हरिद्वार। देश की जनता ने यदि अच्छे दिन देख लिए हों तो अब अपनी पुरानी स्थिति में वापस आ जाये या फिर देश को गुलाम ही बनाना है तो 2014 एक बार फिर दोहरा दो, सबके खातों में 15-15 लाख रुपये आ जायंेेगे, किसानों की आय दोगुनी हो जायेगी, बेरोजगारों को रोजगार मिल जायेंगे, कालाधन भी वापस आ जायेगा यदि किसी ने हमारा एक भी सैनिक मार दिया तो एक के बदले 10 सिर काट कर लाये जायेंगे, राम मंदिर बन जायेगा और कश्मीर से धारा 370 भी समाप्त हो जायेगी अन्यथा चौकीदार विदेशों की सैर करता रहेगा चुपचाप पाकिस्तान में जाकर बिरयानी खायेगा और बड़े-बड़े कर्जदार भारत से करोड़ों रुपये लेकर विदेश भाग जायंेगे। नोटबंदी से पूरी अर्थव्यवस्था चौकीदार की मुट्ठी में होगी और जीएसटी के माध्यम से कमाने खाने वालों को कंगाली की ओर मोड़ दिया जायेगा। इसके अलावा गुलामी के और कौन-कौन से संकेत हैं कुछ दिमाग पर भी जोर देकर देखना चाहिए, बहुत हो गयी अंध भक्ति यदि साढ़े चार साल में भूत नहीं उतरा तो यह जिन्न बनकर बार-बार प्रकट होता रहेगा।
हमारे प्यारे शिक्षित देशवासियों आज हम इस स्थिति में हैं कि किसी माध्यम के मोहताज न होकर हम स्वयं माध्यम हैं आप शक्तिमान और सुविधा सम्पन्न हैं अपने पूर्वजों के चरित्र और अतीत के इतिहास से सबक लो। जब कोई व्यक्ति सर्वशक्तिमान हो जाता है चाहे वह रावण जैसा चारो वेदों का ज्ञाता ही क्यों न हो उसे अंहकार हो जाता है और वह अपने बराबर किसी को नहीं समझता। त्रेता ही नहीं द्वापर में कौरवों ने भी पाण्डवों के साथ यही किया। 1975 में इन्दिरा गांधी ने भी देश की जनता के साथ यही किया। क्या आपको वैसा ही पसंद है अब तक हुआ या आप बदलाव चाहते हैं देश में प्रत्येक नागरिक की स्वतंत्रता बहाल देखना चाहते हैं तो ध्यान रखना सत्ता किसी को लगातार मत देना और प्रचण्ड बहुमत से मत देना क्योंकि लोकतंत्र विपक्ष की मजबूती से चलता है सत्ता की शक्ति तो तानाशाही में बदल जाती है और संवैधानिक संस्थायें तथा पद सभी गौण हो जाते हैं इन साढ़े चार साल का अनुभव है कि चुनाव आयोग पर ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगे लेकिन कोई बदलाव नहीं। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सीमा लांघकर अपना दर्द रोया लेकिन कोई बलाव नहीं, राज्यों के गवर्नर एक दल विशेष के कार्यकर्त्ता के रुप में कार्य कर रहे और अब सीबीआई में जो हो रहा पूरा विश्व देख रहा है भारत का जुलूस निकल रहा है। यह सब सत्ता की मजबूती का परिणाम है।
अब तक का इतिहास रहा है कि गठबंधन की सरकार कभी तानाशाह नहीं बनी, कभी घोटालेबाज नहीं हुई और न ही किसी संवैधानिक पद पर संकट आया। जरा सोचो उत्तराखण्ड से नारायणदत्त तिवारी का पांच साल का कार्यकाल यदि माइनस कर दिया जाये तो शेष तेरह वर्षों की उन तेरह जनपदों में क्या उपलब्धियां हैं। हरिद्वार में 2010 के कुम्भ मेले में क्या हुआ? हरिद्वार का स्वरुप कैसा हो गया, न कोई पेड़ बचा, न सार्वजनिक मूत्रालय और न ही गली-मौहल्ले में कहीं पीने के पानी की व्यवस्था, शहर से सारे पेड़ कटवा दिए, सौन्दर्यीकरण के नाम पर नालियां ढकवा दीं लेकिन नालों को जल निकासी से नहीं जोड़ा, बरसात का पानी सड़कों पर होता है। गृहकर, सीवर कर, जलकर सब बढ़ा दिए, प्रतिबन्धित शहर होते हुए भी शराब के ठेके शहर की सीमा पर लाकर स्थापित कर दिए, अंग्रेजों के जमाने में बने नगरपालिका बायलाज का खुला उल्लंघन इससे भी अधिक देखने की तमन्ना है तो फिर नगरनिगम में बनवा दो उसी दल का बोर्ड?
