हरिद्वार। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह रावत ने कहा है कि उत्तराखण्ड की सरकारांे ने कृषि एवं कृषकों को समाप्त कर पहाड़ों को बर्बाद कर दिया है। पहाड़ों पर हल न चलने से कृषि क्षेत्र बंजर हो गए हैं, बरसात का पानी न रुकने से पहाड़ के जल स्रोत सूख गए हैं और मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है जिससे सम्पूर्ण राज्य का अस्तित्व खतरे में है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि कृषि को प्रोत्साहन देकर पहाड़ों को बर्बाद होने से बचायें।
प्रदेश प्रवक्ता रामनरेश यादव के माध्यम से प्रेस को जारी एक बयान में कुलदीप सिंह रावत ने कहा कि पहाड़ों पर सीढ़ीनुमा खेतों में जब हल चलते थे तो बरसात का पानी सोखते थे जिससे फसलों की पैदावार से किसान खुशहाल और वनस्पति हरी भरी रहती थी। राज्य सरकार ने दो-तीन रुपये किलो गेंहू-चावल देकर किसानों को अपना मोहताज बना लिया है। किसानों के खेतों में पैदा होने वाले गेंहू-चावल की लागत बीस रुपये प्रति किलो से अधिक आती है लेकिन सरकार द्वारा दो-तीन रुपये किलो गेंहू-चावल देने से किसानों ने खेती करनी छोड़ दी परन्तु सरकार इतना राशन नहीं देती कि किसान महीने भर खा सकें परिणाम स्वरुप कृषक पहाड़ से पलायन कर गया। पहाड़ की दुर्दशा के लिए राज्य में काबिज रही सरकारों को दोषी बताते हुए सपा नेता ने कहा कि आज पहाड़ पर न कृषि है न कृषक, न शिक्षा है न शिक्षक, न चिकित्सा है न ही चिकित्सक, पहाड़ से जनता ही नहीं नेता भी पलायन कर मैदान से चुनाव लड़ने लगे, शासन स्तर का कोई सरकारी अधिकारी अथवा कर्मचारी भी पहाड़ पर जाना नहीं चाहता इसीलिए उत्तराखण्ड की जनता भाजपा एवं कांग्रेस दोनों से नाराज है और समाजवादी पार्टी की तरफ आशा भरी आंखों से देख रही है।
कुलदीप सिंह रावत ने उत्तराखण्ड की जनता से सपा के प्रति स्नेह बरकरार रखने की अपील करते हुए कहा कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में राज्य के साथ गद्दारी और धोखेबाजी करने वालों को नकार दें तथा संसद को पहाड़ का दर्द बताने के लिए पहाड़ों की दुर्दशा करने वालों के विकल्प के रुप में समाजवादी पार्टी को पहाड़ के पुनर्वास की सेवा का अवसर प्रदान करें।
प्रदेश प्रवक्ता रामनरेश यादव के माध्यम से प्रेस को जारी एक बयान में कुलदीप सिंह रावत ने कहा कि पहाड़ों पर सीढ़ीनुमा खेतों में जब हल चलते थे तो बरसात का पानी सोखते थे जिससे फसलों की पैदावार से किसान खुशहाल और वनस्पति हरी भरी रहती थी। राज्य सरकार ने दो-तीन रुपये किलो गेंहू-चावल देकर किसानों को अपना मोहताज बना लिया है। किसानों के खेतों में पैदा होने वाले गेंहू-चावल की लागत बीस रुपये प्रति किलो से अधिक आती है लेकिन सरकार द्वारा दो-तीन रुपये किलो गेंहू-चावल देने से किसानों ने खेती करनी छोड़ दी परन्तु सरकार इतना राशन नहीं देती कि किसान महीने भर खा सकें परिणाम स्वरुप कृषक पहाड़ से पलायन कर गया। पहाड़ की दुर्दशा के लिए राज्य में काबिज रही सरकारों को दोषी बताते हुए सपा नेता ने कहा कि आज पहाड़ पर न कृषि है न कृषक, न शिक्षा है न शिक्षक, न चिकित्सा है न ही चिकित्सक, पहाड़ से जनता ही नहीं नेता भी पलायन कर मैदान से चुनाव लड़ने लगे, शासन स्तर का कोई सरकारी अधिकारी अथवा कर्मचारी भी पहाड़ पर जाना नहीं चाहता इसीलिए उत्तराखण्ड की जनता भाजपा एवं कांग्रेस दोनों से नाराज है और समाजवादी पार्टी की तरफ आशा भरी आंखों से देख रही है।
कुलदीप सिंह रावत ने उत्तराखण्ड की जनता से सपा के प्रति स्नेह बरकरार रखने की अपील करते हुए कहा कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में राज्य के साथ गद्दारी और धोखेबाजी करने वालों को नकार दें तथा संसद को पहाड़ का दर्द बताने के लिए पहाड़ों की दुर्दशा करने वालों के विकल्प के रुप में समाजवादी पार्टी को पहाड़ के पुनर्वास की सेवा का अवसर प्रदान करें।

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