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राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करे राज्य सरकार: कुलदीप सिंह रावत



हरिद्वार। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह रावत ने मांग की है कि उत्तराखण्ड सरकार राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करे और 31 मार्च 18 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के जो कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हुए है उन पर सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करे। शासन स्तर से जिला योजना की जो धनराशि अब तक अब मुक्त नहीं है उससे होने वाले राज्य के नुकसान को सरकार कैसे पूर्ण करेगी इसका स्पष्टीकरण जनता के सामने प्रस्तुत करे।
प्रेस को जारी एक बयान में सपा नेता ने कहा कि राज्य सरकार का ब्यूरोक्रेसी से नियंत्रण समाप्त हो गया है और मुख्यमंत्री की अकुशलता के कारण सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वाह नहीं कर रहे हैं जिसका खामियाजा राज्य की जनता को उठाना पड़ रहा है। 18 साल बीतने के बाद भी राज्य की हो रही दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कुलदीप सिंह रावत ने कहा कि राज्य की सत्ता पर काबिज रही दोनों पार्टियों की कमान दिल्ली के हाथों में होने के कारण यहां के राजनेताओं एवं ब्यूरोक्रेसी ने राज्यहित की न सोचकर केवल अपना-अपना विकास किया है तथा आने वाली किसी भी सरकार ने अपनी पिछली सरकार के समय मेें हुए भ्रष्टाचार पर न कोई जांच करायी न ही कार्यवाही, परिणाम स्वरुप केन्द्र से आने वाली सहायता राशि तथा राज्य में प्राप्त होने वाले राजस्व को कर्मचारियों तथा राजनेताओं के वेतन भत्तों में ही पूर्ण कर दिया जाता है।
उत्तराखण्ड में बारी-बारी से चलने वाली मौसेरे भाइयों की लूट-खसोट से निजात दिलाने के लिए क्षेत्रीय दल की आवश्यकता बताते हुए उन्हांेेने कहा कि समाजवादी पार्टी अब राज्य की जनता को सरकार के काले कारनामों से अवगत करा रही है तथा जनता का भी इन दोनों दलों से मोहभंग हो गया है। हाल ही में सम्पन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में जनता की जानी गयी राय का खुलासा करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी को जनता दिल से चाहती है और सपा सत्ता में आते ही अब तक हुए घोटालों की जांच करवा कर दोषी राजनेताओं को जेल की हवा खिलायेगी। उन्हांेने कांग्रेस तथा भाजपा शासनकाल में एक दर्जन से अधिक हुए बड़े घोटालों को चिन्हित करते हुए कहा कि राज्य की जनता अब संगठित भ्रष्टाचार से मुक्त होकर राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों का विकास चाहती है ताकि पहाड़ों से पलायन को रोककर राज्य अपने पैरों पर खड़ा हो सके। 2021 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुम्भ मेले में 70 प्रतिशत बजट स्थायी कार्यों पर खर्च करने की योजना बनाने की मांग रखते हुए कहा कि अब कुम्भ आयोजन तथा गंगा स्वच्छता के नाम पर जनता के धन की लूट-खसोट नहीं होने दी जायेगी।

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