हमारे प्यारे शिक्षित देशवासियों आज हम इस स्थिति में हैं कि किसी माध्यम के मोहताज न होकर हम स्वयं माध्यम हैं आप शक्तिमान और सुविधा सम्पन्न हैं अपने पूर्वजों के चरित्र और अतीत के इतिहास से सबक लो। जब कोई व्यक्ति सर्वशक्तिमान हो जाता है चाहे वह रावण जैसा चारो वेदों का ज्ञाता ही क्यों न हो उसे अंहकार हो जाता है और वह अपने बराबर किसी को नहीं समझता। त्रेता ही नहीं द्वापर में कौरवों ने भी पाण्डवों के साथ यही किया। 1975 में इन्दिरा गांधी ने भी देश की जनता के साथ यही किया। क्या आपको वैसा ही पसंद है अब तक हुआ या आप बदलाव चाहते हैं देश में प्रत्येक नागरिक की स्वतंत्रता बहाल देखना चाहते हैं तो ध्यान रखना सत्ता किसी को लगातार मत देना और प्रचण्ड बहुमत से मत देना क्योंकि लोकतंत्र विपक्ष की मजबूती से चलता है सत्ता की शक्ति तो तानाशाही में बदल जाती है और संवैधानिक संस्थायें तथा पद सभी गौण हो जाते हैं इन साढ़े चार साल का अनुभव है कि चुनाव आयोग पर ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगे लेकिन कोई बदलाव नहीं। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सीमा लांघकर अपना दर्द रोया लेकिन कोई बलाव नहीं, राज्यों के गवर्नर एक दल विशेष के कार्यकर्त्ता के रुप में कार्य कर रहे और अब सीबीआई में जो हो रहा पूरा विश्व देख रहा है भारत का जुलूस निकल रहा है। यह सब सत्ता की मजबूती का परिणाम है।
अब तक का इतिहास रहा है कि गठबंधन की सरकार कभी तानाशाह नहीं बनी, कभी घोटालेबाज नहीं हुई और न ही किसी संवैधानिक पद पर संकट आया। जरा सोचो उत्तराखण्ड से नारायणदत्त तिवारी का पांच साल का कार्यकाल यदि माइनस कर दिया जाये तो शेष तेरह वर्षों की उन तेरह जनपदों में क्या उपलब्धियां हैं। हरिद्वार में 2010 के कुम्भ मेले में क्या हुआ? हरिद्वार का स्वरुप कैसा हो गया, न कोई पेड़ बचा, न सार्वजनिक मूत्रालय और न ही गली-मौहल्ले में कहीं पीने के पानी की व्यवस्था, शहर से सारे पेड़ कटवा दिए, सौन्दर्यीकरण के नाम पर नालियां ढकवा दीं लेकिन नालों को जल निकासी से नहीं जोड़ा, बरसात का पानी सड़कों पर होता है। गृहकर, सीवर कर, जलकर सब बढ़ा दिए, प्रतिबन्धित शहर होते हुए भी शराब के ठेके शहर की सीमा पर लाकर स्थापित कर दिए, अंग्रेजों के जमाने में बने नगरपालिका बायलाज का खुला उल्लंघन इससे भी अधिक देखने की तमन्ना है तो फिर नगरनिगम में बनवा दो उसी दल का बोर्ड?
Comments
Post a Comment