनता अब भली भांति जान चुकी है कि राम मंदिर आम जनता का मुद्दा नहीं है केवल जाति विशेष का मुद्दा है जो राम मंदिर को व्यवसाय के रुप में चलाकर बड़ी मात्रा में दान का धन एकत्र करेंगे। सारे हिन्दू धन देंगे और जायेगा एक जाति की जेब में, यह देश की जनता का मुद्दा नहीं है। जनता यह भी जानती है कि किसानों की कर्ज माफी किसानों की समस्या का समाधान नहीं है। दो-तीन रुपये किलो गेहूं, चावल बेचना गरीबी निवारण का स्थायी समाधान नहीं है। शिक्षा समाज की आवश्यकता है मिड डे मील शिक्षा का शत्रु है और सरकारी प्राथमिक विद्यालय ऐसे सफेद हाथी हैं जो भावी पीढ़ी की बुनियाद कमजोर कर रहे हैं।
देश की जनता चाहती है सरकार कृषि को प्रोत्साहन दे जिससे देश की सत्तर प्रतिशत बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो जायेगा। पूरी सरकारी मशीनरी भ्रष्ट है अब तो योजनाओं में पहले से ही कार्यपालिका और विधायिका का कमीशन जोड़कर स्टीटमेंट बनाये जाते हैं। ब्यूरोक्रेसी का भ्रष्टाचार देश और समाज में असमानता का वातावरण बना रहा है। भ्रष्टाचारी कर्मचारी या अधिकारी की शिकायत पर त्वरित कार्यवाही हो और जांचकर्ता की भी जांच हो। शिक्षा का अधिकार सशक्त किया जाये तथा शिक्षा एवं चिकित्सा को व्यवसायीकरण से मुक्त किया जाये। यदि कोई राजनेता चाहे वह ग्राम प्रधान, पालिकाध्यक्ष हो या मुख्यमंत्री अथवा प्रधानमंत्री यदि जन भावनाओं के प्रतिकूल कार्य करे तो उसे निर्धारित तिथि से पूर्व हटाने का अधिकार भी जनता के पास हो तभी देश और समाज का भला हो सकता है और देश की स्वतंत्रता, एकता एवं अखण्डता अक्षुण्य रह सकती है।
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