हरिद्वार। समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता रामनरेश यादव ने कहा है कि उत्तराखण्ड की डलब इंजन वाली सरकार के दोनों इंजन फेल हो गए हैं और राज्य कर्जे के बोझ से कंगाली के कगार पर है। भाजपा विकास कार्यों को छोड़कर व्यर्थ के मुद्दों में जनता का ध्यान भटकता रही हैं। इस नए राज्य का सृजन सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए हुआ था लेकिन यहां के राजनेता और ब्यूरोक्रेट्स मैदानी क्षेत्रों के वातानुकूलित भवनों से सत्ता सुख का आनन्द ले रहे हैं और पहाड़ की जनता पलायन कर घरों से बेघर होने पर मजबूर हैं।
प्रेस को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि यहां की सत्ता पर बारी-बारी से काबिज रहे नेता अवैध खनन और शराब के कारोबार से मालामाल हो रहे हैं तो ब्यूरोक्रेट्स राजस्व को चपत लगाकर आकण्ठ भ्रष्टाचार में डूबे हुए है इसीलिए किसी भी सरकारी भ्रष्टाचार की जांच नहीं होती क्योंकि राजनेता और ब्यूरोक्रेसी दोनों में बंदरबांट हो रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग 74 का घोटाला इसका जीता जागता प्रमाण है जिसमें भ्रष्टाचार के बंदरबांट का भण्डाफोड़ हुआ है। राज्य की माली हालत पर चिंता व्यक्त करते हुए सपा नेता ने कहा कि राज्य सरकार कर्जे पर कर्जा लिए जा रही है इसी वर्ष जून-जुलाई में सरकार ने 300-300 करोड़ की दो किश्ते कर्जों के रुप में लेकर अपने कर्मचारियों के वेतन भत्ते एवं पेंशन इत्यादि का भुगतान किया है और वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक यह कर्जा और बढ़ सकता है। एक करोड़ की आबादी वाले प्रदेश की जनता इसी वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक लगभग पचास हजार करोड़ के कर्जे में डूब जायेगी। डबल इंजन वाली सरकार के कारनामों से जनता को अवगत कराते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी बजट का 44 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्ते तथा पेंशन इत्यादि पर व्यय होता है और 41 प्रतिशत ब्याज और लाभांश के रुप में तथा आठ प्रतिशत निवेश ऋण पर व्यय में जाता है।
उत्तराखण्ड को धरती का स्वर्ग बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां विकास एवं आय की अपार संभावनायें हैं इस राज्य में जड़ी बूटियों का इतना बड़ा स्रोत है कि अकेला उत्तराखण्ड सम्पूर्ण विश्व को आरोग्य प्रदान कर सकता, राज्य की सुन्दर एवं मनोरम वादियों को पर्यटन के रुप में विकसित कर सम्पूर्ण विश्व को आकर्षित किया जा सकता है। जल और जंगल, हिमालय की अक्षय निधियां हैं लेकिन दिल्ली की डोर से उत्तराखण्ड में उड़ने वाली सत्ता की पतंगों ने नए राज्य निर्माण के सपनों को चूर-चूर कर दिया है। 18 साल का युवा होने के बाद भी आज उत्तराखण्ड केन्द्र की आर्थिक वैशाखी के सहारे रेंग रहा है। जिस राज्य की तरुणाई दयनीय हो वह जवानी में ही बूढ़ा नजर आयेगा और कुपोषण का शिकार होकर अल्पायु में कब दम तोड़ दे ऐसी स्थिति को रोकने के लिए राज्य की जनता को अब चोर, लुटरे तथा भ्रष्टाचारियों से मुक्ति पानी होगी। उन्हांेने उत्तर प्रदेश में सपा की अखिलेश यादव सरकार की उपलब्धियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में जो विकास अखिलेश यादव ने किया उससे देश में नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है और राज्य की जनता को अब अपनी भावी पीढ़ी के भविष्य निर्माण हेतु समाजवाद का संवर्द्धन करना होगा तभी नये राज्य निर्माण का सपना साकार होगा।¬
प्रेस को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि यहां की सत्ता पर बारी-बारी से काबिज रहे नेता अवैध खनन और शराब के कारोबार से मालामाल हो रहे हैं तो ब्यूरोक्रेट्स राजस्व को चपत लगाकर आकण्ठ भ्रष्टाचार में डूबे हुए है इसीलिए किसी भी सरकारी भ्रष्टाचार की जांच नहीं होती क्योंकि राजनेता और ब्यूरोक्रेसी दोनों में बंदरबांट हो रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग 74 का घोटाला इसका जीता जागता प्रमाण है जिसमें भ्रष्टाचार के बंदरबांट का भण्डाफोड़ हुआ है। राज्य की माली हालत पर चिंता व्यक्त करते हुए सपा नेता ने कहा कि राज्य सरकार कर्जे पर कर्जा लिए जा रही है इसी वर्ष जून-जुलाई में सरकार ने 300-300 करोड़ की दो किश्ते कर्जों के रुप में लेकर अपने कर्मचारियों के वेतन भत्ते एवं पेंशन इत्यादि का भुगतान किया है और वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक यह कर्जा और बढ़ सकता है। एक करोड़ की आबादी वाले प्रदेश की जनता इसी वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक लगभग पचास हजार करोड़ के कर्जे में डूब जायेगी। डबल इंजन वाली सरकार के कारनामों से जनता को अवगत कराते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी बजट का 44 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्ते तथा पेंशन इत्यादि पर व्यय होता है और 41 प्रतिशत ब्याज और लाभांश के रुप में तथा आठ प्रतिशत निवेश ऋण पर व्यय में जाता है।
उत्तराखण्ड को धरती का स्वर्ग बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां विकास एवं आय की अपार संभावनायें हैं इस राज्य में जड़ी बूटियों का इतना बड़ा स्रोत है कि अकेला उत्तराखण्ड सम्पूर्ण विश्व को आरोग्य प्रदान कर सकता, राज्य की सुन्दर एवं मनोरम वादियों को पर्यटन के रुप में विकसित कर सम्पूर्ण विश्व को आकर्षित किया जा सकता है। जल और जंगल, हिमालय की अक्षय निधियां हैं लेकिन दिल्ली की डोर से उत्तराखण्ड में उड़ने वाली सत्ता की पतंगों ने नए राज्य निर्माण के सपनों को चूर-चूर कर दिया है। 18 साल का युवा होने के बाद भी आज उत्तराखण्ड केन्द्र की आर्थिक वैशाखी के सहारे रेंग रहा है। जिस राज्य की तरुणाई दयनीय हो वह जवानी में ही बूढ़ा नजर आयेगा और कुपोषण का शिकार होकर अल्पायु में कब दम तोड़ दे ऐसी स्थिति को रोकने के लिए राज्य की जनता को अब चोर, लुटरे तथा भ्रष्टाचारियों से मुक्ति पानी होगी। उन्हांेने उत्तर प्रदेश में सपा की अखिलेश यादव सरकार की उपलब्धियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में जो विकास अखिलेश यादव ने किया उससे देश में नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है और राज्य की जनता को अब अपनी भावी पीढ़ी के भविष्य निर्माण हेतु समाजवाद का संवर्द्धन करना होगा तभी नये राज्य निर्माण का सपना साकार होगा।¬
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